आगरा के SN मेडिकल कॉलेज में रैगिंग! MBBS के जूनियर-सीनियर छात्रों में समझौता
शिकायत पर चार छात्रों के खिलाफ दर्ज हो चुका है मुकदमा, पुलिस ने कहा- लिखित में नहीं मिला समझौता पत्र

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 5, 2026 at 1:50 PM IST
आगरा: एसएन मेडिकल कॉलेज में MBBS के जूनियर छात्र ने सीनियर छात्रों पर रैगिंग का आरोप लगाया था. आरोप था कि विरोध पर गुस्साए सीनियर्स छात्रों ने जूनियर छात्र की जमकर पिटाई की. पीड़ित छात्र की तहरीर पर एमएम गेट थाना पुलिस ने सीनियर छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. मेडिकल कॉलेज में सीनियर और जूनियर के विवाद को लेकर कॉलेज प्रशासन हरकत में आया. जिस पर सोमवार को दिनभर मेडिकल कॉलेज में दोनों पक्ष जमे रहे. थाने में लंबी वार्ता हुई. जिसके बाद अब दोनों पक्ष में समझौता हो गया है.
एमएम गेट थाना पुलिस को एमबीबीएस 2023 बैच के छात्र रामकुमार ने शिकायत दी कि एक जनवरी की रात करीब 9.15 बजे एसएन मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल की पार्किंग में अपनी गाड़ी खड़ी कर रहा था. उसी दौरान पार्किंग में मौजूद एमबीबीएस के सीनियर छात्र सूरज चौधरी, रितुराज जाटव, गौतम बडेरिया और विवेक ने रैगिंग करने का प्रयास किया. जब विरोध किया तो सीनियर्स ने मारपीट की. हमलावरों की संख्या अधिक होने पर अपने भाई लखन को मौके पर बुलाया. छात्र रामकुमार का आरोप है कि सीनियर छात्रों ने उसकी और उसके भाई की पिटाई की. साथ ही जान से मारने की धमकी दी. डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि एमबीबीएस छात्र की शिकायत पर सीनियर्स के खिलाफ मारपीट और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है.
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि मामला मेडिकल छात्रों में आपसी लड़ाई-झगड़े का है. जिसकी जानकारी प्रोक्टोरियल बोर्ड को है. दो जनवरी को बोर्ड से पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी थी, मगर अवकाश की वजह से सोमवार दोपहर तक रिपोर्ट नहीं मिली. दोनों पक्ष के बयान हो चुके हैं. शिकायत करने वाला छात्र हॉस्टल में नहीं रहता है. अब दोनों पक्ष में पुलिस की मौजूदगी में समझौता करने की बात कही है. अभी प्रोक्टोरियल बोर्ड की रिपोर्ट नहीं मिली है. रिपोर्ट मिलने पर इस मामले में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
मदन मोहन गेट थाना के थानाध्यक्ष रोहित कुमार ने बताया कि दोनों पक्ष के लोगों में थाना पर बैठकर बातें हुईं. जहां पर दोनों पक्ष ने समझौता करने की बात कही है. मगर, अभी तक पीड़ित या आरोपी पक्ष की ओर से लिखित में समझौता नहीं मिला है. इसके साथ ही एसएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कोई जांच रिपोर्ट नहीं मिली है. इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत करा दिया है.
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि पीडित छात्र हॉस्टल में नहीं रहता है. उसका भाई नॉन मेडिको है. इसके बाद भी दोनों हॉस्टल में कैसे और क्यों गए, प्रोक्टोरियल बोर्ड की रिपोर्ट में इसका भी जबाव होगा. इसके साथ ही अब इस घटना के बाद हर हॉस्टल में आने-जाने वाले की एंट्री को लेकर सख्त नियम बनाए जाएंगे. जिससे कोई बाहरी हॉस्टल में एंट्री नहीं कर पाए. इस बारे में अधिकारियों संग बैठक की है.
रैगिंग पर क्या है कानून: रैगिंग के खिलाफ भारत में कई कानून और नियम हैं, जिनमें UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के दिशानिर्देश, राज्य-स्तरीय अधिनियम (जैसे उत्तर प्रदेश) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएं शामिल हैं, जो रैगिंग को एक आपराधिक कृत्य मानते हैं. इसमें दो साल तक की कैद, ₹10,000 तक का जुर्माना, कॉलेज से निष्कासन, छात्रवृत्ति रोकना और अन्य संस्थागत दंड का प्रावधान है. जिसमें पुलिस FIR भी दर्ज की जा सकती है.
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