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निगरानी विभाग का एक्शन: 107 घूसखोर लोकसेवक गिरफ्तार, 15 सरकारी सेवकों की संपत्ति जब्त

साल 2025 निगरानी विभाग के नाम रहा. टीम ने 107 घूसखोर लोकसेवकों को गिरफ्तार किया तो 15 सरकारी सेवकों की संपत्ति जब्त की. पढ़ें लिस्ट..

Vigilance Action In Bihar
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की प्रेस कॉन्फ्रेंस (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 1, 2026 at 1:47 PM IST

6 Min Read
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पटना: नए वर्ष 2026 में निगरानी ब्यूरो भ्रष्ट लोकसेवकों को दबोचने के साथ ही सजा दिलाने पर भी विशेष रूप से फोकस करेगा. भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े जाने वाले लोकसेवकों के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही इन्हें समय पर सजा दिलाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे. इसके लिए निगरानी ब्यूरो में नए स्पीडी ट्रायल कोषांग का गठन जल्द कर लिया जाएगा. निगरानी ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि इसके अलावा डीए, ट्रैप की कार्रवाई की गति बढ़ाने और इनके मामलों का निपटारा समय पर करने के लिए स्पीडी कोषांग का गठन होगा.

2025 में निगरानी का प्रदर्शन बेहतर: साल 2025 के अंतिम दिन बुधवार को निगरानी ब्यूरो कार्यालय के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डीजी ने कहा कि वर्ष 2025 में निगरानी ब्यूरो की उपलब्धियां बेहतरीन रही हैं. पिछले 25 वर्ष के दौरान निगरानी में प्रतिवर्ष औसतन 72-73 एफआईआर होती थी लेकिन 2025 में यह वार्षिक औसत बढ़कर 122 एफआईआर हो गई है.

इस वर्ष 30 दिसंबर को सबसे ज्यादा एक दिन में 20 एफआईआर दर्ज की गई है. अगर वर्षभर का औसत देखें, तो कुल कार्य दिवस में हर दूसरे दिन एक एफआईआर दर्ज की गई है. वहीं, पिछले वर्ष 2024 में महज 15 एफआईआर दर्ज की गई थी.

107 लोकसेवक को घूस लेते पकड़ा गया: जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि इस वर्ष जितने मामले दर्ज हुए हैं, उसमें सबसे ज्यादा 101 एफआईआर सिर्फ ट्रैप यानी घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने वाले लोकसेवकों से संबंधित दर्ज हुई है. इसमें 107 भ्रष्ट लोकसेवकों को पकड़ा गया है, जिसमें 7 महिला पदाधिकारी और 6 बिचौलिए शामिल हैं. यह कुल दर्ज मामले का 81-82 प्रतिशत है. इसमें 37 लाख 80 हजार 300 रुपये घूस की राशि के तौर पर जब्त की गई.

2025 में 101 एफआईआर: जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि पिछले वर्ष महज 8 मामले इससे संबंधित दर्ज हुए थे. अगर पिछले 25 वर्ष में दर्ज हुए ट्रैप के मामलों का वर्षवार औसत देखें तो यह 47 एफआईआर का है, जबकि इस वर्ष यह औसत शतक से अधिक यानी 101 है. प्रत्येक महीने औसतन 8 से 9 कार्रवाई हुई है. 2025 में जो ट्रैप की कार्रवाई की गई है, उनमें 24 मई को एक लोकसेवक को 3 लाख रुपये घूस लेते और एक अन्य लोकसेवक को वाशिंग मशीन के साथ राशि घूस लेते पकड़ा जाना है.

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निगरानी डीजी जितेन्द्र सिंह गंगवार (ETV Bharat)

"निगरानी ब्यूरो के इतिहास में संभवत पहली बार ऐसा हुआ है कि एक ही दिन 27 अगस्त को ट्रैप की चार कार्रवाई अलग-अलग जिलों औरंगाबाद, खगड़िया, दरभंगा और भोजपुर में अलग-अलग विभाग के पदाधिकारियों को लेकर की गई. इसके अलावा 17 दिसंबर को एक ही दिन ट्रैप के 2 और डीए की एक कार्रवाई की गई."- जितेंद्र सिंह गंगवार, महानिदेशक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो

डीए केस में दोगुणी हुई कार्रवाई: डीजी ने कहा कि डीए (आय से अधिक संपत्ति) के मामले में 2024 में सिर्फ 2 एफआईआर दर्ज हुई थी, जबकि 2025 में 15 भ्रष्ट लोकसेवकों पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है. यह कुल कार्रवाई का करीब 12 प्रतिशत है. इन सभी मामलों में 12 करोड़ 77 लाख रुपये की अवैध संपत्ति पकड़ी गई है. अनुसंधान पूरा होने पर इस राशि में बढ़ोतरी होने की संभावना है. सभी डीए के मामलों में सबसे बड़ा केस भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता पर 2 करोड़ 74 लाख रुपये का डीए केस का है. 12 करोड़ से अधिक की अवैध संपति पकड़ी गई.

इसके अलावा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 4, ग्रामीण कार्य विभाग के 3 और पुलिस महकमा के 2 पदाधिकारियों पर कार्रवाई की गई है. अगर डीए के मामले में पिछले वर्षों का औसत 8 एफआईआर सालाना का था, जबकि इस बार इससे दोगुणा 15 मामले दर्ज किए गए हैं.

पद के गलत दुरुपयोग से जुड़े मामले: जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि पद के गलत दुरुपयोग से जुड़े मामले (एओपीए) में पिछले वर्ष 5 मामले दर्ज किए गए थे. इस वर्ष 6 मामले दर्ज हुए हैं. इसमें धीमी प्रगति की मुख्य वजह संबंधित पदाधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई करने से पहले इसके लिए उनके विभाग से अनुमति लेने का नया प्रावधान है.

निपटारे की दर तेजी से बढ़ रही: डीजी ने कहा कि निगरानी ब्यूरो में लोक सेवकों के खिलाफ चल रहे जांच के मामलों के निपटारे की गति भी काफी बढ़ी है. 2020 में 17 नए मामले दर्ज हुए और 23 का निपटारा हुआ. 2021 में 13 नए मामले दर्ज हुए और 62 का निपटारा किया गया. वहीं, 2025 में 80 मामले दर्ज हुए और सर्वाधिक 121 का डिस्पोजल किया गया.

पिछले वर्षों तक निगरानी से सजा दिलाने में औसतन 12 से 13 वर्ष का समय लग रहा था लेकिन इस वर्ष से इसे कम कर दिया गया है. आने वाले समय में सजा दिलाने की रफ्तार बढ़ाने के लिए स्पीडी ट्रायल की व्यवस्था की जा रही है. इसकी कमान डीआईजी-2 मृत्युंजय कुमार संभालेंगे.

नियोजित शिक्षक मामले में 1711 एफआईआर: वहीं, नियोजित शिक्षकों से जुड़े मामले की जांच के बारे में डीजी गंगवार ने कहा कि 2016 से यह जांच चल रही है. अब तक शिक्षा विभाग ने 6 लाख 56 हजार 595 सर्टिफिकेट निगरानी ब्यूरो को जांच के लिए दे चुकी है. इसकी जांच में अब तक 1711 एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें 2916 शिक्षकों को अभियुक्त बनाया गया है. इस वर्ष 130 एफआईआर दर्ज की गई है.

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