अब राखी के त्योहार पर नहीं बिकेगी मिलावटी मिठाई! मोबाइल लैब से होगी तुरंत जांच
पहले लैब में सैंपल की जांच में लगता था लंबा समय और बाजार से बिक जाती थी मिलावटी मिठाई.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 27, 2026 at 5:13 PM IST
कुल्लू: देशभर समेत हिमाचल प्रदेश में रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा. रक्षाबंधन के त्योहार के लिए बाजार सज गए हैं. बाजारों में मिठाइयों की दुकानों पर भी विभिन्न तरह के पकवान नजर आ रहे हैं, लेकिन त्योहारी सीजन में मिलावटी मिठाइयों की भी आशंका काफी बढ़ जाती है. ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा भी इस पर नजर रखी जा रही है और जगह-जगह पर दूध से बने उत्पाद, मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थों के भी सैंपल लिए जा रहे हैं.
मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब से जांच
राहत की बात यह है कि अबकी बार खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब का भी प्रयोग किया जा रहा है. इसके जरिए मौके पर ही विभिन्न प्रकार के उत्पादों के सैंपल लिए जा रहे हैं और मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब में ही इनकी जांच की जा रही है. जिसके चलते अधिकतर खाद्य पदार्थों के परिणाम भी तुरंत मिल रहे हैं. ऐसे में अगर कोई भी मिलावटी वस्तु पाई जा रही है तो उसे नष्ट किया जा रहा है और खाद्य सुरक्षा विभाग के द्वारा इस मामले में आगामी कार्रवाई भी की जा रही है.

कुल्लू में 408 खाद्य सैंपलों की जांच
जिला कुल्लू में मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी के जरिए मौके पर खाद्य पदार्थों की जांच के साथ-साथ उपभोक्ताओं को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब द्वारा 408 खाद्य सैंपलों का विश्लेषण किया गया. इनमें दूध एवं दुग्ध उत्पाद, खाद्य तेल, सॉस, पानी और मिठाइयां आदि शामिल हैं. इनमें चार सैंपल निर्धारित खाद्य सुरक्षा एवं मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिनमें दो कुकिंग ऑयल, एक खोया बर्फी और एक हल्दी पाउडर का सैंपल शामिल है.
"खाद्य विभाग की दो टीम तैनात की गई है और वह जगह-जगह पर विभिन्न खाद्य पदार्थों के सैंपल भी ले रही है. बीते दिन भी विभाग की टीम द्वारा दूध, पनीर सहित चार खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए हैं और उनकी भी टीम द्वारा जांच की गई है. ऐसे में अगर किसी खाद्य वस्तु में मिलावट पाई गई तो उन पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के जरिए से भी जगह-जगह पर दूध, पनीर व अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जा रहे हैं." - अनिल शर्मा, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग कुल्लू

पहले लैब में होती थी खाद्य पदार्थों की जांच
इससे पहले खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जो भी सैंपल लिए जाते थे, उन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाता था. ऐसे में कई बार उस सैंपल की रिपोर्ट आने में 20 दिन से लेकर 1 महीने का भी समय लग जाता था और इस बीच पर बाजार में आई मिलावटी मिठाइयां भी पूरी तरह से बिक जाती थी. हिमाचल के कई इलाकों में त्योहारी सीजन पर पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा और दिल्ली से काफी मात्रा में मिठाइयां लाई जाती हैं और उन्हें बाजार में बेचा जाता है. त्योहारी सीजन में दूध से बनी मिठाइयों की गुणवत्ता ज्यादा संदेह में रहती है और पनीर से बने उत्पादों में भी मिलावट की आशंका पाई जाती है.
खाद्य पदार्थों में केमिकल से सेहत के साथ खिलवाड़
इसके अलावा मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए उसमें रंगों का भी ज्यादा मात्रा में प्रयोग किया जाता है. कई बार रसगुल्ले को भी ज्यादा सफेद दिखाने के लिए उसमें केमिकल की ज्यादा मात्रा डाली जाती है. जो लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है. ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जो सैंपल लिए जाते थे, उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता था और उसकी रिपोर्ट आने में भी देरी होती थी, लेकिन तब तक बाजार में मिलावटी मिठाइयों की बड़ी मात्रा में बिक्री भी हो जाती थी. ऐसे में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के जरिए दूध पनीर और मिलावटी मिठाइयों की जांच में भी खाद्य सुरक्षा विभाग को काफी आसानी हो रही है.

मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब में कैसे होती है जांच ?
- खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा हर महीने मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब का एक रोस्टर जारी किया जाता है.
- यह वैन निर्धारित दिनों में विभिन्न जिलों, स्थानीय बाजारों, और ग्रामीण इलाकों में पहुंचती है.
- विशेष अवसरों या त्योहारों के सीजन में यह विशेष अभियान चलाकर औचक निरीक्षण करती है.
- जिसमें विभाग की टीम मौके पर त्वरित परीक्षण करती है.
- मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब में रैपिड टेस्टिंग किट्स और आधुनिक मिनी-उपकरण लगे होते हैं.
- इन उपकरणों की सहायता से दूध, पनीर, घी, मसालों में हानिकारक रंगों या तत्वों का पता कुछ ही मिनटों में लगाया जाता है.
- मावा, मसाले, तेल, पानी, सॉस और अन्य खुले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की तुरंत जांच की जाती है.
- दूध में डिटर्जेंट, स्टार्च या फॉर्मेलिन और मसालों में हानिकारक रंगों या तत्वों का पता कुछ ही मिनटों में लगाया जाता है.
"इस अभियान में आम जनता और दुकानदारों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाती है. आम नागरिक बहुत ही कम या नाममात्र शुल्क देकर अपनी जरूरत के खाद्य पदार्थों की शुद्धता की परख हाथों-हाथ इस वैन में करवा सकते हैं. इसके अलावा अगर जांच के दौरान किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट या गड़बड़ी पाई जाती है, तो खाद्य सुरक्षा अधिकारी मौके पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई या चालान की प्रक्रिया शुरू करते हैं." - अनिल शर्मा, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग कुल्लू

'पूरे प्रदेश में चलाया जाए ये अभियान'
कुल्लू के स्थानीय निवासी घनश्याम शर्मा का कहना है कि त्योहार के सीजन में मिठाइयों का प्रयोग काफी बढ़ जाता है, लेकिन कौन सी मिठाई में मिलावट है या फिर वह नकली खाद्य पदार्थों से तैयार की गई है. इसके बारे में ग्राहकों को कोई जानकारी नहीं होती है. खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जो मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के जरिए कार्य किया जा रहा है. उससे तुरंत खाद्य पदार्थों में मिलावट के बारे में लोगों को जानकारी मिल सकेगी. ऐसे में त्योहारी सीजन में इस तरह का अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जाना चाहिए, ताकि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ ना हो सके.
बाहरी राज्यों से मंगवाई मिठाइयों में मिलावट का डर
मिठाई विक्रेता नरेंद्र शर्मा का कहना है कि अधिकतर मिठाइयां यहां पर दुकानदारों द्वारा खुद ही तैयार की जाती है और उसमें शुद्धता का पूरा ख्याल रखा जाता है, लेकिन त्योहारी सीजन के दौरान मिठाइयों के डिमांड काफी बढ़ जाती है और कई दुकानदार बाहरी राज्यों से मिठाइयां मंगवाते हैं. कई बार मिठाई विक्रेता को भी इस बात की जानकारी नहीं होती है कि जो मिठाई बाहरी राज्यों से आ रही है, वह कितनी शुद्ध है. ऐसे में जो भी दुकानदार बाहरी राज्यों से मिठाई मंगवाता है, उसे उसकी शुद्धता का भी ख्याल रखना चाहिए और सस्ती मिठाइयां लेने से बचना चाहिए, ताकि लोगों को शुद्ध मिठाइयां मिल सके.

