भरतपुर में 6 हजार सांपों का रेस्क्यू, बारिश आते ही रिहायशी इलाकों में बढ़ जाता हैं सांपों का खतरा
सर्पमित्र ने पिछले 5 साल में भरतपुर के 84 ग्राम पंचायतों में करीब 6 हजार सांपों का रेस्क्यू किया है. रजनीश श्रीवास्तव की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 31, 2026 at 5:51 PM IST
मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: एमसीबी जिले के उत्तर पश्चिमी छोर पर भरतपुर स्थित है. इस क्षेत्र की सीमाएं मध्य प्रदेश से लगती हैं. पहाड़ी और घने जंगलों से घिरा क्षेत्र मुख्य रूप से आदिवासी बाहुल्य, प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र है. यही वजह है कि प्रकृति की गोद में बसे भरतपुर में अक्सर इंसानों और वन्यजीवों का आमना-सामना होता रहता है. बारिश का मौसम आते ही यहां जंगलों का जीवन रिहायशी इलाकों तक पहुंचने लगता है. घरों में सांप निकलने की घटनाएं अक्सर सामने आती है.
कभी घर के आंगन में सांप दिखाई देता है तो कभी लकड़ियों के ढेर, छप्पर, खेत, बाड़ी या घर के किसी कोने में जहरीला सर्प निकल आता है. ग्रामीणों के लिए यह दृश्य भले ही डरावना हो, लेकिन इसके पीछे कई प्राकृतिक कारण होते हैं. भरतपुर की भौगोलिक परिस्थितियां ही ऐसी हैं कि यहां मानव बस्तियां और वन क्षेत्र एक-दूसरे के काफी करीब हैं. बारिश के दौरान जंगल और जमीन में पानी भरने से सांप सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में निकलते हैं. वहीं घरों और खेतों के आसपास चूहे, मेंढक, छिपकली और दूसरे छोटे जीव आसानी से उपलब्ध होने के कारण भी सांप इन इलाकों की ओर पहुंच जाते हैं.
भरतपुर में वन्यजीवों के रेस्क्यू का जिम्मा संभाल रहे अमरदीप
भरतपुर जैसे वन और पहाड़ी क्षेत्र में सांपों के रिहायशी इलाकों में पहुंचने की घटनाओं के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो डर की जगह संरक्षण का रास्ता चुन रहे हैं. अमरदीप गुप्ता, जिन्हें जयदीप के नाम से भी जाना जाता है, पिछले कई वर्षों से सांपों और अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित रेस्क्यू का काम कर रहे हैं. सूचना मिलने पर अमरदीप दिन हो या रात मौके पर पहुंचकर सांपों का रेस्क्यू करते हैं और उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने का प्रयास करते हैं. यह सेवा लोगों के बीच वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने में भी मदद कर रही है.

खासकर बारिश के मौसम में जब सांप और दूसरे वन्यजीव रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं तब वे सुरक्षित तरीके से निशुल्क उनका रेस्क्यू करते हैं. रेस्क्यू के बाद सांपों को सुरक्षित तरीके से उनके अनुकूल प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया जाता है.-मनीष पाठक, उपसरपंच, ग्राम पंचायत भरतपुर
84 ग्राम पंचायतों में करीब 6 हजार सांपों का रेस्क्यू
सर्प मित्र अमरदीप गुप्ता ने साल 2021 से लगातार वन्यजीव संरक्षण और सर्प रेस्क्यू का काम कर रहे हैं अब तक 84 ग्राम पंचायतों में करीब 6 हजार सांपों का रेस्क्यू कर चुके हैं.

भरतपुर के वनांचल क्षेत्र में कई प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं. इनमें कॉमन करैत, काला नाग, अहिराज, धामन और कैट स्नेक जैसी प्रजातियां है. इनमें कॉमन करैत बेहद जहरीला सांप है और इसके काटने की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता मिलना बेहद जरूरी है- अमरदीप गुप्ता, सर्पमित्र

धामन सबसे ज्यादा दिखने वाला सांप, लंबाई 7 से 8 फीट तक
अमरदीप बताते हैं कि भरतपुर क्षेत्र में धामन सांप भी अक्सर दिखाई देता है. यह सांप लंबाई में काफी बड़ा हो सकता है और कई बार इसकी लंबाई 7 से 8 फीट तक होती है. अहिराज बेहद विषैला सांप है और इसे स्थानीय स्तर पर सांपों का राजा भी कहा जाता है. वे कहते हैं कि वन्यजीवों को लेकर लोगों में डर के साथ-साथ कई तरह की गलत धारणाएं भी हैं. ऐसे में सुरक्षित रेस्क्यू और जागरूकता दोनों जरूरी हैं. अमरदीप का काम केवल सांपों के रेस्क्यू तक सीमित नहीं है. उनके अनुसार अब तक अजगर, गोह, बंदर और अन्य वन्यजीवों का भी सुरक्षित रेस्क्यू उन्होंने किया है.

सांप दिखे तो डर नहीं समझदारी जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में सांप दिखाई देने पर अक्सर लोग उसे मारने के लिए डंडे लेकर दौड़ पड़ते हैं. यही स्थिति कई बार इंसान और सांप दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है. सांप को छेड़ने या पकड़ने की कोशिश करने की बजाय उससे दूरी बनाए रखना सबसे सुरक्षित कदम है. बच्चों और पालतू जानवरों को भी तत्काल दूर करना चाहिए. स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यूकर्ता या संबंधित वन विभाग को सूचना देकर सांप को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कराया जा सकता है.


