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धनबाद में निजी अस्पतालों में 70 फीसदी प्रसव, क्या सरकारी व्यवस्था से लोगों का उठ रहा विश्वास?

धनबाद में 70 फीसदी प्रसव निजी अस्पतालों में हो रहा है. इसके पीछे क्या कारण है इस रिपोर्ट में जानिए.

DELIVERIES IN DHANBAD
प्रसव के बाद महिला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 24, 2026 at 7:21 PM IST

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धनबाद: जिले में सुरक्षित मातृत्व की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. यहां करीब 70 प्रतिशत प्रसव निजी अस्पतालों में हो रहे हैं, जबकि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मात्र 30 प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए जा रहे हैं.

प्रशासन ने माना गंभीर मुद्दा

उपायुक्त आदित्य रंजन ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि धनबाद की आबादी की आय स्तर को देखते हुए अधिकांश प्रसव सरकारी अस्पतालों में होने चाहिए. लेकिन वर्तमान आंकड़े इसके ठीक उलट हैं, जो सरकार और प्रशासन दोनों के लिए दुखद है. उन्होंने बताया कि जिले के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, शहीद निर्मल माहेश्वरी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सदर अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को मिलाकर 50 प्रतिशत संस्थागत प्रसव का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. प्रशासन इस दिशा में विशेष प्रयास कर रहा है.

सहिया, सिविल सर्जन और डीसी का बयान (ETV Bharat)

डॉक्टरों और मैनपावर की कमी बड़ी चुनौती

सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा ने माना कि डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी एक बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के साथ ही बेहतर प्रदर्शन करना आवश्यक है. उनका मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है, क्योंकि ये दरें किसी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रमुख संकेतक होती हैं. यदि ये दरें कम होती हैं, तो स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर माना जाता है.

सुविधाओं की कमी से लोगों में हिचक

जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग है. एक सहिया सुमित्रा देवी ने बताया कि कई गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने से हिचकती हैं. उनका कहना है कि अस्पतालों में पानी, बाथरूम और अन्य बुनियादी सुविधाएं अपर्याप्त हैं. इसी कारण महिलाएं निजी अस्पतालों या अन्य विकल्प चुनती हैं.

सरकार संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सहियाओं को प्रति प्रसव 2,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देती है. लेकिन सहिया ने बताया कि इस राशि का भुगतान में तीन से छह महीने तक का विलंब हो जाता है और इसके लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ती है.

गर्भधारण से प्रसव तक गर्भवती महिलाओं की देखभाल की जिम्मेदारी मुख्य रूप से सहिया साथियों पर होती है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी और भुगतान में देरी उनके कार्य को प्रभावित करती है.

Deliveries in Dhanbad
अस्पताल में प्रसव विभाग (ETV Bharat)

स्वास्थ्य कंद्रों में सुविधाएं मजबूत किए जाने की मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधाएं मजबूत की जाएं, डॉक्टरों की कमी दूर हो और प्रोत्साहन राशि का भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी व समयबद्ध हो, तो सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या बढ़ सकती है. फिलहाल प्रशासन ने 50 प्रतिशत संस्थागत प्रसव का लक्ष्य तय किया है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए स्वास्थ्य ढांचे में ठोस सुधार और लोगों का भरोसा जीतना बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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