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आगरा में अंग्रेजों के जमाने का कारोबार; हर दिन बन रहे 22 लाख ब्रश, 500 करोड़ का आंकड़ा पार

अंग्रेजी शासनकाल में शुरू हुआ ब्रश कारोबार अब तेजी से बढ़ रहा है. देशभर में 70 प्रतिशत तक ब्रश की आपूर्ति आगरा से होती है.

आगरा में ब्रश का कारोबार
आगरा में ब्रश का कारोबार (Photo Credit : ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 3, 2026 at 2:46 PM IST

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Updated : January 4, 2026 at 2:43 PM IST

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आगरा (श्यामवीर सिंह) : देश और दुनिया में आगरा की पहचान ताजमहल, पेठा और लेदर व नॉनलेदर जूतों से है. हालांकि आगरा में ब्रिटिशकाल से ब्रश कारोबार भी है, जो अब चाइना को टक्कर देने के साथ देश-दुनिया में अपनी धाक जमा रहा है. आगरा में बने ब्रश की देश में 70 प्रतिशत भागीदारी है. आगरा का ब्रश कारोबार 500 करोड़ का आंकड़ा पार करके अब एक जिला, एक उत्पाद में शामिल होने को तैयार है. पढ़ें ईटीवी भारत की स्पेशल रिपोर्ट...

देखें ; आगरा के ब्रश कारोबार पर श्यामवीर सिंह की खास खबर. (Video Credit : ETV Bharat)

अंग्रेजों ने कराई थी ब्रश बनाने की शुरुआत : ब्रश कारोबारी अरुण जैन ने बताया कि आगरा में ब्रश बनाने की शुरुआत अंग्रेजों ने कराई थी. अंग्रेजी हुकूमत के अफसरों ने तब टॉयलेट ब्रश बनाने का काम शुरू कराया था. उस समय लकड़ी के डंडे में छेद करके ब्रश तैयार किए थे. इसी दौरान कोलकाता में ब्रश बनाने का काम शुरू कराया गया था. आगरा में हाउस होल्ड ब्रश बनाए जाते थे और कोलकाता में इंडस्ट्रीज में उपयोग होने वाले ब्रश बनते थे. कालांतर में चीन के बने ब्रश भारत पहुंचे तो सस्ते ब्रश और देखने में आकर्षक होने की वजह से आगरा के ब्रश कारोबार पर असर हुआ. इसके बाद कारोबारियों ने चीन से मशीनरी खरीदकर ब्रश बनाना शुरू कर किया. वर्तमान की बात करें तो देश के ब्रश कारोबार में आगरा की भागीदारी 70 प्रतिशत है.

विदेश में भी आगरा के ब्रश की डिमांड
विदेश में भी आगरा के ब्रश की डिमांड (Photo Credit : ETV Bharat)


कुटीर उद्योग के साथ बड़ी यूनिट : ब्रश कारोबारी अनिल अग्रवाल ने बताया कि अंग्रेजों के समय देश में आगरा और कोलकाता में ही ब्रश का बनाने काम होता था. तब हाथ से ब्रश बनाए जाते थे. हाथ से ही लकड़ी की छिदाई होती थी. ब्रश बनाने का सारा काम हाथ से ही होता था. 100 साल से अधिक समय से आगरा में ब्रश बनाने का काम हो रहा है, लेकिन हाथ की जगह अब मशीनों को इस्तेमाल हो रहा है. यही वजह है कि आगरा में ब्रश निर्माण का कार्य कुटीर उद्योग में तब्दील हो चुका है. अब कई इलाकों में घर घर ब्रश बनाए जा रहे हैं. यहां ब्रश बनाने की छोटी-बड़ी सभी तरह की यूनिट हैं. मैंने ही सबसे पहले वर्ष 2004 में जर्मनी की सीएनसी मशीन मंगाई थी. फिलवक्त आगरा में जर्मनी के साथ ही चीन की मशीनें भी आ चुकी हैं.

आगरा में ब्रश कारोबार.
आगरा में ब्रश कारोबार. (Photo Credit : ETV Bharat)

स्वच्छ भारत अभियान में शत प्रतिशत भागीदारी ; ब्रश कारोबारी अजय कुमार सिंह चौहान उर्फ अज्जू चौहान ने बताया कि अब आगरा में पेठा और शूज से ज्यादा ब्रश बनाने का काम है. आगरा में हर दिन सात लाख से अधिक अलग अलग तरह के ब्रश बनाए जाते हैं. इस काम से स्वच्छ भारत अभियान में भी मदद हो रही है. हमारी कंपनी पानी की खाली बोतलों को रिसाइकिल करके ब्रश बनाने में उपयोग करती है. इसके अलावा कई तरह अन्य की प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है. ब्रश कारोबार के ओडीओपी में आने से ग्रोथ में और तेजी आएगी.

ब्रश कारोबार से सुधर रही महिलाओं की आर्थिकी.
ब्रश कारोबार से सुधर रही महिलाओं की आर्थिकी. (Photo Credit : ETV Bharat)

ब्रश कारोबार को ओडीओपी में लाने की तैयारी : आगरा मंडल के संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार ने बताया कि आगरा में ब्रश कारोबार तेजी से ग्रोथ कर रहा है. आगरा के बने ब्रश की डिमांड देशभर में हैं. विदेश में भी आगरा का ब्रश एक्सपोर्ट किया जा रहा है. अब आगरा के ब्रश कारोबार को एक जिला, एक उत्पाद में शामिल करने की पूरी प्रक्रिया तैयार करके सरकार को भेजी गई है. फिलाहल डीओपी में आगरा के लेदर प्रोडेक्ट, मार्बल हैंडीक्राफ्ट, लेदर और नॉनलेदर शूज व पेठा कारोबार शामिल है. नए साल में ब्रश कारोबार के भी ओडीओपी में शामिल होने की उम्मीद है.

ये हो तो बढ़े कारोबार.
ये हो तो बढ़े कारोबार. (Photo Credit : ETV Bharat)


आगरा के इन क्षेत्रो में घर-घर बन रहे ब्रश : नुनिहाई, प्रकाश नगर, अब्बास नगर, गढी चांदनी, नगला देवजीत, बजीरपुरा, नरायच, नगला रामबल, शाहदरा, टेढ़ी बगिया, नगला किशनलाल, नगला छउआ समेत कई मोहल्लों में ब्रश निर्माण किया जाता है. आंकड़ों के मुताबिक 400 से अधिक ब्रश बनाने की छोटी-बड़ी यूनिट आगरा में हैं. इस कारोबार से करीब 40 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है.

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Last Updated : January 4, 2026 at 2:43 PM IST