ETV Bharat / state

42.62 करोड़ के बैंक लोन में कथित धोखाधड़ी, कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज, प्लांट-मशीनरी गायब होने की जांच शुरू

नैनीताल बैंक लिमिटेड की सिविल लाइंस शाखा से जुड़े 42.62 करोड़ रुपये के ऋण मामले में कथित धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला

NAINITAL BANK LOAN FRAUD
नैनीताल बैंक के साथ कथित लोन घोटाला मामला (Etv Bharat)
author img

By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : June 27, 2026 at 9:56 AM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

रुद्रपुर: उधम सिंह नगर जिला मुख्यालय रुद्रपुर में 42.62 करोड़ रुपये के बैंक ऋण से जुड़े कथित धोखाधड़ी और बंधक संपत्ति गायब होने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. न्यायालय के आदेश पर रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बैंक का आरोप है कि ऋण लेने वाली फर्म और उसके साझेदारों ने बैंक की अनुमति के बिना बंधक प्लांट, मशीनरी और स्टॉक को गायब कर करोड़ों रुपये के लोकधन को नुकसान पहुंचाया.

42.62 करोड़ रुपये के बैंक ऋण से जुड़ा कथित धोखाधड़ी मामला: उधम सिंह नगर के रुद्रपुर में दि नैनीताल बैंक लिमिटेड की सिविल लाइंस शाखा से जुड़े 42.62 करोड़ रुपये के ऋण मामले में कथित धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला सामने आया है. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने संबंधित फर्म, उसके साझेदारों तथा अन्य आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

बैंक ने लगाया ये आरोप: मामले में दि नैनीताल बैंक की रुद्रपुर शाखा के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक एवं अधिकृत हस्ताक्षरी अपूर्व पाण्डेय ने न्यायालय में प्रार्थना-पत्र दाखिल किया था. इसमें आरोप लगाया गया कि-

वर्ष 2017 में एक ऑटो टेक कंपनी को कार्यशील पूंजी, प्लांट एवं मशीनरी तथा अन्य व्यावसायिक आवश्यकताओं के लिए विभिन्न ऋण खातों के माध्यम से कुल 42.62 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया था. ऋण की नियमित अदायगी नहीं होने के कारण 29 दिसंबर 2019 को सभी ऋण खाते एनपीए घोषित कर दिए गए.

इसके बाद बैंक ने सरफेसी अधिनियम, 2002 के तहत वसूली की कार्रवाई शुरू की. जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद 15 मार्च 2024 को बैंक को बंधक संपत्तियों पर भौतिक कब्जा लेने की अनुमति प्रदान कर दी गई. बैंक के अनुसार 18 जून 2024 को अधिकृत अधिकारी, शाखा प्रबंधक और ऋण वसूली टीम जब फैक्ट्री परिसर में कब्जा लेने पहुंचे, तो वहां बंधक रखे गए प्लांट, मशीनरी और स्टॉक मौके पर नहीं मिले.

बैंक का आरोप है कि फर्म के साझेदारों और संबंधित लोगों ने बिना बैंक की अनुमति के बंधक संपत्ति को हटा दिया है या गायब कर दिया. बैंक का दावा है कि यह कृत्य सुनियोजित षड्यंत्र के तहत किया गया, जिससे बैंक को लगभग 42.62 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा और लोकधन प्रभावित हुआ.

प्रार्थना-पत्र में यह भी कहा गया कि बैंक ने 6 अगस्त 2024 को रुद्रपुर कोतवाली में शिकायत दी थी. शिकायत दर्ज नहीं होने पर 20 अगस्त 2024 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से तहरीर भेजी गई. इसके बाद 11 दिसंबर 2024 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके चलते बैंक को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी.

रुद्रपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है. कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रकाश सिंह दानू ने बताया कि-

न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना शुरू कर दी गई है. जांच के दौरान जो भी साक्ष्य और तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
-प्रकाश सिंह दानू, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक-

फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंक अभिलेखों और बंधक संपत्तियों के संबंध में जांच कर रही है. वहीं, बैंक द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि विवेचना पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.
ये भी पढ़ें: मुद्रा लोन के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा, 17 कारोबारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज