रांची यूनिवर्सिटी में 43530 सीटों पर नामांकन शुरू, कुलपति डॉ सरोज शर्मा ने कहा- सेशन नियमित करने पर फोकस
रांची यूनिवर्सिटी में 43 हजार 530 सीटों पर नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस बार सेशन नियमित करने पर फोकस है.

Published : June 12, 2026 at 3:04 PM IST
रांची: नए शैक्षणिक सत्र के लिए रांची विश्वविद्यालय में नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले 24 अंगीभूत कॉलेजों में स्नातक और वोकेशनल कोर्स में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राएं आवेदन कर रहे हैं. इसी बीच विश्वविद्यालय के सामने लंबित शैक्षणिक सत्रों को नियमित करना, समय पर परीक्षा और परिणाम जारी करना, छात्र संघ चुनाव कराना, प्लेसमेंट व्यवस्था को मजबूत बनाना तथा नई शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू करना जैसी कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं.इन सभी विषयों पर रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने विस्तार से अपनी बात रखी और विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति के साथ भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी.
24 कॉलेजों की 43,530 सीटों पर नामांकन प्रक्रिया शुरू
रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत सत्र 2026-30 के स्नातक पाठ्यक्रमों तथा 2026-29 के वोकेशनल कोर्सों में नामांकन के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. छात्र-छात्राएं 12 जून से 29 जून तक चांसलर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
इस वर्ष विश्वविद्यालय के 24 अंगीभूत कॉलेजों में कुल 43,530 सीटों पर नामांकन लिया जाएगा.
सबसे अधिक सीटों वाले प्रमुख कॉलेज इस प्रकार हैं:
- मारवाड़ी कॉलेज, रांची- 3,700 सीटें
- केओ कॉलेज, गुमला- 3,240 सीटें
- रांची वीमेंस कॉलेज- 3,210 सीटें
- एसएसएम कॉलेज- 3,100 सीटें
- बीएस कॉलेज, लोहरदगा- 2,940 सीटें
- आरएलएसवाई कॉलेज- 2,640 सीटें
- बिरसा कॉलेज, खूंटी- 2,640 सीटें
- पीपीके कॉलेज, बुंडू- 2,580 सीटें
- डोरंडा कॉलेज- 2,440 सीटें
इसके अलावा जेएन कॉलेज धुर्वा, मांडर कॉलेज, केसीबी कॉलेज बेड़ो, सिमडेगा कॉलेज, बीएन जालान कॉलेज सिसई, डिग्री कॉलेज खिजरी, सिल्ली, तोरपा, कोलेबिरा, मॉडल कॉलेज गुमला, वीमेंस कॉलेज गुमला, खूंटी, लोहरदगा और सिमडेगा सहित अन्य कॉलेजों में भी नामांकन लिया जा रहा है.

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि 29 जून है. इसके बाद मेरिट सूची जारी की जाएगी और दस्तावेज सत्यापन के उपरांत नामांकन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
बॉटनी और जूलॉजी की जगह अब ‘लाइफ साइंस’
इस बार नामांकन प्रक्रिया का सबसे बड़ा बदलाव बॉटनी और जूलॉजी विषयों का लाइफ साइंस में विलय है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अब विद्यार्थियों को अलग-अलग बॉटनी और जूलॉजी के बजाय लाइफ साइंस विषय के लिए आवेदन करना होगा.
कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने बताया कि यह बदलाव विद्यार्थियों को बहुविषयक शिक्षा देने की दिशा में उठाया गया कदम है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सीटों में किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है और कॉलेजों में पूर्व निर्धारित सीटों के आधार पर ही नामांकन लिया जा रहा है.उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की सभी शैक्षणिक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और आगामी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी जाएगी.
सेशन लेट की समस्या दूर करना सबसे बड़ी प्राथमिकता
रांची विश्वविद्यालय लंबे समय से शैक्षणिक सत्र में देरी की समस्या से जूझता रहा है. कुलपति ने माना कि यह विश्वविद्यालय के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कई लंबित परिणाम जारी किए गए हैं और बाकी परिणामों को भी जल्द प्रकाशित करने की दिशा में काम चल रहा है.
डॉ. शर्मा के अनुसार विश्वविद्यालय में परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में मानव संसाधन की कमी एक बड़ी बाधा है. उन्होंने कहा, जो लोग परीक्षा आयोजित करते हैं, वही लोग मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने का कार्य भी करते हैं. सीमित संसाधनों में काम करने के कारण कई बार देरी होती है. इसलिए मैनपावर बढ़ाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में परीक्षा और परिणाम प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े.
नई शिक्षा नीति और क्लस्टर सिस्टम पर विश्वविद्यालय का दृष्टिकोण
नई शिक्षा नीति को लागू करने को लेकर विश्वविद्यालय लगातार काम कर रहा है. कुलपति ने कहा कि एनईपी के तहत विद्यार्थियों को अधिक विकल्प, बहुविषयक शिक्षा और कौशल आधारित अध्ययन उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है.
क्लस्टर सिस्टम को लेकर उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी के कारण इस मॉडल पर विचार किया गया था. हालांकि राज्यपाल सचिवालय और संबंधित पक्षों के सुझावों के बाद विश्वविद्यालय ने ऐसी व्यवस्था अपनाने का निर्णय लिया है जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और एनईपी के उद्देश्यों को भी पूरा किया जा सके.
लॉ इंस्टीट्यूट में एडमिशन का रास्ता साफ
रांची विश्वविद्यालय के लॉ इंस्टीट्यूट को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब समाप्त हो चुका है. कुलपति ने बताया कि हाईकोर्ट से संबंधित मामला खत्म होने के बाद नामांकन की अनुमति मिल गई है. उन्होंने कहा कि कुछ नए फैकल्टी सदस्यों का चयन भी किया गया है और अब नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. विश्वविद्यालय का प्रयास है कि लॉ शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जाए.
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में शिक्षकों की कमी
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से जुड़े सवालों पर कुलपति ने कहा कि विभाग में नियमित पढ़ाई हो रही है, लेकिन शिक्षकों की कमी एक वास्तविक समस्या है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस विषय को लेकर गंभीर है और राजभवन तथा राज्य सरकार के साथ लगातार संवाद किया जा रहा है ताकि रिक्त पदों को भरा जा सके और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके.
छात्र संघ चुनाव को लेकर सकारात्मक संकेत
रांची विश्वविद्यालय में लंबे समय से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं. इस विषय पर कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय चुनाव कराने के पक्ष में है. उन्होंने कहा कि पहले नामांकन प्रक्रिया, परीक्षा और कक्षाओं को व्यवस्थित किया जाएगा. इसके बाद इसी सत्र में छात्र संघ चुनाव कराने की दिशा में पहल की जाएगी. उनका कहना है कि छात्र संघ विश्वविद्यालय प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम होता है और लोकतांत्रिक वातावरण के लिए इसका होना आवश्यक है.
प्लेसमेंट सेल को बनाया जा रहा और मजबूत
रोजगार और प्लेसमेंट के मुद्दे पर कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्लेसमेंट सेल लगातार सक्रिय है और इसे और मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कई छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार मिला है तथा उद्योग जगत के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है. प्लेसमेंट सेल में अतिरिक्त मानव संसाधन जोड़े गए हैं ताकि विद्यार्थियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराए जा सकें.
पूर्व छात्रों को जोड़ेगा विश्वविद्यालय
कुलपति ने बताया कि रांची विश्वविद्यालय से पढ़कर आज कई लोग प्रशासनिक सेवाओं, शिक्षा, उद्योग, न्यायपालिका और अन्य क्षेत्रों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं. ऐसे पूर्व छात्रों को विश्वविद्यालय से जोड़ने के लिए विशेष पहल की जा रही है. उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों के अनुभव और नेटवर्क का लाभ वर्तमान विद्यार्थियों को दिलाने के लिए एक टीम गठित की गई है. इससे रोजगार, इंटर्नशिप और करियर मार्गदर्शन के नए अवसर पैदा होंगे.
स्टार्टअप और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. सरोज शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार और स्वरोजगार के लिए भी तैयार करना चाहता है. इसी उद्देश्य से स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय का लक्ष्य समय पर परीक्षा, नियमित सत्र, बेहतर प्लेसमेंट, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्र हितों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना है.
विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से रांची विश्वविद्यालय एक नई पहचान स्थापित करेगा.
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