मध्य प्रदेश मां बगलामुखी मंदिर में करोड़ों के दान चोरी का आरोप, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
अयोध्या राम मंदिर के बाद मध्य प्रदेश के बगलामुखी शक्तिपीठ मंदिर में करोड़ों के दान गबन का मामला, प्राइवेट कंपनी पर नकदी, सोना-चांदी इकट्ठा करने का आरोप. सिद्धार्थ माछीवाल की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 8, 2026 at 1:02 PM IST
|Updated : July 8, 2026 at 2:14 PM IST
आगर मालवा: देश में इस समय सबसे ज्यादा सुर्खियों में अयोध्या के राम मंदिर दान चोरी का मामला चल रहा है. इस मामले को लेकर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं, वहीं इस बीच मध्य प्रदेश के करोड़ों के दान वाले मंदिरों में भी दान के गबन और चंदा चोरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इस क्रम में आगर मालवा के बगलामुखी शक्तिपीठ मंदिर का नाम आया है. आरोप है कि मंदिर में करोड़ों की धनराशि और गहनों के गबन का हुआ है. इस मामले में कलेक्टर ने तीन सदस्य जांच दल बनाकर मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
गैर सरकारी संगठन देख रहा मंदिर के दान की व्यवस्था
बगलामुखी मंदिर परिसर में एक गैर सरकारी संगठन ने बिना आधिकारिक मंजूरी के पूजा के लिए यज्ञ-हवन और दान की समानांतर व्यवस्था कर रखी थी. इसके लिए बाकायदा रसीद काटने से लेकर दान प्राप्त करने के लिए निजी बैंक अकाउंट और गबन की सारी व्यवस्थाएं की गई थी. इस मामले की शिकायत आगर मालवा कलेक्टर प्रीति यादव से की गई. जिसके बाद कलेक्टर ने मंगलवार को एक तीन-सदस्यीय जांच समिति बनाकर पूरे मामले की बारीकी से जांच के आदेश दिए हैं.

प्राइवेट कंपनी इकट्ठा करती है सोना-चांदी और नकदी
समिति उन शिकायतों की जांच करेगी, जिनमें कहा गया है कि 2024 से मंदिर के अंदर एक प्राइवेट कमेटी काम कर रही है. वह बिना किसी कानूनी अधिकार के अपनी रसीदें जारी करके दान ले रही है. कलेक्टर प्रीति यादव ने बताया कि "साल 2024 से मंदिर में सक्रिय इस संस्था ने डोनेशन स्लिप के तौर पर रसीद बुक छपवाई और मंदिर परिसर के अंदर भक्तों से नकद, सोना और चांदी के गहने इकट्ठा करने के लिए इनका इस्तेमाल किया. इतना ही नहीं रसीदों पर एक प्राइवेट बैंक का अकाउंट नंबर और कई मोबाइल नंबर लिखे हुए हैं."

यह है मंदिर की व्यवस्था
बगलामुखी मंदिर की व्यवस्था फिलहाल आगर मालवा जिला प्रशासन के अधीन एक आधिकारिक प्रबंध समिति के जिम्मे है. जो मंदिर की पूजा प्रक्रिया और परिसर की व्यवस्थाओं का कामकाज देखती है. इसके प्रमुख नलखेड़ा एसडीएम होते हैं. इसके अलावा मंदिर में न तो किसी प्राइवेट संस्था को दान या गहने इकट्ठे करने की कोई अनुमति है, ना ही ऐसा कोई प्रावधान है. फिर भी इस संस्था ने पिछले दो सालों से अनधिकृत तौर पर लाखों रुपए की कीमत का कैश और सोने-चांदी के गहने इकट्ठा किए और निजी बैंक खातों में जमा करवा लिए.
कलेक्टर ने गठित की जांच समिति
इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि इतने सालों तक ना तो मंदिर समिति को कारनामे की भनक लगी और न ही मंदिर में कितनी धनराशि और सोना चांदी आया, इसका ही कोई हिसाब रखा गया. ऐसी स्थिति में अब पता करना मुश्किल है कि यह संस्था कितने करोड़ रुपए का अब तक गबन कर चुकी है. कलेक्टर प्रीति यादव ने बताया कि मंदिर में दान चोरी को लेकर एक शिकायत मिली थी. जिसके बाद जांच समिति गठित की गई है. जिसमें प्रमुख मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बीएस सोलंकी हैं और इसमें जिला कोषागार अधिकारी मनीष सोलंकी और नलखेड़ा की मुख्य नगर पालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल सदस्य के तौर पर शामिल हैं.

जिन्हें मंदिर परिसर का निरीक्षण करने, दान इकट्ठा करने की प्रक्रिया की जांच करने, नकद, सोना और चांदी के संग्रह से जुड़े खातों का सत्यापन करने और 7 दिनों के भीतर सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है."
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इसलिए प्रसिद्ध है नलखेड़ा मंदिर
नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं. जिनमें कई बड़े राजनेता भी शामिल हैं, जो खासकर चुनाव के समय अपने विरोधियों पर जीत पाने के लिए यहां पूजा-अर्चना करते हैं. वहीं नलखेड़ा का बगलामुखी मंदिर तंत्र साधना का भी केंद्र है. यहां प्रतिदिन मंदिर के परिसर से सटे शमशान में तंत्र साधना के लिए यज्ञ हवन पूजन का क्रम लगातार चलता है.

