हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में 82 लाख के घोटाले का खुलासा, वर्तमान चेयरमैन ने पूर्व चेयरमैन पर उठाए सवाल
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में 82 लाख रुपये का घोटाला उजागर हुआ है. पूर्व चेयरमैन के कार्यकाल की जांच विजिलेंस को सौंपी गई है.

Published : December 18, 2025 at 5:02 PM IST
भिवानी: हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में करीब 82 लाख रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले के आरोप किसी कर्मचारी या अधिकारी पर नहीं, बल्कि बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन वीपी यादव पर लगे हैं. वर्तमान चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने इस पूरे मामले को उजागर करते हुए इसकी जांच विजिलेंस विभाग को सौंप दी है.
पारदर्शिता के दावों पर उठे सवाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा” के नारे और हरियाणा सरकार के पारदर्शिता के दावों के बावजूद शिक्षा बोर्ड में दो साल पुराना यह बड़ा घोटाला सामने आया है. यह मामला साल 2023-24 के सत्र से जुड़ा हुआ है, जब बोर्ड में 10वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं की ऑनलाइन स्क्रीनिंग और मार्किंग करवाई गई थी.
अनुभवहीन फर्म को सौंपा गया काम: इस बारे में शिक्षा बोर्ड चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने बताया कि, "करीब एक लाख उत्तर पुस्तिकाओं की ऑनलाइन स्क्रीनिंग और मार्किंग का काम एक ऐसी फर्म को दिया गया, जिसके पास इस क्षेत्र में कोई पूर्व अनुभव नहीं था. नियमों को दरकिनार कर इस फर्म को काम सौंपे जाने से घोटाले की नींव पड़ी."
स्कैनिंग और मार्किंग में जरूरत से ज्यादा खर्च: डॉ. पवन कुमार के अनुसार उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पेज की स्कैनिंग के लिए 1 रुपये 34 पैसे की दर से भुगतान किया गया. इस हिसाब से एक उत्तर पुस्तिका की केवल स्कैनिंग पर करीब 45 रुपये खर्च हुए. इसके अलावा उसी उत्तर पुस्तिका की मार्किंग के लिए 15 रुपये अलग से दिए गए. अन्य खर्चों को मिलाकर प्रति उत्तर पुस्तिका का खर्च 70 रुपये से अधिक बैठा, जिससे एक लाख उत्तर पुस्तिकाओं पर 70 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो गया.
तत्कालीन चेयरमैन के कार्यकाल में हुआ भुगतान: चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने आगे कहा कि, "यह पूरा कार्य 2023-24 के सत्र में तत्कालीन चेयरमैन वीपी यादव के कार्यकाल के दौरान किया गया. ऑनलाइन प्रक्रिया अपने आप में गलत नहीं थी, लेकिन अनुभवहीन फर्म से अत्यधिक भुगतान किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है."
प्रशंसा पत्र पर 11.80 लाख खर्च भी सवालों के घेरे में: घोटाले से जुड़ा एक और मामला प्रशंसा पत्र, जिसे स्कॉच अवॉर्ड कहा गया, उससे संबंधित है. इस प्रशंसा पत्र को दिलाने के नाम पर 11 लाख 80 हजार रुपये खर्च किए गए. डॉ. पवन कुमार ने कहा कि, "इस खर्च का कोई औचित्य नहीं था, क्योंकि प्रशंसा पत्र तभी मान्य होता है जब वह मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा प्रदान किया जाए."
विजिलेंस जांच के आदेश: वर्तमान चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने बताया कि, "उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रीनिंग और मार्किंग से जुड़े खर्च तथा प्रशंसा पत्र पर हुए खर्च, दोनों मामलों की जांच विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई है. दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी."
शिक्षा व्यवस्था पर गहराया संकट: हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में सामने आया यह घोटाला शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. अब निगाहें विजिलेंस जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिर इस घोटाले का जिम्मेदार कौन है.

