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आयड नदी को बचाने गूंजे ढोल, 12 गांवों के लोगों ने शंखनाद के साथ किया महाआंदोलन का आगाज

ग्रामीणों की मांग है कि आयड नदी को प्रदूषण से बचाया जाए. नदी में प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो.

Villagers playing drums during the protest
आंदोलन के दौरान ढोल बजाते ग्रामीण (ETV Bharat Udaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 25, 2026 at 3:18 PM IST

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उदयपुर: जिले के ग्राम कानपुर खेड़ा स्थित आयड नदी पुलिया पर बुधवार को आयड नदी को प्रदूषण मुक्त कराने की मांग को लेकर महाआंदोलन आयोजित किया गया. यह जनआंदोलन मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित हुआ. जिसमें क्षेत्र के 12 गांवों के ग्रामीणों ने भाग लिया. आंदोलन का मुख्य उद्देश्य आयड नदी को उसके मूल स्वरूप में पुनर्जीवित करना और उसे स्वच्छ बनाना है.

आंदोलन की शुरुआत साधु-संतों और ग्रामीणों की ओर से शंखनाद के साथ किया गया. इसके बाद 12 गांवों के प्रतिनिधियों ने एक साथ 12 ढोल बजाकर जनजागरण का संदेश दिया. ढोल की गूंज और 'आयड नदी को शुद्ध करो' जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. यह दृश्य आंदोलन की व्यापकता और जनसमर्थन का प्रतीक बना.

आयड नदी को लेकर ये है मांगें (ETV Bharat Udaipur)

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ग्रामीणों ने बताया कि आयड नदी कभी इस क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती थी. इससे खेती, पशुपालन और पेयजल जैसी आवश्यकताओं की पूर्ति होती थी. लेकिन समय के साथ बढ़ते प्रदूषण, शहर के गंदे नालों के सीधे प्रवाह और प्रशासनिक लापरवाही के कारण नदी की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है. नदी का जल दूषित होने से आसपास के गांवों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. जिससे लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है.

Villagers sitting on protest
धरने पर बैठे ग्रामीण (ETV Bharat Udaipur)

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आंदोलन के संयोजक विष्णु पटेल ने बताया कि यह आंदोलन केवल नदी को बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की लड़ाई है. उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा. आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे. सभी ने एकजुट होकर आयड नदी को स्वच्छ बनाने और उसके संरक्षण के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया.