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मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज का 80वां महाधिवेशन बलौदा बाजार में शुरू, सामाजिक समरसता का दिया संदेश

आयोजन की शुरूआत विशाल कलश यात्रा से की गई. कलश यात्रा में समाज के हजारों लोग शामिल हुए.

MANWA KURMI KSHATRIYA SAMAJ
सामाजिक समरसता का दिया संदेश (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 22, 2026 at 10:53 AM IST

5 Min Read
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बलौदा बाजार: मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज का 80वां महाधिवेशन चांपा गांव के सोनचंद वर्मा स्मृति फाउंडेशन स्मृति स्थल शुरू हुआ. शनिवार को पहले दिन विशाल कलश यात्रा निकाली गई. कलश यात्रा में हजारों महिलाएं कलश लेकर निकलीं. कलश यात्रा के जरिए समाजिक समरसता का संदेश भी दिया गया. तीन किमी की यात्रा पूरी करने के बाद कलश यात्रा सोनचंद वर्मा स्मृति फाउंडेशन स्मृति स्थल पहुंची. जहां महिलाओं का भव्य स्वागत किया गया. महाधिवेशन में कई रंगारंग और साांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए गए. आयोजन में शामिल होने के लिए पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी पहुंचे.



भूपेश बघेल ने दिया समाज को संदेश

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा, समाज को बदलते समय के साथ कदम मिलाकर चलना होगा. किसी भी समाज का अस्तित्व तभी सुरक्षित रह सकता है, जब वह समय के साथ अपने विचारों और व्यवस्थाओं में लचीलापन लाए. उन्होंने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताया. कहा कि मनवा कुर्मी समाज ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन नई पीढ़ी की सोच और जीवनशैली में आए बदलाव को समझना जरूरी है.

सामाजिक समरसता का दिया संदेश (ETV Bharat)

आज कई शिक्षित और नौकरीपेशा युवतियों के लिए समान स्तर का वर खोजना चुनौती बन गया है. ऐसे में समाज को नई सोच अपनानी होगी. यदि कोई योग्य युवक बेरोजगार है और युवती नौकरी कर रही है, तो पारिवारिक संतुलन के लिए नई भूमिका-विभाजन की सोच विकसित करनी चाहिए. हमारे पुरखों के नारे “पंथी तोड़ो, समाज जोड़ो” को याद करते हुए एकता और संवाद पर हमें काम करना होगा: भूपेश बघेल, पूर्व सीएम

सामाजिक मुद्दों पर हुई चर्चा

महाधिवेशन में केंद्रीय अध्यक्ष खोडस राम कश्यप ने समाज के समक्ष कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. उन्होंने बढ़ते अंतरजातीय विवाह और बदलते सामाजिक समीकरणों पर चिंता जताई. कहा, समाज में कई युवक-युवतियां उम्र बढ़ने के बावजूद विवाह नहीं कर पा रहे हैं. इसके चलते वे वैकल्पिक रास्तों की ओर बढ़ रहे हैं. कुछ परिवारों ने समाज से अनुरोध किया है कि यदि योग्य जोड़ी समाज के भीतर नहीं मिलती, तो क्या अन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. कश्यप ने इसे समय की चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि समाज को बदलते परिवेश के अनुरूप सोच विकसित करनी होगी. लड़कियों का शिक्षा में आगे बढ़ना सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके साथ नए सामाजिक समीकरण भी उभर रहे हैं. उन्होंने युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने और उन्हें सही दिशा देने की जरूरत पर जोर दिया.



टंक राम वर्मा का संदेश

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि आज वो जो भी हैं, वह समाज की देन है. उन्होंने स्वयं को समाज का ऋणी बताते हुए कहा कि उन्होंने हर पद को अंतिम मानकर काम किया है. उनका जीवन समाज और लोगों के लिए समर्पित है. उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों में कुर्मी समाज के लिए सामाजिक भवनों के निर्माण हेतु लगभग तीन करोड़ स्वीकृत किए गए हैं. कई भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है और कुछ जल्द पूरे होंगे. उन्होंने मंच से अपील की कि सामाजिक मंच पर ऐसी बातें न कही जाएं, जिससे किसी की भावना को ठेस पहुंचे. समाज को जोड़ने और मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक सोच जरूरी है इसपर सभी को काम करना होगा.



सामूहिक विवाह का आयोजन, बघेल ने दिया आशीर्वाद

महाधिवेशन का एक प्रमुख आकर्षण नौ जोड़ों का सामूहिक विवाह रहा. वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ यह आयोजन संपन्न हुआ. मुख्य अतिथियों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद और उपहार भेंट किए. सामूहिक विवाह ने सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को और मजबूत किया. ग्रामीणों और समाज के सदस्यों ने इसे समाज की सकारात्मक पहल बताया. दो दिवसीय इस महाधिवेशन के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के शामिल होने की जानकारी दी गई है. इससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया है. आयोजकों के अनुसार दूसरे दिन सामाजिक प्रस्तावों, संगठनात्मक निर्णयों और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा होगी.



बघेल ने बताया वो खुद कुर्मी समाज से आते हैं

पूर्व सीएम ने कहा, मैं स्वयं कुर्मी समाज से आता हूं, इसलिए इस महाधिवेशन में शामिल होना मेरे लिए सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपने परिवार के बीच आने जैसा है. हमारे समाज ने हमेशा शिक्षा, मेहनत और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता दी है. यही हमारी असली पहचान है. आज समय तेजी से बदल रहा है. नई पीढ़ी नई सोच के साथ आगे बढ़ रही है. ऐसे में हमें अपनी परंपराओं को सहेजते हुए आधुनिक दृष्टिकोण भी अपनाना होगा. समाज तभी मजबूत रहेगा जब हम संवाद बनाए रखेंगे, युवाओं को सही दिशा देंगे और एक-दूसरे का साथ निभाएंगे.

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