ETV Bharat / state

केदारघाटी के कंडारा गांव में शिला पर भगवान शिव के परिवार की आकृतियां मिलने का दावा, पूजा अर्चना शुरू

रुद्रप्रयाग के कंडारा में पहाड़ी से मलबा हटते ही शिव परिवार की आकृतियां मिली है. जिसके बाद लोग दर्शन करने पहुंच रहे हैं.

RUDRAPRAYAG SHIVA FAMILY TEMPLE
शिला पर स्वयंभू भगवान शिव के परिवार की आकृतियां (फोटो सोर्स- Villagers)
author img

By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : June 30, 2026 at 4:06 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

रुद्रप्रयाग: इन दिनों कंडारा गांव आस्था और श्रद्धा का नया केंद्र बन गया है. जहां प्राचीन हनुमान मंदिर के पास पहाड़ी से मलबा हटाने के दौरान एक विशाल शिला पर स्वयंभू भगवान शिव के परिवार की आकृतियां मिली है. जिसका दावा ग्रामीण और हनुमान मंदिर के संत पंचम दास कर रहे हैं.

इस अद्भुत दृश्य के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण है. दूर-दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. इतना ही नहीं हर सोमवार को जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधिवत पूजा-अर्चना की जा रही है.

हनुमान मंदिर में तपस्या कर रहे संत पंचम दास: स्वयंभू शिव परिवार के पास प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में सालों से तपस्या कर रहे संत पंचम दास महाराज ने इस दिव्य घटना से जुड़े अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि उन्हें लंबे समय से इस स्थान पर किसी दिव्य शक्ति के विराजमान होने का आभास होता था.

संत पंचम दास का कहना है कि वे सालों तक नियमित रूप से बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए जाते रहे, लेकिन पिछले दो-तीन सालों से यात्रा मार्गों में बढ़ती भीड़, गंदगी और अव्यवस्था के कारण उन्होंने धाम जाना छोड़ दिया.

RUDRAPRAYAG SHIVA FAMILY TEMPLE
भगवान शिव के परिवार की आकृतियां (फोटो सोर्स- Villagers)

कंडारा के हनुमान मंदिर से दिखता है संपूर्ण केदारघाटी: संत पंचम दास महाराज ने बताया कि कंडारा स्थित हनुमान मंदिर से संपूर्ण केदारघाटी के दिव्य दर्शन होते हैं. वे रोजाना यहीं से बाबा केदारनाथ को प्रणाम करते हुए प्रार्थना करते थे कि भगवान खुद अपने भक्तों के समीप विराजमान हों.

"कुछ समय पहले हनुमान मंदिर से करीब 20 मीटर की दूरी पर हल्का भूस्खलन हुआ. जब वहां से मिट्टी और मलबा हटाया गया, तो शिला पर भगवान शिव, माता पार्वती, श्री गणेश, भगवान कार्तिकेय और नंदी महाराज समेत संपूर्ण शिव परिवार की आकृतियां स्वयंभू रूप में स्पष्ट दिखाई दीं."- पंचम दास महाराज, संत

उन्होंने बताया कि इस अलौकिक दृश्य को देखकर वे खुद भी भावविभोर और आश्चर्यचकित रह गए. सूचना मिलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे. वर्तमान में रोजाना स्वयंभू शिव परिवार का विधिवत पूजन, जलाभिषेक, आरती और भजन-कीर्तन किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि कंडारा क्षेत्र घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है, जहां अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है. उनका कहना है कि पहले इस स्थान पर नकारात्मकता अधिक महसूस होती थी, लेकिन अब पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत है.

केदारनाथ यात्रा की गरिमा बनाए रखें, तीर्थ को पर्यटन स्थल न बनने दें: संत पंचम दास महाराज ने केदारनाथ यात्रा की बदलती परिस्थितियों पर भी गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि एक समय था, जब लोग बाबा केदारनाथ के दर्शन केवल भक्ति, तप, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक शांति के उद्देश्य से करते थे, लेकिन आज बड़ी संख्या में लोग तीर्थयात्रा को केवल पर्यटन और मनोरंजन का माध्यम मानने लगे हैं.

संत पंचम दास ने कहा कि केदारनाथ धाम कोई पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का कर्तव्य है कि वो धाम की पवित्रता, स्वच्छता, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक मर्यादाओं का सम्मान करे.

RUDRAPRAYAG SHIVA FAMILY TEMPLE
संत पंचम दास महाराज (फोटो सोर्स- Villagers)

उन्होंने अपील करते हुए कहा कि श्रद्धालु धाम में मनोरंजन, वीडियो बनाने या केवल घूमने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक शांति की भावना लेकर आएं. यदि यात्रा अनुशासन, स्वच्छता और धार्मिक आचरण के साथ की जाएगी, तभी देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक गरिमा और सनातन संस्कृति की दिव्यता अक्षुण्ण बनी रहेगी.

उन्होंने कहा कि यदि मन में सच्ची भक्ति हो तो भगवान हर स्थान पर सुलभ हैं, लेकिन यदि श्रद्धा का अभाव हो तो बड़े-बड़े तीर्थ भी केवल एक औपचारिक यात्रा बनकर रह जाते हैं. उन्होंने समाज में साधु-संतों के प्रति घटते सम्मान पर भी चिंता जताई.

असली और नकली साधुओं के बीच अंतर कर पाना हुआ मुश्किल: उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में राजा-महाराजा भी संतों से ज्ञान और मार्गदर्शन प्राप्त करने आते थे, जबकि आज असली और नकली साधुओं के बीच अंतर कर पाना भी लोगों के लिए कठिन हो गया है.

कौन हैं संत पंचम दास: संत पंचम दास महाराज ने बताया कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ. मूल निवासी राजस्थान के हैं. पिछले करीब 6 से 7 सालों से वे कंडारा गांव स्थित हनुमान मंदिर में रहकर सनातन धर्म की सेवा, साधना और जनकल्याण में लगे हुए हैं. इससे पूर्व वे त्रियुगीनारायण समेत आसपास के क्षेत्रों में भी साधना करते रहे हैं.

ये भी पढ़ें-