कोटा में AI बेस्ड 'मिरेकल मशीन': हर छात्र का अलग पेपर और होमवर्क, NEET-JEE की तैयारी हुई आसान
कोटा के निजी कोचिंग संस्थान ने AI आधारित एक ऐसी 'मिरेकल मशीन' बनाई है, जिसने छात्रों की पढ़ाई को आसान और प्रभावी बना दिया है.

Published : January 9, 2026 at 6:34 AM IST
कोटा: देश की कोचिंग राजधानी कोटा में हर साल लाखों छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं जैसे NEET और JEE की तैयारी करने आते हैं. इन छात्रों की पढ़ाई बेहद कठिन और प्रतिस्पर्धी होती है. अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से यह तैयारी और आसान तथा व्यक्तिगत हो रही है. मोशन एजुकेशन कोचिंग संस्थान ने एक अनोखी AI आधारित मशीन विकसित की है, जिसका नाम है 'मिरेकल मशीन'. यह मशीन छात्रों की प्रोग्रेस पर लगातार नजर रखती है, उनकी कमजोरियों को पहचानती है और क्षमता के अनुसार होमवर्क व क्वेश्चन पेपर उपलब्ध कराती है. इससे छात्रों को अपनी गति से आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है.
मिरेकल मशीन क्या है और कैसे बनी?: कोचिंग के एकेडमिक मैनेजर पदम सिंह सिसोदिया बताते हैं कि यह मशीन पूरी तरह से संस्थान की खुद की बनाई हुई है और इस पर उनका पेटेंट है. संस्थान के 90 से अधिक केंद्रों पर यह मशीन लगी हुई है. ये केंद्र कोटा के साथ-साथ देश के अन्य शहरों में भी हैं. कुल मिलाकर 150 से ज्यादा ऐसी मशीनें संस्थान ने स्थापित की हैं. मशीन में संस्थान का अपना सॉफ्टवेयर चलता है, जिसका नाम यूनिडेक्स है. इस सॉफ्टवेयर से छात्र, शिक्षक, अभिभावक और संस्थान का प्रबंधन सभी जुड़े रहते हैं. यह पूरी व्यवस्था डाटा आधारित है. हर छात्र का प्रोफाइल अलग होता है, जिसमें JEE या NEET की किसी भी स्ट्रीम का पूरा डाटा पहले से फीड किया जाता है. मिरेकल मशीन इसी डाटा के आधार पर काम करती है और छात्र की हर गतिविधि को ट्रैक करती है.
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टेस्ट के बाद शुरू होता है AI का जादू: पदम सिंह सिसोदिया ने बताया कि क्लासरूम में शिक्षक छात्रों को नियमित पढ़ाई कराते हैं. इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है टेस्ट का. इसी टेस्ट के परिणाम पर पूरा AI सिस्टम सक्रिय हो जाता है. मशीन छात्र की परफॉर्मेंस को बहुत बारीकी से जांचती है. वह देखती है कि छात्र ने किस सवाल को हल करने में कितना समय लिया, कौन से सवाल सही किए और कौन से गलत. साथ ही यह भी पता चलता है कि किस सवाल को छात्र को ज्यादा कठिन लगा, किस सब्जेक्ट या टॉपिक में छात्र ने ज्यादा समय खर्च किया या ज्यादा गलतियां कीं. यह विश्लेषण सिर्फ सब्जेक्ट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि टॉपिक और सब-टॉपिक स्तर तक जाता है. पदम सिंह सिसोदिया कहते हैं कि इस तरह छात्र की पढ़ाई का पूरा ज्ञान मिल जाता है. इसके आधार पर मशीन खुद ही अगला होमवर्क और क्वेश्चन पेपर तैयार कर देती है.

हर छात्र को अलग क्वेश्चन पेपर और होमवर्क: सबसे खास बात यह है कि ऑफलाइन परीक्षाओं में सभी छात्रों को एक ही पेपर करना पड़ता है, लेकिन मिरेकल मशीन में हर छात्र का पेपर उसकी प्रोग्रेस और क्षमता के अनुसार अलग होता है. कोई दो छात्रों का पेपर एक समान नहीं होता. अगर दो छात्र एक ही क्लास में पढ़ रहे हैं, तब भी उनकी ताकत और कमजोरी अलग होने के कारण उनका होमवर्क और टेस्ट पेपर अलग-अलग तैयार होता है. इससे छात्र अपनी कमजोरियों पर ज्यादा ध्यान दे पाते हैं और मजबूत हिस्सों को और निखार पाते हैं.

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होमवर्क की प्रक्रिया कैसे चलती है?: एकेडमिक मैनेजर ने बताया कि शिक्षक गुरु ऐप के जरिए होमवर्क जारी करते हैं. छात्र इसे लर्निंग ऐप पर देखते हैं. होमवर्क में तय संख्या में सवाल होते हैं. छात्र इन सवालों को अपनी नोटबुक पर हल करते हैं, फिर ऐप पर वापस जाकर MCQ फॉर्मेट में जवाब देते हैं. मशीन तुरंत जवाब चेक कर लेती है और सही-गलत का हिसाब लगा लेती है. पहले से मौजूद डाटा के आधार पर मशीन छात्र की कमजोर और मजबूत दोनों तरह की जानकारी रखती है. कमजोर टॉपिक्स की लिस्ट सबसे ऊपर दिखाई जाती है. इसके बाद मशीन लगातार ऐसे होमवर्क देती रहती है जो कमजोर हिस्सों पर फोकस करते हैं. छात्र प्रैक्टिस से उन्हें मजबूत बना पाते हैं. जैसे-जैसे छात्र की परफॉर्मेंस सुधरती है, मशीन अपने आप कठिन सवाल देने लगती है. इस तरह छात्र का स्तर लगातार ऊपर उठता जाता है.

छात्रों का अनुभव क्या कहता है?: छात्र गुंजन मीणा बताती हैं कि वे फ्री समय में मिरेकल मशीन से क्वेश्चन पेपर निकाल लेती हैं. इसके लिए रोल नंबर और मोबाइल पर आने वाला OTP डालना पड़ता है. पेपर मिलने के बाद उसे हल करके ऐप पर जवाब देने होते हैं. एक अन्य छात्र आशीष रंजन कहते हैं कि वे लगातार इन पेपर्स को हल करते हैं. जैसे-जैसे उनके जवाब बेहतर होते जाते हैं, मशीन कठिन सवाल पूछने लगती है. दोनों छात्र मानते हैं कि यह सिस्टम उनकी प्रैक्टिस को बहुत व्यवस्थित और उपयोगी बनाता है.

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कोटा की कोचिंग में नया बदलाव: कोटा जैसे शहर में जहां प्रतियोगिता चरम पर होती है, वहां यह मिरेकल मशीन छात्रों के लिए बड़ा सहारा बन रही है. कोचिंग संस्थआन का दावा है कि यह देश की पहली ऐसी AI आधारित व्यवस्था है जो पढ़ाई को पूरी तरह व्यक्तिगत बना देती है. इससे छात्रों को अपनी कमजोरियों पर फोकस करने का मौका मिलता है और वे अपनी गति से आगे बढ़ पाते हैं. अभिभावक और शिक्षक भी इस मशीन के जरिए छात्र की प्रोग्रेस देख सकते हैं. कुल मिलाकर यह तकनीक कोटा की कोचिंग को और आधुनिक और प्रभावी बना रही है.

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