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भ्रूण को नीले रंग में प्रदर्शित किया, नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वूमेन केयर हॉस्पिटल के 9 सेंटर्स के पंजीकरण निलंबित

विभाग के अनुसार लिंग चयन जैसे प्रतिबंधित कार्यों के प्रचार-प्रसार को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा.

Department of Medical and Health
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग (ETV Bharat File Photo)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 25, 2026 at 4:41 PM IST

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जयपुर: राजस्थान में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) एवं सरोगेसी सेवाओं के नियमन में प्रथम दृष्टया उल्लघंन सामने आने पर नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वूमेन केयर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की है. इसके अधीन संचालित एआरटी क्लिनिक, एआरटी बैंक एवं सरोगेसी क्लिनिक के कुल 9 पंजीकरण प्रमाण-पत्रों को तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक निलंबित कर दिया है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में निर्धारित मानकों एवं कानूनी प्रावधानों की सख्ती से पालना की जा रही है.

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड ने बताया कि यह कार्रवाई एआरटी (रेग्युलेशन) एक्ट, 2021 के प्रावधानों के उल्लंघन पर की गई है. उन्होंने बताया कि राज्य के एक अंग्रेजी समाचार पत्र के जयपुर संस्करण में प्रकाशित आईवीएफ, फर्टिलिटी एवं टेस्ट टयूब बेबी सेन्टर के विज्ञापन में भ्रूण को नीले रंग में प्रदर्शित किया गया था. यह नीला रंग मेल बच्चे से संबंधित माना जाता है. अतः विभाग ने प्रथम दृष्टया लिंग चयन से संबंधित सेवा के प्रचार का संकेत मानते हुए नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वूमेन केयर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड संस्थान के विरूद्ध कार्रवाई की गई. अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार के सेक्स सिलेक्शन (लिंग चयन) एवं सेक्स सेलेक्टिव एआरटी प्रक्रियाओं पर पूर्ण रूप से वैधानिक प्रतिबंध लागू है.

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इन जिलों में सेंटर: राठौड़ ने बताया कि नीलकंठ फर्टिलिटी एंड वूमेन केयर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के जयपुर में 3 तथा भीलवाड़ा, उदयपुर, कोटा, जोधपुर और अजमेर में एक-एक सहित कुल 9 एआरटी/सेरोगेसी सेन्टर्स पंजीकरण निलम्बित किए गए हैं, जिनमें एआरटी क्लिनिक लेवल-1 भीलवाड़ा, कोटा, उदयपुर, अजमेर, जोधपुर के एक-एक एआरटी क्लिनिक लेवल-2 तथा जयपुर के दो एआरटी क्लिनिक लेवल-2 एवं जयपुर के सेरोगेसी क्लिनिक व एआरटी बैंक शामिल हैं. उन्होंने बताया कि राज्य में एआरटी एवं सेरोगेसी सेवाओं का संचालन निर्धारित कानून, नियमों और नैतिक मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है. लिंग चयन जैसे प्रतिबंधित कार्यों के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रचार-प्रसार को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. नियमों का उल्लघंन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.