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17 साल से गाय को माना मां, मौत पर अंतिम संस्कार, तेहरवीं-समाधि बनाने को परिवार तैयार; कहानी अनोखे प्यार की

बागपत के एक परिवार के प्यार की ऐसी कहानी जो आपको पशुओं के प्रति प्रेम की बड़ी सीख देगी.

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गाय की मौत पर टूटा परिवार. (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : May 2, 2026 at 8:25 AM IST

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Updated : May 2, 2026 at 8:31 AM IST

5 Min Read
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बागपत: अक्सर आपने पशुओं के प्रति इंसानी प्रेम की कई कहानियां पढ़ी होगी. इसमें कुछ ऐसी कहानियां होती हैं जो दिलों को छू लेती हैं. आज हम भी आपके लिए ऐसी ही एक सच्ची कहानी लाए है. ये कहानी है बागपत के एक परिवार और एक गाय के बीच दिली रिश्ते की. परिवार में मां का दर्जा पाने वाली गाय के प्रति इस परिवार का प्रेम और निष्ठा कैसी है वह आपको आगे मालूम चलेगा. चलिए बिना समय गवाएं आपको इस कहानी से रूबरू कराते हैं. पेश है संवाददाता मोहम्मद जावेद की खास रिपोर्ट.



कहां का मामला है: बागपत किशनपुर बराल में किसान देवेन्द्र अपने परिवार के साथ रहते हैं. देवेंद्र की मानें तो 17 साल पहले वह एक बछिया घर लाए थे. बछिया देखने में सामान्य सी थी. परिवार ने भी उस बछिया की सेवा धीरे-धीरे शुरू कर दी. उस बछिया का नाम रखा गया नंदिनी. सुबह से ही देवेंद्र समेत परिवार के सभी सदस्य नंदिनी की सेवा में जुट जाते थे. जैसे-जैसे नंदिनी बढ़ी हुई उसके प्रति परिवार का प्रेम बढ़ता ही चला गया. नंदिनी का सुंदर सा चेहरा परिवार के साथ ही गांव वालों को भी काफी भाता था. सीधी-सादी नंदिनी को हर कोई प्रेम से खिलाता था.


जब नंदिनी को मिला मां का दर्जा: धीरे धीरे नंदिनी का दर्जा घर में गाय की जगह मां का हो गया. हर कोई नंदिनी को परिवार की मां जैसा मानने लगा. नंदिनी ने भी परिवार पर खूब प्रेम लुटाया. उसने 17 साल के अपने जीवन काल में 14 बछड़े और एक बछिया को जन्म दिया. घर में दूध का भंडार लग गया. इतना दूध होने लगा कि परिवार ने उसे मुफ्त में बांटना शुरू कर दिया. परिवार ने घर में बनने वाली पहली रोटी नंदिनी को देनी शुरू कर दी. वहीं नंदिनी नें देवेंद्र के परिवार के साथ ही बच्चों को भी खूब दुलराया. ये मां और बच्चों का अटूट रिश्ता जैसा हो गया.

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नंदिनी को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे ग्रामीण. (Etv Bharat)

देवेंद्र को बेहद लगाव था: देवेंद्र को भी नंदिनी से बेहद लगाव हो गया था. वह खेतीबाड़ी के बाद ज्यादातर समय नंदिनी के साथ ही बिताते थे. वह नंदिनी की सेवा अपनी मां की तरह करते थे. यहीं नहीं नंदिनी के स्वभाव की तारीफ गांव वाले भी कर रहे हैं. ग्रामीण सुरेंद्र, सुभाष, अरविंद, सुधीर आदि का कहना है कि वैसे भी गाय हिन्दू धर्म में माता का दर्जा रखती है. नंदनी गाय से तो सभी ग्रामीण बेहद प्रेम करते थे. सबका कहना है कि वह परिवार में एक सदस्य के रूप में ही रहती थी.

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नंदिनी की अंतिम विदाई के बाद घर में हवन का आयोजन किया गया. (Etv Bharat)

जब नंदिनी ने छोड़ी दुनिया: एक मई का दिन परिवार में गम के घने बादल लेकर आया. कई दिनों से बीमार चल रही 17 साल की नंदिनी ने जैसी ही अंतिम सांस ली पूरा परिवार बिलख पड़ा. हर कोई फूट-फूटकर रोने लगा. यहीं नहीं नंदिनी की मौत की सूचना जैसे ही गांव में फैली तो ग्रामीण भी दौड़ पड़े. नंदिनी के जाने का गम हर ओर नजर आ रहा था. गांव में यह पहली बार था कि किसी पशु की मृत्यु पर किसी इंसान के जाने जैसा गम का माहौल हो.

परिवार ने मां की तरह किया अंतिम संस्कार: परिवार ने तय किया कि वह नंदिनी का अंतिम संस्कार मां की तरह ही करेंगे. बैंड बाजे वालों को बुलावाया गया. अर्थी सजाई गई. इसके बाद परिवार और गांव के लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए. सभी ने नंदिनी पर जमकर पुष्प वर्षा की. महिलाओं के साथ-साथ बच्चों की आंखों में भी आंसू नजर आए. इस शव यात्रा ने सभी को भावुक कर दिया. नंदिनी की अत्येष्टि विधि विधान से कर दी गई.

परिवार अब आयोजित करेगा तेहरवीं: देवेंद्र का कहना है कि गाय उनकी माता थी. इस वजह से उनकी आत्मा की शांति के लिए सभी तरह के हिंदू रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कार्यक्रम कर रहे हैं. नंदिनी की तेहरवी भी आयोजित की जाएगी. इसमें पूरे गांव के लोगों को बुलाया जाएगा. वहीं, नंदिनी की आत्मा की शांति के लिए घर में हवन करवाया जा रहा है. गरुण पुराण भी सुना जा रहा है. सभी सदस्य और ग्रामीण माता के अंतिम कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं.

नंदिनी की समाधि बनाने की भी तैयारी: देवेंद्र की मानें तो नंदिनी की समाधि बनवाने के प्रयास भी किए जाएंगे ताकि पीढ़ियां हमारी मां को याद रखें. इसके लिए परिवार के सदस्य विचार विमर्श कर रहे हैं. तेहरवी के बाद गाय की समाधि को लेकर प्रयास तेज किए जाएंगे. कोशिश रहेगी नंदिनी की समाधि बन जाए.



पशु प्रेमियों के अनोखे किस्से

  • फरवरी 2026 में आगरा में एक परिवार ने अपने लेब्राडोर डॉग की मौत के बाद उसे बेटे की तरह अंतिम विदाई दी. परिवार ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार गंगाजी के राजघाट पर उसका अंतिम संस्कार किया. उसके लिए मुंडन संस्कार, तेरहवीं, हवन आदि आयोजित किया था.

  • मई 2024 में बागपत में 13 साल के कुत्ते बुजो की मौत के बाद परिवार की ओर से तेहरवी आयोजित की गई थी. मौत के बुजो की आत्मशांति के लिए हवन कराया गया. तेहरवीं भोज भी आयोजित किया गया.


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Last Updated : May 2, 2026 at 8:31 AM IST