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मनेंद्रगढ़ में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी उपलब्धि, 1 साल में 1 लाख 9 हजार लोगों का हुआ सफल इलाज

507 सफल सर्जरी 1 साल के भीतर की गई. मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर से रजनीश श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

Manendragarh Chirmiri Bharatpur
हेल्थ डिपार्टमेंट की उपलब्धि (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : August 23, 2026 at 11:29 AM IST

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एमसीबी: जिले में स्वास्थ्य विभाग लगातार बेहतर काम कर रहा है. सरकार अस्पताल में आकर इलाज कराने वालों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जब से मनेंद्रगढ़ में 220 बिस्तरों वाला सिविल अस्पताल शुरू हुआ है, लोगों ने इलाज के लिए बाहर और निजी क्लीनिकों में जाना छोड़ दिया है. अस्पताल में तमाम सुविधाए एक साथ मिलने से मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है. इलाके के ज्यादातर गरीब परिवार अब यहीं पर अपना इलाज करा रहे हैं. इसे स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. अस्पताल में सामान्य इलाज के साथ-साथ विशेषज्ञ सेवाएं, सर्जरी, सोनोग्राफी, डायलिसिस और आधुनिक पैथोलॉजी जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.

हेल्थ डिपार्टमेंट की उपलब्धि

अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2025 से जुलाई 2026 तक एक वर्ष की अवधि में कुल 1,09,264 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचे. वहीं 7,505 मरीजों को आईपीडी में भर्ती कर उपचार दिया गया. इस अवधि में अस्पताल में 1,369 प्रसव भी हुए अस्पताल में विभिन्न प्रकार की 507 सफल सर्जरी की गई. सर्जरी के मामले में अस्पताल ने पिछले 1 साल में बड़ी बढोत्तरी दर्ज की है.

हेल्थ डिपार्टमेंट की उपलब्धि (ETV Bharat)
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हेल्थ डिपार्टमेंट की उपलब्धि (ETV Bharat)
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हेल्थ डिपार्टमेंट की उपलब्धि (ETV Bharat)

जुलाई 2025 में जहां महज 15 सर्जरी अस्पताल में दर्ज हुई, वहीं जुलाई 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 114 तक पहुंच गया. मार्च 2026 में 42, अप्रैल में 33, मई में 68 और जून में 79 सर्जरी हुईं लगातार बढ़ता सर्जरी का आंकड़ा अस्पताल में ऑपरेशन और विशेषज्ञ सेवाओं के बेहतर होने का प्रमाण है. अस्पताल में सोनोग्राफी जांच की सुविधा का भी लगातार विस्तार हुआ है. फरवरी 2026 में 123, मार्च में 202, अप्रैल में 103, मई में 96, जून में 387 और जुलाई 2026 में 442 सोनोग्राफी जांच की गई. जुलाई में सोनोग्राफी जांच का आंकड़ा पिछले महीनों की तुलना में काफी अधिक दर्ज किया गया.

अस्पताल में जल्द लगेगी हाई-रेजोल्यूशन डिजिटल अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन

अस्पताल में नई हाई-रेजोल्यूशन डिजिटल अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन के पंजीयन की प्रक्रिया भी चल रही है. नई मशीन उपलब्ध होने के बाद मरीजों को जांच की सुविधा और बेहतर मिलने की उम्मीद है. किडनी रोगियों के लिए अस्पताल में डायलिसिस सुविधा भी बड़ी राहत का सबब बन रही है. यहां प्रतिदिन करीब 15 मरीजों को डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है. पहले डायलिसिस के लिए मरीजों और उनके परिजनों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब मनेन्द्रगढ़ में ही यह सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें समय और आर्थिक खर्च दोनों में राहत मिल रही है.

हार्मोनल टेस्ट फैसिलिटी भी उपलब्ध

अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक अस्पताल की लैब में प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों की विभिन्न प्रकार की जांच की जा रही है. सामान्य पैथोलॉजी जांच के साथ हार्मोनल टेस्ट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध है. इससे मरीजों को छोटी-बड़ी जांच के लिए दूसरे शहरों में जाने की परेशानी कम हुई है. ओपीडी के आंकड़े भी अस्पताल पर लोगों के बढ़ते भरोसे को बताने के लिए काफी हैं.

सिविल अस्पताल आने वाले मरीजों की बढ़ी संख्या

जुलाई 2025 में ओपीडी की संख्या 9,102 थी, जबकि जुलाई 2026 में 9,067 मरीज ओपीडी में पहुंचे. फरवरी 2026 में 9,164 और जून में 9,169 मरीजों की ओपीडी दर्ज की गई. हर महीने हजारों मरीज अस्पताल पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले रहे हैं. मरीजों की बढ़ती संख्या, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, सर्जरी सेवाओं में वृद्धि, सोनोग्राफी जांच का विस्तार, डायलिसिस सुविधा और आधुनिक लैब जांच को देखते हुए मनेन्द्रगढ़ का 220-बिस्तर सिविल अस्पताल क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है.

बस्तर में मलेरिया के मामलों पर जताई चिंता

जिले के दौरे पर पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि हम स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं. वहीं मंत्री ने बस्तर संभाग में लगातार सामने आ रहे मलेरिया के मामलों और इससे हुई मौतों को लेकर कहा कि आंकड़ों को देखा जाए तो मौतों की संख्या में कमी आई है. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बस्तर में मलेरिया की स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग लगातार नजर बनाए हुए है और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है.

मनेंद्रगढ़ की भौगोलिक स्थिति

यहां ज्यादातर गरीब परिवार के लोग रहते हैं. जनजातीय और पिछड़े वर्ग के लोगों की आबादी यहां सबसे ज्यादा है. बीमार होने पर पहले लोग यहां ओझा गुनी के पास जाया करते थे. लेकिन जब से लोगों में जागरुकता आई है, लोग बीमार होने पर झाड़ - फूंक छोड़ अस्पताल जाना बेहतर मानते हैं. भौगोलिक रुप से इलाका घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा है. दूर दराज के लोग बीमार होने पर पहले जिला अस्पताल जाया करता थे. जब से 220 बिस्तरों वाला अस्पताल यहां खुला है तब से मरीजों को बड़ी राहत मिली है. अब रेफर केस में ही मरीजों को बड़े अस्पताल भेजा जाता है. डिलीवरी भी अब यहीं होती है, जो एक बड़ी उपलब्धि है.

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