उत्तराखंड में 'मीठे जहर' के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई, अब तक 31 क्विंटल दुग्ध उत्पाद किया गया नष्ट
उत्तराखंड में मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई जारी, बाहरी राज्यों से आने वाले खाद्य पदार्थों पर कड़ी नजर, अब तक लिए जा चुके 250 सैंपल

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : October 17, 2025 at 5:58 PM IST
रोहित कुमार सोनी
देहरादून: उत्तराखंड में मिलावटखोरी के खिलाफ ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई जारी है. वर्तमान स्थिति ये है कि सबसे ज्यादा खाद्य पदार्थ की सप्लाई उत्तर प्रदेश और हरियाणा से की जा रही है. जिसके चलते प्रदेश के बॉर्डर क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी गई है. आए दिन बड़ी मात्रा में पनीर और मावा जब्त किए जा रहे हैं.
बावजूद इसके मिलावटी खाद्य पदार्थों के सप्लाई का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा. जिसके चलते फूड सेफ्टी अधिकारी प्रदेश भर में और खास कर बॉर्डर क्षेत्र में ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई कर रहे हैं. अभी तक लगभग 31 क्विंटल दुग्ध उत्पादों को नष्ट किया जा चुका है.
दीपावली त्योहार के दौरान मुख्य रूप से मिठाइयों का एक बड़ा कारोबार होता है. यही वजह है कि मिठाई की डिमांड को देखते हुए मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं. जो मिठाइयों और दूध से बने अन्य उत्पादों में काफी ज्यादा मिलावट करते हैं. ऐसे में उत्तराखंड सरकार ने मिलावट का कारोबार करने वाले लोगों को 'मिलावट पर जीरो टॉलरेंस' का संदेश दिया है.
अब तक हुई कार्रवाई: ऐसे में प्रदेशभर में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है. साथ ही सीमाओं पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है. ताकि, बाहरी राज्यों से मिलावटी मावा और मिठाइयां उत्तराखंड में न आ सकें. एफडीए के मुताबिक, अभी तक खाद्य पदार्थों के 250 सैंपल लिए जा चुके हैं. साथ ही 850 किलो पनीर, 500 किलो क्रीम, 875 किलो मिठाई और 900 किलो मावा नष्ट किया जा चुका है.

क्या बोले खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त आर राजेश कुमार? वहीं, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त आर राजेश कुमार ने कहा कि दीपावली तक पूरे प्रदेश भर में स्पेशल टास्क फोर्स की तर्ज पर निगरानी दल गठित किए गए हैं. ऐसे में जिन भी क्षेत्रों से मिलावट की शिकायत मिल रही हैं, वहां औचक चेकिंग की जा रही है.
औचक निरीक्षण और कार्रवाई की रिपोर्ट हर दिन मुख्यालय मंगवाई जा रही है. ताकि, जरूरत के अनुसार अभियान की गति और दायरे को बढ़ाया जा सके. आयुक्त ने जनता से अपील किया कि सस्ती मिठाइयों और खुला मावा खरीदने से बचें. साथ ही मिठाई खरीदते समय ब्रांड, पैकिंग और एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें.
वहीं, प्रदेश भर में छापेमारी की जाने को लेकर कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में टीम में गठित की गई हैं. टीमों में शामिल फूड सेफ्टी ऑफिसर को लक्ष्य दिया गया है कि हर उस जगह पर जाना है, जहां से पहले सही शिकायत आ रही है और साथ ही उन स्थानों को चिन्हित करके वहां पर छापेमारी की कार्रवाई की जाए.

इसके अलावा जिन जगहों की सूचनाओं मिलती हैं, उन जगहों पर भी छापेमारी की कार्रवाई की जाए. साथ ही कहा कि मिलावटखोरी पर लगाम लगाने के लिए जनता के सहयोग की भी जरूरत है. ऐसे में जनता को लगता है कि कहीं मिलावटखोरी हो रही है या खाद्य पदार्थ की क्वालिटी बेहतर नहीं है तो वो सूचना दे सकते हैं.
इतना ही नहीं जनता को भी जागरूक होने की जरूरत है. खासकर रंग बिरंगी मिठाइयों को खरीदने से बचें. साथ ही लाइसेंस वाली दुकानदार से ही खाद्य पदार्थ खरीदें. वहीं, खाद्य सुरक्षा विभाग के उपायुक्त गणेश कंडवाल ने कहा कि त्योहारों के दौरान मिठाईयां समेत अन्य खाद्य पदार्थों की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ जाती है. जिसको देखते हुए एफडीए प्रदेशभर में अभियान चलाकर बाजारों में मिल रहे उन सभी खाद्य पदार्थों की जांच कर रही है.

"जिन खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी की संभावना ज्यादा रहती है, उन खाद्य पदार्थों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. जिसमें दुग्ध उत्पादन, तेल, मसाले शामिल हैं, इन सभी पदार्थों के सैंपल लिए जा रहे हैं. खाद्य पदार्थों के तत्काल जांच के लिए सचल मोबाइल टेस्टिंग वैन का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में खाद्य पदार्थों के विक्रेता और उपभोक्ता भी मौके पर ही जांच करवा सकते हैं."- गणेश कंडवाल, उपायुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग
उन्होंने बताया कि जो टीमें गठित की गई है, उसमें क्विक रिस्पांस टीम भी शामिल है, जो लगातार छापेमारी की कार्रवाई कर रही है. इसके अलावा मार्केट का सर्विलांस करके इस बात की जानकारी लगाई जा रही है कि खाद्य पदार्थों की सप्लाई कहां से हो रही है? ताकि, जिन जगहों से खाद्य पदार्थों की सप्लाई हो रही है, वहां की स्थितियों को जाना जा सके.

अनहाइजीनिक तरीके से जो खाद्य पदार्थों की सप्लाई की जा रही है, वो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. लिहाजा, खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों की ओर से खाद्य पदार्थों का सैंपल लिया जाता है. साथ ही अनहाइजीनिक होने पर उसको नष्ट कर दिया जाता है. साथ ही बताया कि प्रदेश के मैदानी जिलों में विशेष रूप से फोकस किया जा रहा है. क्योंकि, इन्हीं जिलों से पर्वतीय क्षेत्रों में भी सप्लाई की जाती है.
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