लखनऊ कमिश्नरेट के 6 साल; महिला सुरक्षा में 20 प्रतिशत सुधार, डकैती पर लगा पूर्ण विराम
महानगर में भव्य समारोह का आयोजन, 150 पुलिसकर्मियों को मिला सम्मान.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 11, 2026 at 5:17 PM IST
लखनऊ: राजधानी लखनऊ में पुलिस की उपलब्धियों को लेकर बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि विगत सालों में प्रदेश में कानूनी व्यवस्था में कई स्तर तक सुधार हुआ है. इसी के साथ सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए शुरू की गई कमिश्नरेट प्रणाली ने आज अपने सफलतम 6 साल पूरे कर लिए हैं. इस अवसर पर रिजर्व पुलिस लाइन, महानगर में भव्य समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उनके साथ पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर और कई पूर्व पुलिस कमिश्नर व वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.
150 जांबाजों को सम्मान: समारोह के दौरान कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और साइबर अपराध नियंत्रण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 150 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. डीजीपी ने स्वयं 19 पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया. कार्यक्रम के अंत में पारंपरिक भोज का आयोजन हुआ, जिसमें अधिकारियों से लेकर सिपाहियों तक ने एक साथ भोजन कर आपसी सामंजस्य का संदेश दिया.

बीते 6 साल की शानदार रिपोर्ट कार्ड: 13 जनवरी 2020 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथो लागू की गई इस प्रणाली के बाद लखनऊ की सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं. साल 2025 में लखनऊ जनपद में डकैती की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई, जो पुलिस की सक्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है. सेफ सिटी और मिशन शक्ति के प्रभावी क्रियान्वयन से महिला संबंधी अपराधों में 20 प्रतिशत की कमी आई है. प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क और एक समर्पित साइबर क्राइम थाने के जरिए तकनीक आधारित अपराधों पर लगाम लगाई गई है. 6 नए थानों के भवन, 700 महिला आरक्षियों के लिए हॉस्टल और आधुनिक बैरकों का निर्माण कर पुलिस कल्याण को प्राथमिकता दी गई है.
महिला संबंधी अपराधों में 20% की कमी- पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने (2020) के बाद से सेफ सिटी परियोजना और मिशन शक्ति के तहत महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई.
- कमी का मुख्य कारण: पिंक बूथों (99 क्रियाशील), 1090 हेल्पलाइन और थानों में महिला हेल्प डेस्क की सक्रियता से अपराधों को रोकने और अपराधियों को त्वरित सजा दिलाने (Operation Conviction) में सफलता मिली.
- साल 2025 में महिला एवं अल्पवयस्क संबंधी अपराधों में 139 अपराधियों को सजा सुनाई गई, जिसमें 1 को मृत्युदंड और 46 को आजीवन कारावास की सजा मिली.
- यूपी-112 द्वारा महिलाओं से संबंधित 80,700 से अधिक शिकायतों पर औसतन 8 मिनट के रिस्पांस टाइम के साथ सहायता पहुंचाई गई.

2024 बनाम 2025 अपराधों में तुलना-
- साल 2025 में लखनऊ जनपद में डकैती की एक भी घटना नहीं हुई.
- पिंक बूथों और सेफ सिटी प्रोजेक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में 20% की बड़ी गिरावट आई है.
- पुलिस मुठभेड़ों की संख्या में लगभग दो गुनी वृद्धि (25 से बढ़कर 48) ये दर्शाती है कि पुलिस अब अपराधियों के खिलाफ एक्शन ले रही है.
- 829 अपराधियों को सजा दिलवाना ये साबित करता है कि पुलिस केवल अपराधियों को पकड़ ही नहीं रही, बल्कि कोर्ट में मजबूत पैरवी के जरिए उन्हें अंजाम तक भी पहुंचा रही है.
DGP का मंत्र, स्मार्ट और संवेदनशील पुलिसिंग: डीजीपी राजीव कृष्ण ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक केवल एक साधन है, पुलिस की असली सफलता आम नागरिक को मिलने वाले शीघ्र न्याय और राहत में है. उन्होंने निर्देश दिए कि उप-निरीक्षकों को आईटी एक्ट और साइबर ठगी रोकने के लिए विशेष तकनीकी ट्रेनिंग दी जाए. अफवाहों के त्वरित खंडन के लिए डिजिटल सतर्कता को और मजबूत किया जाए. पुलिस का अंतिम लक्ष्य सुरक्षा, सेवा और सुशासन होना चाहिए.
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