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सांगानेर का ये समुदाय पुराने कपड़ों से बनाता है 'इको फ्रेंडली' कागज, 600 सालों से संभाल रहा विरासत

ये हैं कागजी समाज के लोग, जो पिछले 600 सालों से हस्तनिर्मित कागज बनाने की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. फिरोज सैफी की रिपोर्ट...

हस्तनिर्मित कागज बनाने की परंपरा
हस्तनिर्मित कागज बनाने की परंपरा (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 11, 2026 at 2:03 PM IST

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Updated : June 11, 2026 at 3:11 PM IST

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जयपुर : राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक सांगानेर कस्बे की गलियों में एक ऐसी विरासत अभी भी जीवित है, जो समय के थपेड़ों के बावजूद सदियों से अपनी पहचान बनाए हुए है. यह विरासत है हस्तनिर्मित कागज की, जिसने सांगानेर को पूरी दुनिया में अलग पहचान दिलाई. यहां कागजी समाज के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी उस कला को जीवित रखे हुए हैं, जिसकी शुरुआत करीब 600 साल पहले हुई थी.

यह केवल कागज बनाने का काम नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक शिल्प कौशल का एक ऐसा संगम है, जो आज भी दुनिया को चौंका देता है. जिस दौर में दुनिया पेड़ों की कटाई से बने कागज पर निर्भर है उस दौर में सांगानेर के कारीगर पुराने कपड़ों और वेस्ट मटेरियल से ऐसा मजबूत कागज तैयार कर रहे हैं, जिसकी उम्र सैकड़ों वर्षों तक मानी जाती है. सांगानेर कस्बे के कागदीवाडा मोहल्ले में करीब 5000 से ज्यादा परिवार हैं, जो हस्तनिर्मित कागज उद्योग से जुड़े हुए हैं और हर घर में इसका निर्माण होता है.

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फारसी भाषा का शब्द है कागज : कागज फारसी भाषा का शब्द है. सांगानेर में कागज का काम करने वाले परिवार कागजी कहलाते हैं. राजधानी जयपुर की किशनपोल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अमीन कागजी भी इसी परिवार से हैं. हस्तनिर्मित कागज बनाने का काम कर रहे इस्लाम कागजी का कहना है कि आज भी कागजी समाज की 9वीं पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है. बदलते दौर में तकनीक बदली, साधन बदले, लेकिन हस्तनिर्मित कार्यक्रम का मूल स्वरूप आज भी कायम है.

सांगानेर की 600 साल पुरानी विरासत
सांगानेर की 600 साल पुरानी विरासत (ETV Bharat GFX)

बाबर के साथ आए थे हिंदुस्तान : इस्लाम कागजी का कहना है कि उनके पूर्वज मुगल बादशाह बाबर के साथ हिंदुस्तान आए थे. उस समय बादशाह अपने साथ हथियार बनाने, कागज तैयार करने और अन्य सामान तैयार करने वाले कार्यक्रम को साथ लेकर चलते थे. उन्होंने बताया कि चार-पांच परिवारों को पहले वर्तमान पाकिस्तान के सियालकोट में बसाया गया था, फिर वहां से परिवार कश्मीर पहुंचा और उसके बाद फिर अलवर जिले के तिजारा में रहने लगा. इसके बाद महाराजा मानसिंह ने हस्तनिर्मित कागज तैयार करने वाले कारीगरों को ब्रह्मपुरी इलाके में बसाया था, लेकिन उसके बाद जब सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर नगर का निर्माण किया तब कागज बनाने वाले कार्यक्रमों को सांगानेर कस्बे में शिफ्ट कर दिया गया था. तब से ही यहां पर हैंडमेड कागज का निर्माण हो रहा है.

हस्तनिर्मित कागज तैयार करने वाला पुराने कपड़ों की कतरन
हस्तनिर्मित कागज तैयार करने वाला पुराने कपड़ों की कतरन (ETV Bharat Jaipur)

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पुराने कपड़ों से तैयार होता है हस्तनिर्मित कागज : इस्लाम कागजी का कहना है कि सांगानेर के हस्तनिर्मित कागज की सबसे बड़ी विशेषता यह है इसके निर्माण में किसी पेड़ को काटा नहीं जाता, बल्कि पुराने कपड़े, होजरी कटिंग, टेलरिंग और अन्य वेस्ट मटेरियल से हस्तनिर्मित कागज तैयार होता है. यानी जिस सामग्री को लोग बेकार समझ कर फेंक देते हैं वही सांगानेर के कारीगरों के हाथों में पहुंचकर एक नई पहचान हासिल कर लेती है. हस्तनिर्मित कागज पर्यावरण संरक्षण के लिए भी फ्रेंडली माना जाता है.

सांचों में लुगदी के पेस्ट को आकार देते कारीगर
सांचों में लुगदी के पेस्ट को आकार देते कारीगर (ETV Bharat Jaipur)

ऐसे तैयार होता है हैंडमेड कागज : हैंडमेड कागज बनने की प्रक्रिया अपने आप में बेहद रोचक है. सबसे पहले पुराने कपड़ों, होजरी और टेलर कटिंग की कतरन को एक बड़े हौद में घंटों भिगोया जाता है, जिससे यह रेशेदार लुगदी में बदल जाता है. इसके बाद लुगदी को पानी से भरे टैंकों में डाला जाता है, जहां कारीगर विशेष सांचों की सहायता से हाथों से कागज की चौकोर परत तैयार करते हैं. एक-एक परत को सावधानी से तैयार करके उसका बंडल बनाया जाता है और उसके बाद उसे प्रेस मशीन दबाकर अतिरिक्त पानी निकाला जाता है. फिर गीले कागज को कई दिनों तक धूप में प्राकृतिक तौर पर सुखाया जाता है. जब यह पूरी तरह से सूख जाता है तब इसे रोलर मशीन से गुजार कर इसकी सतह को चिकना और मुलायम बनाया जाता है.

ऐसे तैयार होते हैं कागज
ऐसे तैयार होते हैं कागज (ETV Bharat GFX)

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500 साल तक सुरक्षित रहने की क्षमता : इस्लाम कागजी का कहना है कि हस्तनिर्मित कागज की मजबूती ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है. इसमें किसी प्रकार के रासायनिक तत्वों का उपयोग नहीं किया जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता और आयु दोनों बढ़ जाती है. उनका कहना है कि प्राचीन पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेज और दुर्लभ अभिलेख हस्तनिर्मित कागज पर ही लिखे जाते थे. आज भी संग्रहालयों में यह कई सदियों से सुरक्षित रखे हुए हैं, जो उसकी मजबूती का प्रणाम है. कागजी का दावा किया कि हस्तनिर्मित कागज 400 से 500 साल तक सुरक्षित रह सकता है.

सूखने के बाद हरे कलर का तैयार कागज
सूखने के बाद हरे कलर का तैयार कागज (ETV Bharat Jaipur)

5000 से ज्यादा परिवारों का रोजगार : इस्लाम कागजी का कहना है कि पूरे सांगानेर क्षेत्र में 5000 से अधिक परिवार इस उद्योग से जुड़े हुए हैं. हस्तनिर्मित कागज के अलावा म्यूजिक लाउडस्पीकर पर लगने वाले कोन भी तैयार किए जाते हैं. कागजी समुदाय के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कागज उद्योग ही है. हस्तनिर्मित कागजों से बने उत्पादों की दुनिया भर में डिमांड है. सांगानेर में बनने वाला हस्तनिर्मित कागज अब केवल लिखने पढ़ने तक सीमित नहीं है. इससे आकर्षण हैंडबैग, गिफ्ट बॉक्स, फाइल कवर, लग्जरी डायरी, सजावटी वस्तु, फोटो फ्रेम और कई कलात्मक उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इसके अलावा क्रिसमस और अन्य त्योहारों के दौरान यहां के उत्पादों की मांग कई गुना बढ़ जाती है. बड़ी मात्रा में यहां तैयार होने वाले उत्पाद यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों में निर्यात किए जाते हैं.

कागज से बने आकर्षण हैंडबैग
कागज से बने आकर्षण हैंडबैग (ETV Bharat Jaipur)

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विरासत को नहीं छोड़ा : सांगानेर के कागजी समुदाय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये सदियों से अपनी विरासत को संजोए हुए हैं. उन्होंने अपनी विरासत को नहीं छोड़ा, आज जब दुनिया पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ उत्पादों की ओर लौट रही है तब सांगानेर का यह सदियों पुराना हुनर पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक नजर आता है. कागजी समाज की मेहनत और कला ने इस विरासत को न केवल जीवित रखा है, बल्कि उसे वैश्विक पहचान भलाई है. यही कारण है कि हस्तनिर्मित कागज की बात आते ही दुनिया भर की नजर आज भी सांगानेर की ओर उठ जाती है.

हस्तनिर्मित कागज से अलग-अलग कलाकृति तैयार करते हुए कारीगर
हस्तनिर्मित कागज से अलग-अलग कलाकृति तैयार करते हुए कारीगर (ETV Bharat Jaipur)
Last Updated : June 11, 2026 at 3:11 PM IST