मोतिहारी चीनी मिल घोटाला मामले में बड़ा एक्शन, ETV Bharat की खबर का असर, राजस्व शाखा में चला तबादले का हंटर
मोतिहारी चीनी मिल की करोड़ों की जमीन घोटाला मामले में ईटीवी भारत की खबर पर संज्ञान लेते हुए डीएम ने तीन कर्मियों का ट्रांसफर किया.

Published : July 3, 2026 at 1:05 PM IST
मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी चीनी मिल की बहुमूल्य जमीन से जुड़े कथित घोटाले में अब प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है. इस मामले में ईटीवी भारत द्वारा लगातार प्रकाशित खबरों के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है. जिले के नए डीएम सौरभ सुमन के निर्देश पर जिला राजस्व शाखा में वर्षों से जमे कर्मियों पर कार्रवाई शुरू हो गई है.
मोतिहारी चीनी मिल घोटाले में बड़ा एक्शन: डीएम ने गुरुवार को जिला राजस्व शाखा से तीन कर्मियों का तबादला कर दिया है. प्रशासनिक गलियारों में इसे चीनी मिल जमीन प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी शुरुआती कार्रवाई माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, मोतिहारी चीनी मिल की जमीन की खरीद-बिक्री और उससे संबंधित फाइलों के निपटारे में जिला राजस्व शाखा और अंचल कार्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

7 साल से जमे प्रधान सहायक को हटाया गया: आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर भू-माफियाओं को सरकारी स्तर पर मदद पहुंचाई गई. अब प्रशासन इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुट गया है. कार्रवाई की सबसे ज्यादा चर्चा प्रधान सहायक प्रेम नारायण दिशुआ के तबादले को लेकर हो रही है. प्रेम नारायण पिछले करीब सात वर्षों से जिला राजस्व शाखा में तैनात थे.
दो अन्य कर्मियों का भी तबादला: आरोप है कि मोतिहारी चीनी मिल की करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन से संबंधित कई फाइलों में नियमों को दरकिनार कर कार्रवाई कराने में प्रेम नारायण दिशुआ की अहम भूमिका रही है. डीएम के आदेश पर उनका स्थानांतरण सुगौली कर दिया गया है. इसके साथ ही जिला राजस्व शाखा से दो अन्य कर्मियों को भी हटाया गया है.
भू-माफियाओं और सरकारी बाबुओं के गठजोड़ पर वार: जानकारों का कहना है कि चीनी मिल जमीन से जुड़े मामलों में लंबे समय से कुछ कर्मियों का प्रभाव बना हुआ था. आम लोगों को दाखिल-खारिज, परिमार्जन या रोक सूची से नाम हटवाने जैसे सामान्य कार्यों के लिए महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जबकि आरोप है कि भू-माफियाओं से जुड़े मामलों में फाइलें तेजी से आगे बढ़ जाती थीं. इसी कारण पूरे सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं.

नए DM का पहला बड़ा हंटर: सूत्र बताते हैं कि बुधवार को डीएम सौरभ सुमन ने जिला रिकॉर्ड रूम से मोतिहारी और चकिया स्थित चीनी मिल की जमीन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज मंगवाए. देर शाम तक रिकॉर्ड का अवलोकन किया गया. इसके बाद रात में ही अपर समाहर्ता (एडीएम) को बुलाकर आवश्यक निर्देश दिए गए. डीएम ने गुरुवार सुबह 10 बजे तक तबादले से संबंधित फाइल अपने टेबल पर प्रस्तुत करने का सख्त आदेश दिया था.
डीएम के निर्देश के बाद समाहरणालय में गुरुवार सुबह सामान्य दिनों की तुलना में काफी पहले गतिविधियां शुरू हो गईं. बताया जाता है कि सुबह करीब आठ बजे ही स्थापना शाखा का कार्यालय खोल दिया गया और तबादला सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई. इसके बाद आदेश जारी कर तीन कर्मियों का स्थानांतरण कर दिया गया.
और भी लोगों पर कस सकता है शिकंजा: प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है. यदि पूरे मामले की गहन जांच होती है तो कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं. माना जा रहा है कि चीनी मिल की जमीन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, फाइलों की मूवमेंट और स्वीकृतियों की विस्तृत जांच के बाद कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं.
मोतिहारी चीनी मिल की जमीन का मामला लंबे समय से विवादों में रहा है. करोड़ों रुपये मूल्य की इस जमीन की खरीद-बिक्री और सरकारी प्रक्रियाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. अब नए डीएम के नेतृत्व में शुरू हुई कार्रवाई से लोगों में यह उम्मीद जगी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल जिला प्रशासन की नजर जिला राजस्व शाखा की कार्यप्रणाली पर बनी हुई है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े प्रशासनिक फैसले सामने आ सकते हैं. यदि जांच की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो मोतिहारी चीनी मिल जमीन प्रकरण में कई और बड़े नामों का खुलासा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.
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