उत्तराखंड में आफतवाली बारिश! 54 सड़कें बंद, चमोली और पिथौरागढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित
उत्तराखंड में बारिश के बाद 54 सड़कें बंद, चमोली और पिथौरागढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित:

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 29, 2026 at 6:50 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की बारिश का दौर जारी है. कई जिलों में भारी बारिश के बीच पहाड़ों में सड़कें बंद हैं. नदियां और बैराजों का जलस्तर बढ़ा हुआ है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट जारी किया है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की 29 अगस्त की सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल से अब तक प्राकृतिक आपदाओं में 45 लोगों की मौत, 46 लोग घायल और 55 लोग लापता बताए गए हैं. वहीं प्रदेश में 54 सड़कें अभी भी यातायात के लिए बंद हैं.
देहरादून और पिथौरागढ़ में सबसे ज्यादा बारिश का असर: देहरादून और पिथौरागढ़ में पिछले दौर की बारिश ने खासा जोर दिखाया है. देहरादून के सहस्रधारा में 91 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. मालदेवता में 82, कालसी में 75, माजरी/मौके के अन्य वर्षामापी केंद्रों में करीब 59 मिलीमीटर और विकासनगर में 5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई. पिथौरागढ़ में बंगापानी में 77 मिलीमीटर, डीडीहाट में 40.6, थल में 24, तेजम में 16 और धारचूला में 14.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई.
बारिश का असर दूसरे पर्वतीय जिलों में भी दिखा. पौड़ी के कोटद्वार में 28 और यमकेश्वर में 25 मिलीमीटर बारिश हुई. चमोली के गोपेश्वर में 21 मिलीमीटर, नंदानगर में 14 मिलीमीटर, जबकि रुद्रप्रयाग के जखोली में 3 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई. बागेश्वर में कपकोट में 7 और बागेश्वर में 6 मिलीमीटर, जबकि नैनीताल में हल्द्वानी में 30 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई. ऊधमसिंह नगर में रुद्रपुर और काशीपुर में 4-4 मिलीमीटर बारिश हुई.
54 सड़कें बंद, चमोली और पिथौरागढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित: बारिश के साथ नदियों के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है. उत्तरकाशी में भागीरथी नदी का जलस्तर सुबह 8 बजे 1119.45 मीटर था, जबकि चेतावनी स्तर 1122 और खतरे का स्तर 1123 मीटर निर्धारित है. यानी नदी खतरे के निशान से करीब 3.55 मीटर नीचे थी. चमोली में अलकनंदा 951.10 मीटर, नंदाकिनी 867.74 और पिंडर 768.96 मीटर पर दर्ज हुईं. हरिद्वार में गंगा का जलस्तर 291.60 मीटर रहा, जबकि खतरे का स्तर 294 मीटर है. यानी नदी खतरे के निशान से 2.40 मीटर नीचे थी. पिथौरागढ़ में काली नदी का जलस्तर खतरे के स्तर से महज 1.40 मीटर नीचे दर्ज हुआ. वहीं बागेश्वर में सरयू नदी 866.45 मीटर पर थी. खतरे के स्तर से 4.25 मीटर नीचे रही.
बारिश के चलते प्रदेश में कुल 54 सड़कें बंद हैं. इनमें तीन स्टेट हाईवे, एक बीआरओ मार्ग, 12 लोक निर्माण विभाग की सड़कें और 38 पीएमजीएसवाई/ग्रामीण सड़कें शामिल हैं. चमोली में सबसे ज्यादा 16 सड़कें बंद हैं. पिथौरागढ़ में 9, रुद्रप्रयाग में 8 और बागेश्वर में 7 सड़कें यातायात के लिए अवरुद्ध हैं. देहरादून में 5, टिहरी में 3 और उत्तरकाशी में 2 सड़कें बंद बताई गई हैं. संबंधित विभागों की ओर से इन्हें खोलने का काम जारी है. चमोली में जोशीमठ-मलारी-नीती राष्ट्रीय राजमार्ग को बीआरओ और जिला प्रशासन के प्रयास से फिलहाल 10 टन तक के वाहनों के लिए अस्थायी रूप से खोल दिया गया है. दूसरी ओर टिहरी में एक स्टेट हाईवे और दो ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हैं, जबकि रुद्रप्रयाग में आठ ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध हैं.
हादसों में मौत और घायल, कई लोगों का रेस्क्यू: बारिश के बीच सड़क हादसों ने भी चिंता बढ़ाई है. टिहरी के नरेंद्रनगर क्षेत्र में 28 अगस्त की रात एक प्राइवेट बस दुर्घटनाग्रस्त हुई. जिसमें दो लोगों की मौत हो गई. बस में करीब 55 लोग सवार थे. सात लोगों को सामान्य चोटें आईं, पांच गंभीर घायल हुए, जबकि 43 यात्रियों को सुरक्षित बताया गया. गंभीर और सामान्य घायलों को उपचार के लिए ऋषिकेश भेजा गया. देहरादून में भी चकराता क्षेत्र में एक वाहन दुर्घटना में पांच लोग घायल हुए. जिनमें एक की हालत गंभीर बताई गई.
राज्य की 1 अप्रैल से अब तक की प्राकृतिक आपदा रिपोर्ट भी नुकसान की तस्वीर बताती है. चमोली में 16 मौतें और 13 घायल, पिथौरागढ़ में 7 मौतें, रुद्रप्रयाग में 4 मौतें और 7 घायल, जबकि टिहरी में एक मौत और पांच लोग घायल बताए गए हैं. इस अवधि में प्राकृतिक आपदाओं से 789 बड़े पशु और 1216 छोटे पशु प्रभावित हुए हैं. 68 मकानों को गंभीर, 23 को पूर्ण और 40 को ध्वस्त श्रेणी में नुकसान दर्ज किया गया है.
अगले कई दिन बारिश से राहत के आसार कम: मौसम विभाग ने 29 अगस्त को पूरे प्रदेश में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछार का अनुमान जताया है. बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश तथा आकाशीय बिजली के साथ बेहद तीव्र बारिश का खतरा है. देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में भी कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है.
30 अगस्त को 10 जिलों में भारी बारिश का अनुमान है. 31 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर, चमोली और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. एक सितंबर को देहरादून और टिहरी में फिर भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी है. मौसम विभाग मुताबिक 4 सितंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रह सकता है. हालांकि, 29 अगस्त की सुबह जारी फ्लैश फ्लड रिस्क बुलेटिन में उत्तराखंड के लिए फिलहाल ‘एरिया ऑफ कंसर्न’ शून्य बताया गया है. इसके बावजूद मौसम विभाग ने भूस्खलन, सड़क अवरोध, नालों के उफान और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने और संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है.

