जेल से बाहर आते ही एडवोकेट अनिल मिश्रा से मिलने लगा समर्थकों का हुजूम, अंबेडकर विवाद में रिहाई
अंबेडकर की तस्वीर जलाने का मामला, कोर्ट ने गिरफ्तारी को बताया गलत, देर शाम सेंट्रल जेल के बाहर उमड़ा समर्थकों का हुजूम.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 8:53 AM IST
ग्वालियर : अंबेडकर विवाद में गिरफ्तारी के बाद हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट अनिल मिश्रा रात 8 बजे जेल से बाहर आ गए. 5 दिन बाद बुधवार को उन्हें ग्वालियर हाईकोर्ट से जमानत मिली थी लेकिन केंद्रीय जेल से रिहाई का ऑर्डर देर शाम आया, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद से ही लगातार हाईकोर्ट के एडवोकेट और सवर्ण समाज द्वारा उनकी गिरफ्तारी का विरोध किया जा रहा था. चार दिन तक हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई लेकिन कानूनी पेचों की वजह से उन्हें जमानत नहीं मिल पा रही थी.
हाईकोर्ट व सेंट्रल जेल के बाहर समर्थकों का हुजूम
बुधवार को ग्वालियर हाईकोर्ट की स्पेशल डबल बेंच ने उनकी जमानत याचिका पर फैसला दिया और उन्हें इतने लंबे समय तक कस्टडी में रखने को अवैध मानते हुए बेल बांड और जमानत राशि के साथ रिहाई का आदेश दिया. इस खबर के कोर्ट से बाहर आते ही उनके समर्थकों में खुशी की लगर दौड़ गई. शुरू में खबर आई कि, कोर्ट ऑर्डर के बाद शाम करीब 5 बजे ग्वालियर केंद्रीय जेल से उन्हें रिहा कर दिया जाएगा. यह बात सामने आते ही शाम तक सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक वकील और समाजसेवियों का जमावड़ा केंद्रीय जेल के बाहर लगना शुरू हो गया, लेकिन उनकी रिहाई रात 8 बजे हुई.

इस बीच कोर्ट ने फैसले के साथ ही हिदायत दी कि, जेल से बाहर आने के बाद अनिल मिश्रा किसी तरह का जुलूस नहीं निकलें. इस बात का पालन करते हुए कोई स्वागत, नारेबाजी या जुलूस की मनाही सभी समर्थकों को पहले ही कर दी गई थी.
तैनात रहा भारी पुलिस बल, देरी से पहुंचा रिलीज ऑर्डर
वहीं, पुलिस भी हालातों को लेकर मुस्तैद थी, जिसके लिए अनिल मिश्रा की रिहाई से पहले ही भारी संख्या में पुलिस बल भी केंद्रीय जेल के बाहर तैनात किया गया. हालांकि उम्मीद के उलट अनिल मिश्रा की रिहाई का आदेश देरी से मिल पाया और रात करीब 8 बजे उनका रिलीज ऑर्डर केंद्रीय जेल में पहुंचाया गया. तब जाकर उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी हो सकी.

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कड़ी सुरक्षा में रवाना हुए अनिल मिश्रा
समर्थकों की भीड़ देखते हुए पुलिस ने रस्सों से बेरीकेटिंग की लेकिन जैसे ही अनिल मिश्रा केंद्रीय जेल के दरवाजे से बाहर आए तो समर्थकों का हुजूम उनसे मिलने टूट पड़ा. हालांकि, मौके पर मजूद रहे पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित रखते हुए अनिल मिश्रा को जेल से रवाना किया. भारी भीड़भाड़ के बीच मीडिया ने भी एडवोकेट अनिल मिश्रा से बात करने का प्रयास किया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी. बहरहाल उनके समर्थक अब उनकी रिहाई का जश्न मना रहे हैं.

