वॉटर पार्क में मासूम की मौत का मामला; 42 स्विमिंग पूल संचालकों को नोटिस, जानें-रजिस्ट्रेशन का पूरा खेल
आगरा किरावली थाना क्षेत्र के सकतपुर के वाटर पार्क में 17 मई को आठ वर्षीय मासूम मनित की डूबने से मौत हो गई थी.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : May 20, 2026 at 9:50 AM IST
आगरा : किरावली थाना क्षेत्र के मिढ़ाकुर स्थित तेवतिया वाटर पार्क में आठ वर्षीय मनित की डूबने से मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है. परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है. माता और पिता का कहना है कि बेटा मनित छोटे वाले पूल से बड़े पूल की तरफ चला गया था, लेकिन उसे किसी कर्मचारी नहीं रोका. मनित के पिता जूता कारोबारी पिता रोबिन सिंह और मां नीलम ने वाॅटर पार्क प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है. इसके बावजूद अभी तक प्रशासनिक स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. पढ़ें आगरा में संचालित वाटर पार्कों की स्थिति और प्रबंधन पर ईटीवी भारत की खास रिपोर्ट...
आगरा में 51 से अधिक वाटर पार्क संचालित हैं, लेकिन अधिकतर ने वाॅटर पार्क का रजिस्ट्रेशन नगर निगम, एडीए, जिला प्रशासन और खेल विभाग में नहीं कराया गया है. हालांकि इस सत्र में 9 स्विमिंग पूल का रजिस्ट्रेशन किया गया है. क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी संजय शर्मा और एडीए के प्रवर्तन प्रभारी सुरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि वाटर पार्क और स्विमिंग पूल संचालक जरूरी सुरक्षा जरूरतें पूरा करने से बचने के चलते ही रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं. ऐसे में होने वाली दुर्घटनाओं के लिए आखिर जिम्मेदारी कौन लेगा. इसके जवाब इन अधिकारियों के पास नहीं है. हालांकि एडीए के प्रवर्तन प्रभारी सुरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि शहर में संचालित स्विमिंग पूल और प्राधिकरण की सीमा में संचालित वाटर पार्कों का सर्वे कराया जाएगा. अवैध स्विमिंग पूल और वाटर पार्कों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
तहरीर मिलने पर होगा मुकदमा : मिढ़ाकुर स्थित तेवतिया वाटर पार्क में आठ वर्षीय मनित की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है. परिवार का कहना है कि कर्मचारियों को कोई परवाह नहीं थी. पूल का पानी गंदा था. जिससे ही पूल में नीचे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. करीब आधे घंटे बाद मनित को बाहर निकाला गया. तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इस बारे में डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि तहरीर मिलने पर मुकदमा लिखा जाएगा.
रजिस्ट्रेशन के नियम व जरूरी एनओसी
भू-उपयोग : वाॅटर पार्क या स्विमिंग पूल केवल उसी जमीन पर बन सकता है. जिसका लैंड-उपयोग कामर्शियल (व्यावसायिक) या मनोरंजन के लिए निर्धारित किया गया हो.
एनओसी : वाॅटर पार्क या स्विमिंग पूल के लिए खेल विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है.
लाइफगार्ड्स : वाॅटर पार्क या स्विमिंग पूल में प्रशिक्षित और प्रमाणित पुरुष व महिला लाइफगार्ड्स की तैनाती अनिवार्य है.
गहराई के नियम : वाॅटर पार्क या स्विमिंग पूल की बात करें तो बच्चों के लिए अलग पूल या हिस्से होते हैं, जिनकी गहराई तय मानकों (जैसे 40 सेमी से कम) के अनुसार ही होनी चाहिए.
प्राथमिक उपचार : वाॅटर पार्क या स्विमिंग पूल में प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी और फर्स्ट-एड (प्राथमिक उपचार) किट की उपलब्धता आवश्यक है.
पर्यावरण मंजूरी : वाॅटर पार्क या स्विमिंग पूल के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी बेहद जरूरी है. क्योंकि वाॅटर पार्क में भारी मात्रा में पानी की खपत और रीसाइक्लिंग होती है.
जल की गुणवत्ता : वाॅटर पार्क या स्विमिंग पूल में पानी की सफाई और क्लोरीन के स्तर को बनाए रखने के लिए सख्त नियम होते हैं.
समय-सीमा : वाॅटर पार्क या स्विमिंग पूल का वाणिज्यिक रूप से संचालन किया जाता है. इसलिए समय और शुल्क स्थानीय प्रशासन की तय करता है.
42 स्विमिंग पूल संचालकों को नोटिस : आगरा की बात करें तो 51 स्विमिंग पूल हैं. वर्ष 2026-27 के लिए 51 स्विमिंग पूल में से केवल 9 ने स्विमिंग पूल का रजिस्ट्रेशन कराया है. ऐसे ही 25 जिम में से 6 जिम संचालक ने रजिस्ट्रेशन कराया है. खेल विभाग ने 42 स्विमिंग पूल संचालकों को नोटिस जारी कर रजिस्ट्रेशन के लिए निर्देश दिया है. क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी संजय शर्मा ने बताया कि आगरा में वर्ष 2026-27 के लिए अभी तक केवल 9 स्विमिंग पूल संचालकों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है. बाकी संचालकों को रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं खेल विभाग में अभी तक एक भी वाटर पार्क का रजिस्टेशन नहीं हुआ है. इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को भी जानकारी दी गई है.
रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी उपकरण : क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी संजय शर्मा ने बताया कि स्विमिंग पूल संचालन के लिए सेफ्टी ट्यूब, लाइफ सेवर, ऑक्सीजन सिलिंडर सबसे अधिक जरूरी होते हैं. संचालक खर्चा बचाने के लिए इन प्राथमिक जरूरतों को भी पूरा नहीं करते हैं. इसलिए ही रजिस्ट्रेशन कराने से बचते हैं.
बाउंसर रखे, लाइफ सेवर नहीं : जिले में जो भी वॉटर पार्क या स्विमिंग पूल हैं. वहां पर संचालकों ने बाउंसर रख रखे हैं. जिससे यदि किसी से विवाद हो जाए तो बाउंसर से डराया या धमकाया जा सके. वाॅटर पार्क और स्विमिंग पूल में बाउंसर से जरूरी भूमिका लाइफ सेवर की होती है. लाइफ सेवर प्रशिक्षित होते हैं. इसलिए वाॅटर पार्क में मासूम मनित की मौत से वाॅटर पार्क और स्विमिंग पूल में लाइफ सेवर की तैनाती का मामला उठ रहा है.
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