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अबुआ दिशोम बजट 2026-27 की तैयारीः इन क्षेत्रों में विकास पर सरकार का जोर

झारखंड बजट की तैयारी राज्य सरकार ने शुरू कर दी है.

A two day pre budget workshop has begun for Abua Dishom Budget 2026 27 in Ranchi
दो दिवसीय अबुआ दिशोम बजट 2026-27 बजट पूर्व गोष्ठी (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 15, 2026 at 9:57 PM IST

5 Min Read
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रांचीः अबुआ दिशोम बजट 2026-27 को लेकर राज्य सरकार ने तैयारी प्रारंभ कर दी है. झारखंड के रजत जयंती वर्ष को ध्यान में रखकर आगामी वित्तीय वर्ष के तैयार हो रहे बजट को जनहितकारी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा सुझाव लिए जा रहे हैं.

रांची के प्रोजेक्ट भवन में आयोजित दो दिवसीय अबुआ दिशोम बजट 2026-27 बजट पूर्व गोष्ठी की शुरुआत आज गुरुवार से हुई. जिसमें विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए.

इस मौके पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अबुआ दिशोम बजट 2026-27 राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह झारखंड के रजत जयंती वित्तीय वर्ष में प्रस्तुत किया जाएगा. राज्य ने अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस अवसर पर सरकार एक मजबूत, संतुलित एवं जनहितकारी बजट देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा कि बजट को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से विशेषज्ञों, विभिन्न विभागों तथा हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं. वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोच के अनुरूप राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा.

ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है. स्वास्थ्य क्षेत्र को भी आगामी बजट में विशेष महत्व दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसी भी बजट की सफलता कंसल्टेशन, सजेशन और इम्प्लीमेंटेशन—इन तीन स्तंभों पर निर्भर करती है, तभी बजट का समुचित उपयोग संभव है.

अबुआ दिशोम बजट 2026-27 में ये रहेगा खास

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार बजट संतुलित और आवश्यकता के अनुरूप ही प्रावधान किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि गोष्ठी में चेक डैम निर्माण, वर्षा जल संचयन, नदियों के जल संरक्षण तथा वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिन्हें बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा.

नगर विकास एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि इस वर्ष के बजट में पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा. जिससे राज्य में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सके और रोजगार को भी बढ़ावा मिले. शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ किया जाएगा.

कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि आगामी बजट में नए और नवाचारी विचारों को शामिल करने पर जोर दिया जाएगा. अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज को अपनाने पर भी सरकार विचार कर रही है.उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने मिलेट्स मिशन को “मड़ुवा क्रांति” नाम दिया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव किसानों में दिख रहा है.

इसके तहत किसानों को 3,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. साथ ही सिंचाई के लिए 5 एचपी सोलर आधारित वाटर पंप सेट देने की योजना है. उन्होंने केसीसी लोन में बैंकों एवं एनजीओ की सक्रिय भागीदारी, ग्रामीण विकास, सिंचाई तथा अबुआ आवास योजना में पर्याप्त बजटीय प्रावधान पर जोर दिया.

जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि सिंचाई झारखंड के लिए एक प्रमुख चुनौती है और इसके सभी विकल्पों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है. उन्होंने वर्षा जल संचयन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इससे सालभर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि बजट में 2.5 एकड़ में बने तालाबों के पुनरुद्धार, माइनर इरीगेशन और अन्य लघु परियोजनाओं पर विशेष प्रावधान किया जाए.

इस मौके पर पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने कहा कि राज्य में कई सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है. कई फ्लाइओवर बन कर तैयार हो गए हैं और कई पर काम चल रहा है. आगामी वित्तीय वर्ष में कई नई परियोजनाओं को बजट में शामिल किया जाएगा.

वित्त सह जल संसाधन सचिव प्रशांत कुमार ने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट्स के बजाय मध्यम और व्यवहारिक परियोजनाओं पर ध्यान देना अधिक उपयोगी होगा. उन्होंने लिफ्ट इरीगेशन आधारित खेती और छोटे तालाबों के जीर्णोद्धार को बजट में शामिल करने का सुझाव दिया.

ग्रामीण विकास विभाग के सचिव के. श्रीनिवासन ने अबुआ आवास, प्रधानमंत्री आवास योजना, जेएसएलपीएस एवं मनरेगा के वित्तीय प्रबंधन पर चर्चा की. उन्होंने ग्रामीण उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य के सभी प्रखंडों में “पलाश मार्ट” की स्थापना का सुझाव दिया.

गोष्ठी में कृषि सचिव अबू बकर सिद्दीकी, पर्यटन सचिव मनोज कुमार और श्रम विभाग के सचिव जितेंद्र सिंह सहित राज्य और राज्य के बाहर से आए विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे. इस दौरान कृषि, सिंचाई, भंडारण क्षमता विस्तार, पशुधन विकास, डेयरी, हॉर्टिकल्चर और इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम पर विशेष चर्चा की गई.

वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से जुड़े विषयों पर विमर्श के दौरान बताया गया कि राज्य का 30 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वन क्षेत्र है. जिसे ग्रीन इकोलॉजिकल सिस्टम के रूप में विकसित कर ग्रीन इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा दिया जा सकता है. गोष्ठी में जाने माने अर्थशास्त्री हरिश्वर दयाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे.

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