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जोधपुर एम्स में 2026 का पहला अंगदान: ब्रेन डेड श्रमिक ने तीन लोगों को दिया नया जीवन

पाली के अन्नेसिंह की किडनी और लीवर एम्स जोधपुर और एक किडनी एसएमएस (SMS) अस्पताल जयपुर के मरीज को लगाई.

The worker's kidney was sent to Jaipur via a green corridor
श्रमिक की किडनी ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जयपुर भेजी (Photo courtesy : aiims jodhpur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 31, 2026 at 2:08 PM IST

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जोधपुर: शहर में वर्ष 2026 का पहला अंगदान (कैडेवरिक डोनेशन) हुआ, जब पाली जिले के 58 वर्षीय श्रमिक अन्नेसिंह के परिवार ने मानवता की अनूठी मिसाल पेश की. अन्नेसिंह के निधन के बाद परिवार ने अंगदान का नेक फैसला लिया. इससे गंभीर रूप से बीमार तीन रोगियों को नया जीवन मिला.

एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रो. गोवर्धन दत्त पुरी ने बताया कि पाली के जोजावर (खोखरा) निवासी अन्नेसिंह को बेहोशी की हालत में 19 जनवरी को एम्स जोधपुर के आपातकालीन विभाग में लाया गया था. गहन चिकित्सा प्रबंधन के बावजूद न्यूरोलॉजिकल जांच में ब्रेनस्टेम रिफ्लेक्सिस (मस्तिष्क की प्रतिक्रिया) की अनुपस्थिति पाई गई. इसके बाद मेडिकल बोर्ड ने उन्हें 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया था. दुख की घड़ी में ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन टीम ने परिवार के साथ कई काउंसलिंग सत्र किए. विस्तृत चर्चा और भावनात्मक सहयोग के बाद परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दी और अपने दुख को दूसरों के लिए जीवनरक्षक उपहार में बदलने का साहसिक विकल्प चुना. डॉ. पुरी ने बताया कि एम्स में यह 11वां अंगदान है. इसके लिए अन्नेसिंह के परिवार के प्रति एम्स प्रबंधन ने आभार जताया.

ग्रीन कॉरिडोर बना जयपुर भेजी किडनी: अन्नेसिंह की किडनी और लीवर को एम्स जोधपुर के मरीजों को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया, जबकि एक किडनी एसएमएस (SMS) अस्पताल जयपुर के मरीज को आवंटित की. इसे जयपुर भेजने के लिए जोधपुर ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया.

Annesingh
अन्नेसिंह (Photo courtesy : aiims jodhpur)

एम्स का 11वां केडेवर अंगदान: डॉ. पुरी ने बताया कि एम्स जोधपुर में यह 11वां सफल कैडेवरिक अंगदान है. यह 2026 के लिए आशाजनक शुरुआत है, जो पश्चिमी राजस्थान में अंगदान जागरूकता और उन्नत प्रत्यारोपण सेवाएं प्रदान करने के संस्थान के संकल्प को और मजबूत करता है. सामान्यतः यह प्रोसीजर आयुष्मान भारत के तहत होता है, जिससे मरीजों पर वित्तीय बोझ कम से कम रहे. इस अंगदान और प्रत्यारोपण में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और जीआई सर्जरी (लीवर टीम) में डॉ. वैभव वार्ष्णेय, डॉ. पीयूष वार्ष्णेय, डॉ. लोकेश अग्रवाल, यूरोलॉजी (किडनी टीम) में डॉ. एएस संधू, डॉ. शिवचरण नवरिया थे. ब्रेन डेथ घोषणा समिति में डॉ. सादिक मोहम्मद, डॉ. अभिषेक भारद्वाज, डॉ. दीपक झा और डॉ. दुर्गाशंकर मीणा में शामिल थे.

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