साउथ इंडिया के डॉक्टर से दूर होगी झारखंड में चिकित्सकों की कमी! अपर मुख्य सचिव ने बैठक में दिए संकेत
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बैठक में स्वाइन फ्लू की स्थिति, जांच, व्यवस्था समेत रिस्ट्रक्चरिंग पर विस्तार से चर्चा हुई. रिपोर्ट- उपेंद्र कुमार

Published : September 2, 2026 at 8:30 PM IST
रांची: राज्य के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार अजय कुमार सिंह ने बुधवार को स्वास्थ्य विभाग एवं एनएचएम की समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की. बैठक में स्वाइन फ्लू की स्थिति, जांच व्यवस्था, एचएमआईएस, सीसीटीवी इंस्टॉलेशन, कार्मिकों के प्रशिक्षण तथा डॉक्टर एवं पैरामेडिकल कर्मियों के रिस्ट्रक्चरिंग पर विस्तार से चर्चा हुई.
स्वाइन फ्लू की स्थिति और जांच की जानकारी
अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) ने बैठक के दौरान कहा कि राज्य में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए दक्षिण भारत से पीजी डॉक्टरर्स लाने का प्रयास स्वास्थ्य विभाग कर रहा है. इसके साथ साथ एसीएस ने बैठक में सभी जिलों से स्वाइन फ्लू की स्थिति और जांच की जानकारी ली. बैठक के दौरान यह बताया गया कि रांची सदर अस्पताल, रिम्स और एमजीएम जमशेदपुर में स्वाइन फ्लू की जांच हो रही है, इस पर अपर मुख्य सचिव ने राज्य के सभी जिलों में जल्द से जल्द स्वाइन फ्लू जांच शुरू करने का निर्देश दिया.
बैठक में ली गई जांच किट की स्थिति की जानकारी
उन्होंने बैठक के दौरान आरटी-पीसीआर मशीनों की उपलब्धता, खराब मशीनों की मरम्मत और जांच किट की स्थिति की भी जानकारी ली गई. उन्होंने कहा कि जहां मशीन उपलब्ध नहीं है, वहां तत्काल रिक्विजीशन भेजा जाए. जरूरत पड़ने पर टेक्नीशियन और पैथोलॉजिस्ट को रिम्स अथवा सदर अस्पताल में प्रशिक्षण दिलाया जाए.
खास जगहों पर कैमरे लगाने पर जोर
अपर मुख्य सचिव ने ट्रूनेट मशीनों की उपलब्धता और उन्हें एचएमआईएस से जोड़ने की स्थिति की भी समीक्षा की. सभी जिलों को एचएमआईएस को पूरी तरह फंक्शनल करने तथा आवश्यकतानुसार कर्मियों को प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया. सीसीटीवी इंस्टॉलेशन की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि एजेंसी जल्द ही जिलों में जाकर कैमरे लगाने के स्थान का प्लान तैयार करें, ताकि महत्वपूर्ण स्थानों पर कैमरे लगाए जा सकें और आवश्यक निगरानी सुनिश्चित हो.
डॉक्टर एवं पैरामेडिकल कर्मियों के रिस्ट्रक्चरिंग पर चर्चा
बैठक में डॉक्टर एवं पैरामेडिकल कर्मियों के रिस्ट्रक्चरिंग पर भी चर्चा हुई. अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए जल्द ही दक्षिण भारत से करीब एक हजार पीजी डॉक्टर लाने का प्रयास किया जा रहा है. सभी सिविल सर्जनों से प्राप्त सुझावों के आधार पर अस्पतालों में पदों का संख्या के अनुरूप निर्धारण किया जाएगा.
भेजे गए प्रस्तावों की समीक्षा
उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र में एक सीएचसी को अपग्रेड करने के लिए भेजे गए प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करने का निर्देश दिया. अपर मुख्य सचिव ने राज्य के 125 स्थानों पर एचपीएलसी मशीन उपलब्ध कराने की बात कही, साथ ही सहियाओं को प्रशिक्षण देकर ब्लड कलेक्शन और ड्रेसिंग का कार्य करने योग्य बनाने की योजना पर भी चर्चा हुई.
दो सहियाओं का चयन
हर सब सेंटर पर बेहतर शैक्षणिक योग्यता वाली दो सहियाओं का चयन कर उन्हें छह माह का प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है. इसके अलावा एमपीडब्ल्यू को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 80 कॉलेज ऐसे हैं, जहां इस प्रकार का प्रशिक्षण कराया जा सकता है. बैठक में विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला सहित विभाग के कई पदाधिकारी और सभी जिलों के सिविल सर्जन उपस्थित थे.
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