लखनऊ में ATS अफसर बनकर दंपती से 90 लाख ठगे, 11 दिन में ट्रांसफर कराई रकम, दो गिरफ्तार
लखनऊ पुलिस ने राजस्थान से दो ठगों को गिरफ्तार किया है. गैंग के सरगाना की तलाश की जा रही है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 6:51 PM IST
लखनऊ : पुलिस ने ATS अधिकारी बनकर 90 लाख की ठगी करने वाले गिरोह के दो और सदस्यों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने लखनऊ के एक दंपति को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 11 दिनों में लाखों रुपये ऐंठ लिए थे. गिरोह का मुख्य सरगना जयपुर में बैठकर नेटवर्क चला रहा था, जिसकी तलाश जारी है. पुलिस अब तक इस गिरोह के पांच सदस्यों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है.
26 जनवरी 2026 को पीड़िता के पास एक कॉल आई. कॉल करने वाले ने खुद को ATS मुख्यालय का इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया. दंपति को डराया गया कि वे मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं. उन्हें सिग्नल ऐप डाउनलोड करने को कहा गया. ऐप पर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जाली आदेश और सीजर दस्तावेज दिखाए गए, जिससे दंपति मानसिक दबाव में आ गए.
11 दिनों में लूटे 90 लाख : गिरफ्तारी से बचने और खातों की जांच के नाम पर आरोपियों ने दबाव बनाया. 29 जनवरी से 9 फरवरी के बीच दंपति ने अलग-अलग किस्तों में कुल 90 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कर दिए. आरोपियों ने 11 लाख की फिर डिमांड, इसपर दंपति ने असमर्थता जताई, तो उन्हें जान-माल की धमकी दी गई.
राजस्थान से पकड़े गए दो : इंस्पेक्टर बृजेश यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने राजस्थान के सीकर से दो मुख्य सहयोगियों को दबोचा जिसमे मनोज यादव (21) निवासी सीकर, राजस्थान व जितेंद्र यादव उर्फ जीतू (23) निवासी सीकर, राजस्थान है. इनसे पहले 17 फरवरी को पुलिस मयंक श्रीवास्तव, इरशाद और मनीष कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है.
जयपुर से संचालित होता है सिंडिकेट : पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे वैभव श्रीवास्तव नाम के युवक के निर्देश पर काम करते थे, जो जयपुर में बैठकर पूरा नेटवर्क चला रहा है. गिरोह फर्जी या किराए के बैंक खातों का इस्तेमाल करता था और पकड़े जाने से बचने के लिए लगातार मोबाइल नंबर और चैट डिलीट कर देता था.
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