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ठंड में ऐसे बढ़ाएं पशुओं का दूध उत्पादन, जनवरी में हिमाचल में इन पशु रोगों के बढ़ने की संभावना

ठंड के कारण पशुओं की उत्पादन और प्रजनन क्षमता घटती है. साथ ही कई घातक संक्रामक रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है.

सर्दियों में ऐसे करें पशुओं की देखभाल
सर्दियों में ऐसे करें पशुओं की देखभाल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : January 3, 2026 at 9:25 AM IST

5 Min Read
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सिरमौर: जनवरी का महीना पहाड़ से मैदान तक कड़ाके की ठंड लेकर आता है. कहीं बर्फ की सफेद चादर तो कहीं घना कोहरा और धुंध. ऐसे हालात में सबसे अधिक असर पशुधन और मत्स्य पालन पर पड़ता है. ठंड के कारण न केवल पशुओं की उत्पादन और प्रजनन क्षमता घटती है, बल्कि कई घातक संक्रामक रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है.

इसी को देखते हुए जनवरी महीने में किए जाने वाले पशुपालन कार्य को लेकर चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के पशुपालकों और मछली पालकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है. लिहाजा इस संबंध में जिला सिरमौर के धौलाकुआं स्थित कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर ने भी पशुपालकों को जागरूक करते हुए इस मौसम में पशुओं के लिए ठंड से बचाव से संबधित प्रबंधन कार्य सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.

सर्दियों में ऐसे करें पशुओं की देखभाल
सर्दियों में ऐसे करें पशुओं की देखभाल (ETV Bharat)

ठंड से नहीं बचाए तो घट जाएगा उत्पादन

कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल के मुताबिक सर्दी के मौसम में पशुओं को ठंड से बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. अत्यधिक ठंड, बर्फबारी और कोहरे के कारण पशु तनाव में आ जाते हैं, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर पड़ता है. खराब मौसम के दौरान गौशालाओं में कृत्रिम रोशनी, पशुओं को मोटे कपड़े या बोरे से ढंकना, गुनगुना पानी पिलाना और शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए खली और गुड़ का मिश्रण खिलाना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही गौशाला के फर्श पर सूखी घास या पत्ते बिछाने और रात में खिड़की- दरवाजे बोरे से ढंकने से ठंड का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है. इससे पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता बढ़ेगी.

बंद गौशालाएं बन सकती हैं बीमारी की वजह

प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मित्तल ने बताया कि लगातार बर्फबारी या बारिश की स्थिति में पशुओं का लंबे समय तक गौशाला के अंदर रहना कई बीमारियों को जन्म दे सकता है, जिनमें से कुछ संक्रामक रोग पशुओं के लिए घातक साबित हो सकते हैं. यदि गौशाला में सही वेंटिलेशन न हो तो वहां एकत्रित गैसें पशुओं के फेफड़ों में जलन पैदा कर सकती हैं, जिससे निमोनिया जैसे श्वसन संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. सर्दियों में पशुओं के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखें और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

जनवरी में बढ़ता है संक्रामक रोगों का खतरा

उन्होंने बताया कि सर्दियों के दौरान कई घातक संक्रामक रोग सक्रिय हो जाते हैं. इस समय भेड़-बकरी में पीपीआर रोग ऊना, सोलन और शिमला जिलों में संभावित है. भेड़ एवं बकरी पॉक्स सिरमौर, शिमला, कांगड़ा और चंबा जिलों में संभावित हो सकते है. मवेशियों में खुरपका-मुंहपका रोग हमीरपुर जिले में संभावित बताया गया है. ऐसे में पशुओं को इन रोगों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण और जैव-सुरक्षा उपाय अपनाना अनिवार्य है.

परजीवी संक्रमण भी बन सकता है परेशानी

ठंड के मौसम में पशुओं में फैशिओला जैसे आंतरिक परजीवियों का संक्रमण भी देखने को मिलता है, जिससे पशु कमजोर हो जाते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र ने पशुपालकों को पशु चिकित्सक की सलाह से परजीवीरोधी दवाइयों का नियमित उपयोग करने की अपील की है.

पालकों के लिए भी सतर्कता जरूरी

डॉ. मित्तल के मुताबिक जनवरी का महीना मछली पालन के लिए भी संवेदनशील होता है. मछली पालक किसानों को तालाबों में पानी की मात्रा और गहराई पर विशेष ध्यान देना चाहिए. सर्दी में तालाब की गहराई कम से कम छह फीट रखना जरूरी है, ताकि मछलियों को गर्म क्षेत्र में शीत-निद्रा के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके. इसके साथ ही तालाबों के बांधों की मरम्मत, नर्सरी की तैयारी और कॉमन कार्प ब्रूडर्स (नर-मादा) का चयन कर उन्हें अलग-अलग तालाबों में रखने की प्रक्रिया भी इसी समय शुरू कर देनी चाहिए. शाम के समय नलकूप से पानी डालकर तालाब के सतही पानी को कुछ हद तक गर्म किया जा सकता है.

खास अंदाज में चल रही डेयरी प्रदर्शन इकाई

बता दें कि कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर में भी एक डेयरी प्रदर्शन इकाई स्थापित है, जो अपने वैज्ञानिक प्रबंधन के चलते खास अंदाज में चल रही है. यहां सर्दियों के मौसम के मद्देनजर भी पशुधन का खास तौर पर ध्यान रखा जाता है. पशुओं के लिए मेट बिछाए गए है. ठंडी हवाओं से बचाने के लिए पशुओं के लिए तिरपाल के पर्दे लगाएं गए हैं. रात्रि में इन्हें दोनों तरफ से बंद कर दिया जाता है, ताकि गरमाईश बनी रहे। यहां पशु धन क लिए स्वच्छ पानी का प्रबंध किया गया है. स्वच्छता को लेकर भी विशेष कदम उठाए गए है. खान-पान का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. इसके अलावा भी ऐसे कई इंतजाम यहां किए गए है, जिससे पशु धन की सुरक्षा सुनिश्चित की सकती है. पशुपालकों को यहां समय-समय पर जागरूक भी किया जाता है. लिहाजा पशुपालक इस डेयरी इकाई में भी पहुंचकर इस दिशा में विस्तृत जानकारी हासिल कर सकते है.

किसानों से की अपील

कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार अधिक जानकारी के लिए नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क बनाए रखें.

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