राजस्थान में 104 जननी एक्सप्रेस की 600 एंबुलेंस ठप, 1200 कर्मचारी हुए बेरोजगार
एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन का दावा है कि टेंडर दिसंबर में ही खत्म हो गया था. अधिकारियों ने नए टेंडर करने में लापरवाही और देरी की.

Published : January 7, 2026 at 5:35 PM IST
जयपुर: राजस्थान में गर्भवती महिलाओं के लिए चलाई जा रही 104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस सेवा पूरी तरह ठप हो गई है. राजस्थान एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन ने दावा किया है कि सेवा बंद होने से प्रदेशभर की 600 एंबुलेंस बंद कर दी गई हैं और इनमें कार्यरत लगभग 1200 कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं. इस स्थिति के लिए एंबुलेंस कर्मचारी संगठन द्वारा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.
राजस्थान एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि 104 जननी एक्सप्रेस सेवा का संचालन करने वाली कंपनी मॉडर्न इमरजेंसी सर्विसेज का राज्य स्तरीय टेंडर 10 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो गया था. विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी पहले से होने के बावजूद समय रहते नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, जिसका खामियाजा प्रदेश की गर्भवती महिलाओं और एंबुलेंस कर्मचारियों को भुगतना पड़ा.
'अभी भी हो रहा संचालन': एनएचएम के एमडी डॉ अमित यादव का कहना है कि जिस सर्विस प्रोवाइडर को 104 एंबुलेंस चलाने का जिम्मा दिया गया था. उसका टेंडर दिसंबर में खत्म हो गया. नए टेंडर की प्रक्रिया चालू है और फिलहाल सीएचसी-पीएचसी, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज स्तर पर 104 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है.
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'टेंडर की प्रक्रिया लेट': शेखावत का दावा है कि 104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस सेवा का टेंडर दिसंबर 2020 में मॉडर्न इमरजेंसी सर्विसेज कंपनी को मिला था. अधिकारियों को ज्ञात था कि यह टेंडर दिसंबर 2025 में समाप्त होगा, नए टेंडर की प्रक्रिया छह महीने पहले शुरू होनी चाहिए थी. इसके बजाय 26 नवंबर, 2025 को प्रक्रिया शुरू की गई, जो अभी भी प्रक्रियाधीन है. टेंडर समाप्त होने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक ने 10 दिसंबर, 2025 को प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि 104 जननी एक्सप्रेस वाहनों को हैंडओवर-टेकओवर कर आरएमआरएस के माध्यम से संचालित किया जाए. हालांकि, एंबुलेंस संचालन को लेकर न तो कोई स्पष्ट नीति बनाई गई और न ही कर्मचारियों की भूमिका तय की गई.
'कर्मचारियों को घर भेजा': उनका दावा है कि नीति और दिशा-निर्देशों के अभाव में कंपनी ने हैंडओवर-टेकओवर की प्रक्रिया नहीं की. इसके बाद गत 2 जनवरी को परियोजना निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से कंपनी को चेतावनी पत्र जारी किया गया कि यदि हैंडओवर नहीं किया गया, तो बैंक गारंटी जब्त कर ली जाएगी. इसके दबाव में सभी 104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस का हैंडओवर तो कर दिया गया, लेकिन विभाग के पास सेवा संचालन के लिए कोई गाइडलाइन नहीं होने के कारण सभी एंबुलेंस खड़ी कर दी गई. जिसके चलते प्रदेश में 104 जननी एक्सप्रेस की 600 एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं. इनमें कार्यरत 1200 कर्मचारियों को घर भेज दिया गया है.

