'6 साल से बंद है पेंशन, दवा भी नहीं खरीद पा रहे..' दफ्तरों का चक्कर लगाकर बुजुर्ग परेशान
शिवहर में एक बुजुर्ग को पिछले 6 सालों से पेंशन नहीं मिल रही है. सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाकर वह परेशान हो चुके हैं. पढ़ें..

Published : February 17, 2026 at 1:54 PM IST
शिवहर: बिहार में मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत बुजुर्गों को प्रति माह 1100 रुपये दिए जाते हैं लेकिन आज भी कई ऐसे वृद्ध हैं, जिनको सरकारी प्रक्रिया में खामियों के कारण योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. ऐसे ही लोगों में शामिल हैं शिवहर के 70 वर्षीय मोहन राम. पिपराही प्रखंड के रत्नपुर वार्ड-13 निवासी मोहन राम पिछले 6 सालों से वृद्धा पेंशन योजना का लाभ पाने के लिए लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाया है.
6 सालों से बंद है पेंशन: मोहन राम का कहना है कि उन्होंने कई बार ब्लॉक कार्यालय और सामाजिक सुरक्षा पदाधिकारी के दफ्तर में आवेदन दिया. दस्तावेज जमा किया और अधिकारियों से गुहार भी लगाई, फिर भी उनकी पेंशन स्वीकृत नहीं की गई. मोहन पिपराही प्रखंड के रत्नपुर गांव निवासी हैं. घर में पत्नी चुलिया देवी के अलावे पांच बेटे हैं, सभी किसान हैं. पैसे के अभाव में बुजुर्ग के लिए दवाई खरीद पाना भी मुश्किल हो रहा है.
"कभी पिपराही ब्लॉक, कभी शिवहर कार्यालय तो कभी सीएससी सेंटर का चक्कर लगा चुके हैं. एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भेज दिया जाता है पर समाधान कहीं नहीं मिलता. हर बार कोई न कोई बात बोलकर हमको दूसरे कार्यालय भेज दिया जाता है. अब तो थक चुके हैं. पैसे के अभाव में दवा भी नहीं खरीद पा रहे हैं."- मोहन राम, बुजर्ग
घर वाले भी परेशान: मोहन राम के बड़े बेटे सुनील राम बताते हैं कि वह खुद भी कई बार पिता के साथ सरकारी दफ्तर का चक्कर काट चुके लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती. अन्य बेटे भी यही शिकायत करते हैं. वे कहते हैं कि हमलोग दफ्तरों का चक्कर लगाकर थक चुके हैं. ब्लॉक में बैठने वाले अधिकारी और कर्मचारी हमारी समस्या को गंभीरता से नहीं लेते हैं. क्या दिक्कत है, ये भी ठीक से नहीं बताते.

वहीं बहू उर्मिला देवी ने बताया कि लगभग-6 वर्षो से उनके ससुर लगातार दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं. वह कहती हैं, 'पिताजी को बहुत समस्या है. दवा-फल, आहार खरीद वह अपना नहीं कर पा रहे हैं. हमलोग टेम्पू से कभी लेकर गए दफ्तर. पता नहीं कारण क्या, यह तो विभाग के लोग जानेंगे लेकिन पेंशन नहीं मिलने से बहुत दिक्कत होती है.
'पेंशन ही आखिरी उम्मीद': मोहन राम की दो बेटी भी है. एक बेटी शैल कुमारी की मौत हो चुकी है. दूसरी बेटी की फतेहपुर बस्ती में शादी हुई है. उनकी पत्नी चुलिया देवी बताती हैं कि हम तो दिनभर खेत में रहते हैं. गरीबी के कारण उम्र के आखिरी पड़ाव पर एक पेंशन ही तो सहारा है लेकिन वह भी पति का नहीं मिल रही है.

डीएम के ओएसडी ने दिलाया भरोसा: इस मामले मे पिपराही नजदीक सिएसी संचालक से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि यह ब्लॉक स्तर से होने वाला काम है. सरकारी कर्मचारी ही असल वजह बता सकते हैं. हमलोग इसमें कुछ नहीं कर सकते. हालांकि मामला जिला स्तर तक पहुंचने के बाद डीएम के विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) संदीप कुमार ने संज्ञान लिया है. ईटीवी भारत संवाददाता से फोन पर बातचीत में उन्होंने मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है.
"मोहन राम प्रकरण की जांच कराई जा रही है. परिवार के बेटों के नंबर लेकर उन्हें बुलाया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि आखिर किन कारणों से पेंशन बंद हुई? नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी."- संदीप कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी, डीएम के ओएसडी

क्या है मामला?: असल में मोहन राम की उम्र 70 वर्ष है. उन्होंने 3-4 साल तक मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना का लाभ भी मिला लेकिन 6 साल पहले अचानक पेंशन बंद हो गई. बाद में पता चला कि आधार कार्ड में गड़बड़ी हुई है. ब्लॉककर्मियों की गलती के कारण उनकी जन्म तिथि 11-02-1995 अंकित हो गई है. इस वजह से 70 साल की जगह आज की तारीख में मोहन राम महज 31 साल हैं. ऐसे में वृद्धा पेंशन योजना के लिए वह योग्य नहीं है.
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