विवादों में कांगड़ा वैली कार्निवल, सरकार को चंदा मांगना पड़ा भारी, अब आदेश लिया वापस
कांगड़ा वैली कार्निवल को लेकर उठे विवाद के चलते सरकार ने 'योगदान' मांगने वाला पत्र वापस ले लिया है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 22, 2025 at 7:55 AM IST
धर्मशाला: कांगड़ा वैली कार्निवाल आयोजन को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब कार्निवल के आयोजन को लेकर जिला प्रशासन और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग विवादों में घिरता नजर आया. जब पेट्रोल पंप, एलपीजी एजेंसियों, एचपीटीए लाइसेंसधारकों, चावल व आटा मिल मालिकों और ईंट भट्ठा संचालकों से 'योगदान' मांगे जाने का पत्र जारी किया गया. मामले में राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से इस पत्र को वापस ले लिया है.
17 दिसंबर को जारी पत्र को लिया वापस
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, कांगड़ा द्वारा जारी कार्यालय आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 17 दिसंबर 2025 को जारी पत्र संख्या 18937-941, जिसके जरिए कांगड़ा वैली कार्निवल के लिए योगदान देने का अनुरोध किया गया था, अब निरस्त (cancel) माना जाए. आदेश के मुताबिक संबंधित सभी प्रतिष्ठानों को किसी प्रकार की कार्रवाई करने की जरुरत नहीं है.

विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद विपक्ष ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला है. विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने उत्सव के नाम पर व्यापारियों पर दबाव बनाया है और जबरन योगदान (पैसे) वसूलने की कोशिश की है. जो पूरी तरह से गलत हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है. भाजपा ने इसे 'अघोषित टैक्स' (undeclared tax) करार दिया है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. वहीं, धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने भी पत्र वापस लेने के आदेश पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए चुटीले अंदाज में प्रशासन और सरकार का आभार जताया.
भाजपा विधायक ने लगाए थे गंभीर आरोप
गौरतलब है कि भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने पहले ही मुद्दे पर आवाज उठाई थी और सुक्खू सरकार पर व्यापारियों से वसूली करने के आरोप लगाए थे. सुधीर शर्मा का कहना था कि कांगड़ा वैली कार्निवल जैसे सांस्कृतिक आयोजन सरकार की जिम्मेदारी होते हैं न की लोगों की. इनके लिए पहले से ही बजट तय किया जाना चाहिए. भाजपा विधायक ने सरकार और जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर व्यापारियों से ये उगाड़ी तुरंत बंद नहीं हुई तो भाजपा इसके खिलाफ सड़कों पर उतरेगी.
मामले पर सरकार की सफाई
वहीं, इस सारे मामले को लेकर सत्तापक्ष की ओर से सफाई दी जा रही है. विभाग का कहना है कि ये पत्र सिर्फ स्वैच्छिक सहयोग के उद्देश्य से जारी किया गया था. व्यापारियों या किसी पर भी किसी भी तरह का दबाव नहीं बनाया गया है, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद गलतफहमी दूर करने के लिए पत्र को वापस ले लिया गया है. वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांगड़ा वैली कार्निवल जैसे बड़े आयोजन से पहले इस तरह का मामला सामने आना राज्य सरकार के लिए असहज की स्थिति पैदा कर सकता है. आने वाले दिनों में ये मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़क तक सियासी बहस का विषय बन सकता है.

