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जींद में 80 करोड़ के प्रॉपर्टी टैक्स पर कुंडली, नोटिस बेअसर, अब बकायेदारों की संपत्तियां होंगी सील

जींद में करीब 80 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है. नोटिस बेअसर रहने पर नगर परिषद सीलिंग और कानूनी कार्रवाई करेगी.

Jind Property Tax
जींद में 80 करोड़ के प्रॉपर्टी टैक्स पर कुंडली (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 13, 2026 at 11:38 AM IST

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जींद: नगर परिषद को प्रॉपर्टी टैक्स से बड़ी आय होने की उम्मीद रहती है, लेकिन जींद में करीब 80 करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स सरकारी विभागों, बड़े संस्थानों और आम लोगों के यहां अटका हुआ है. कई बकायेदारों को बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद टैक्स जमा नहीं कराया गया है. अब नगर परिषद ने ऐसे बकायेदारों पर सख्ती करने की तैयारी शुरू कर दी है.

तीन-चार बार भेजे नोटिस: नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार बड़ी राशि के बकायेदारों को तीन से चार बार नोटिस दिए जा चुके हैं. इसके अलावा कर्मचारियों की ओर से फोन करके भी टैक्स जमा कराने के लिए कहा जा रहा है. इसके बावजूद अपेक्षित संख्या में बकायेदारों ने भुगतान नहीं किया है. नगर परिषद अब रिकवरी को लेकर गंभीरता से कार्रवाई की तैयारी कर रही है.

पुलिस लाइन पर 1.79 करोड़ बकाया: सरकारी विभागों की बात करें तो पुलिस लाइन कॉलोनी पर करीब 1.79 करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया बताया गया है. इसमें मूल टैक्स के साथ अन्य शुल्क भी शामिल हैं. इसी तरह हरियाणा रोडवेज इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के पुराने बस स्टैंड की संपत्ति पर करीब 74.43 लाख रुपये बकाया है.

डीसी कार्यालय पर भी लाखों का बोझ: डीसी कार्यालय एवं प्रशासनिक ब्लॉक की मिश्रित उपयोग वाली संपत्ति पर करीब 64.49 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है. जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के एसटीपी परिसर की भूमि पर करीब 47.26 लाख रुपये, जबकि हरियाणा वन विकास निगम के वन कार्यालय एवं वन भूमि पर 46.35 लाख रुपये से अधिक का बकाया दर्ज है.

कई अन्य सरकारी संपत्तियां भी बकायेदार: चंद्रलोक कॉलोनी की विशेष श्रेणी की संपत्ति पर करीब 45.51 लाख रुपये, लोक निर्माण विभाग के प्रशासनिक रेस्ट हाउस ब्लॉक की एक संपत्ति पर 24.83 लाख रुपये तथा वीटा मिल्क प्लांट की भूमि पर करीब 24.32 लाख रुपये का टैक्स बकाया है. पीडब्ल्यूडी की दूसरी संपत्ति पर करीब 17.38 लाख रुपये, जबकि जनस्वास्थ्य विभाग के हनुमान नगर स्थित डब्ल्यूटीपी की भूमि पर करीब 16.06 लाख रुपये बकाया बताया गया है.

निजी संपत्तियों में भी करोड़ों फंसे: सरकारी विभागों के अलावा निजी संपत्तियों और संस्थानों की ओर भी नगर परिषद का करोड़ों रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है. न्यू जवाहर नगर में प्रदीप कुमार, कुलदीप सिंह और जगदीप से संबंधित संपत्ति पर करीब 68.60 लाख रुपये का कुल बकाया बताया गया है. इसमें प्रॉपर्टी टैक्स के साथ फायर टैक्स और अन्य शुल्क भी शामिल हैं.

स्कूल और ट्रक यूनियन भी बकायेदार:रघु नगर स्थित ओम प्रकाश और सुमनलता की संपत्ति पर करीब 51.01 लाख रुपये बकाया है. राम नगर पार्ट-1 स्थित ट्रक यूनियन पर करीब 30.99 लाख रुपये, जबकि रानी तालाब स्थित एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल पर करीब 26.19 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया दर्ज है.

उद्योगों पर भी लाखों का टैक्स: वीटा मिल्क प्लांट पर करीब 24.32 लाख रुपये, अरविंद पाइप इंडस्ट्रीज पर 24.17 लाख रुपये और एचपी गैस प्लांट पर करीब 21.72 लाख रुपये का कुल बकाया बताया गया है. इसके अलावा इम्प्लायज कॉलोनी की एक व्यावसायिक संपत्ति पर करीब 19.38 लाख रुपये बकाया है.

अन्य संपत्तियों पर भी बड़ी देनदारी: कौशिक नगर स्थित जश्नप्रीत की संपत्ति पर करीब 17.44 लाख रुपये, कुलभूषण जैन की संपत्ति पर 15.12 लाख रुपये, भूपेंद्र नगर पार्ट-1 के एक खाली प्लॉट पर 14.51 लाख रुपये और रघु नगर स्थित औद्योगिक संपत्ति पर करीब 14.05 लाख रुपये का बकाया दर्ज है.

ब्याज पर 75 प्रतिशत छूट का मौका: नगर परिषद के अनुसार हरियाणा सरकार की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स के ब्याज पर पहले वर्ष 2011-12 से 2024-25 तक 100 प्रतिशत छूट का लाभ दिया गया था. अब बकाया हाउस टैक्स के ब्याज पर इस महीने के अंतिम दिन तक 75 प्रतिशत छूट का प्रावधान है. परिषद ने बकायेदारों से इस अवसर का लाभ उठाकर जल्द भुगतान करने की अपील की है.

नोटिस बेअसर तो होगी सीलिंग : नगर परिषद ने स्पष्ट किया है कि बड़ी राशि के बकायेदार भवनों, बिल्डिंगों और संस्थानों को बार-बार नोटिस देने के बाद भी टैक्स जमा नहीं कराया गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. ऐसे मामलों में संपत्ति सील करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. सीलिंग से संबंधित हर्जे और खर्च की जिम्मेदारी बकाया राशि धारक की होगी.

जरूरत पड़ी तो कोर्ट जाएगी परिषद: अधिकारियों के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर बकायेदारों के खिलाफ न्यायालय में मामला दायर करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है. नगर परिषद का उद्देश्य बकाया प्रॉपर्टी टैक्स की अधिक से अधिक रिकवरी करना है, ताकि शहर के विकास कार्यों के लिए राजस्व उपलब्ध हो सके.

रिकॉर्ड में गलती तो कराएं सुधार: इस बारे में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सुशील भुक्कल ने कहा, "किसी कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय बकायेदार जल्द से जल्द अपना प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवाएं और सरकार की ब्याज छूट का लाभ उठाएं. संपत्ति के रिकॉर्ड में एरिया, मोबाइल नंबर या संपत्ति की श्रेणी से जुड़ी गलती होने पर नगर परिषद कार्यालय में जाकर उसे ठीक करवाया जा सकता है."

पुरानी रसीद से भी सुधरेगा रिकॉर्ड: सुशील भुक्कल ने आगे कहा कि, "यदि किसी व्यक्ति ने पहले हाउस टैक्स जमा कराया है और दोबारा बकाया जुड़कर आ गया है तो पुरानी रसीद प्रस्तुत कर रिकॉर्ड दुरुस्त करवाया जा सकता है. आवासीय संपत्ति को गलती से कॉमर्शियल या किसी दूसरी श्रेणी में दर्ज किए जाने पर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर रिकॉर्ड में सुधार कराया जा सकता है."

कार्रवाई से पहले भुगतान की अपील: नगर परिषद की ओर से सरकारी विभागों, संस्थानों और आमजन से अपील की गई है कि वे बकाया टैक्स का भुगतान करें. परिषद का कहना है कि ब्याज में मिल रही छूट का लाभ उठाकर बकायेदार अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बच सकते हैं. वहीं नोटिस के बाद भी भुगतान नहीं करने वालों पर अब सीलिंग समेत अन्य कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है.

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