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केदारनाथ यात्रा बंद होने के बाद उभरा रोजगार का संकट, स्थानीय कारोबारियों ने की सरकार से ये मांग

केदारनाथ यात्रा संपन्न होने के बाद रुद्रप्रयाग में स्थानीय व्यापारियों को बेरोजगारी का संकट झेलना पड़ रहा है.

KEDARNATH TRADERS IN TROUBLE
केदारनाथ यात्रा बंद होने के बाद उभरा रोजगार का संकट (PHOTO- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : November 17, 2025 at 6:32 PM IST

3 Min Read
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रुद्रप्रयाग: विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद यात्रा से जुड़ा कारोबार भी बंद हो गया है. कुछ दिनों बाद बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद वहां भी आने वाले यात्रियों की संख्या शून्य हो जाएगी. ऐसे में स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सरकार की ओर से शीतकालीन यात्रा का प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक संख्या में देश-विदेश के तीर्थ यात्री यहां पहुंचे और यहां के लोगों को ऑफ सीजन में भी रोजगार मिले.

केदारघाटी समेत जिले की आधे से अधिक आबादी केदारनाथ धाम की यात्रा पर निर्भर है. 6 माह यात्रा के दौरान दुकान, होटल, लॉज, ढाबा, डंडी-कंडी, घोड़ा-खच्चर आदि का संचालन करके यहां के लोग अपना रोजगार चलाते हैं. लेकिन यात्रा समाप्त होने के बाद यहां के लोगों के सामने रोजगार का संकट छा जाता है. पिछले कुछ सालों से अक्सर देखा जाता है कि शुरुआत के एक से डेढ़ महीनों में ही अधिक संख्या में यात्री आते हैं. बरसात के समय यात्रियों की संख्या अत्यधिक कम हो जाती है और यात्रा के अंतिम दिनों में यात्रि काफी कम संख्या में पहुंचते हैं.

ऐसे में कहा जा सकता है कि मात्र दो से तीन महीनों का ही रोजगार अब प्राप्त हो रहा है. इन दो से तीन महीनों में एक वर्ष का खर्च निकालना काफी मुश्किल हो जाता है. शीतकाल के दौरान जिले वासियों के सामने रोजगार का संकट छा जाता है.

ऐसे में स्थानीय कारोबारियों ने धामी सरकार से शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने की मांग की है. केदारघाटी के होटल-लॉज आदि कारोबारियों का कहना है कि शीतकालीन यात्रा का भी जोर से प्रचार-प्रसार होना चाहिए, ताकि जो यात्री यात्रा काल में नहीं पहुंचते हैं, वह शीतकाल में यहां आएं. जिससे यहां के लोगों को रोजगार मिलता रहे.

होटल कारोबारी नितिन जमलोकी, प्रेम गोस्वामी, रामचंद्र गोस्वामी आदि ने कहा कि रुद्रप्रयाग समेत चमोली जिले में अनेक धार्मिक और पर्यटक स्थल हैं. यदि पर्यटक और यात्री यहां शीतकाल में लगातार आते रहते हैं तो यहां के कारोबारियों को शीतकाल में भी रोजगार के अवसर मिलेंगे. उन्होंने कहा कि शीतकाल के दौरान रोजगार न होने से स्थानीय लोग काफी परेशान हो जाते हैं.

रुद्रप्रयाग जिले की बात करें तो शीतकाल के दौरान पहुंचने वाले यात्री यहां के धार्मिक स्थलों के साथ ही पर्यटक स्थलों का रूख कर सकते हैं. जिले में शिव-पार्वती विवाह स्थल त्रियुगीनारायण, सिद्धपीठ कालीमठ, नारायणकोटी मंदिर समूह, पंच केदार शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, हरियाली देवी, मठियाणा देवी समेत बधाणीताल, चोपता-दुगलबिटटा, सारी, देवरियाताल, बधाणीताल, कार्तिक स्वामी सहित अन्य पर्यटक स्थल हैं.

डीएम प्रतीक जैन ने बताया कि शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने को लेकर प्रचार -प्रसार किया जा रहा है. बदरी-केदार मंदिर समिति भी इसमें जुटी हुई है.

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