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बटुकों ने धारण किया यज्ञोपवीत, अग्नि के समक्ष लिया सदाचार और नशामुक्त जीवन का संकल्प

जयपुर के प्राचीन नहर स्थित गणेशजी मंदिर में आयोजन. पवित्र अग्नि के साक्षी 51 बटुकों ने जनेऊ धारण कर आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की.

The sacred thread ceremony of the young initiates (Batuks)
बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : July 1, 2026 at 8:09 PM IST

3 Min Read
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जयपुर: सनातन संस्कृति के 16 संस्कारों में प्रमुख माने जाने वाले यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार का सामूहिक आयोजन बुधवार को जयपुर के प्राचीन नहर स्थित गणेशजी मंदिर में किया गया. वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ की पवित्र अग्नि के साक्षी 51 बटुकों ने जनेऊ धारण कर आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की. उन्हें सदाचार, अनुशासन, माता-पिता और गुरु की सेवा, नशामुक्त जीवन तथा सनातन परंपराओं के पालन का संकल्प भी दिलाया गया.

मुंडन से लेकर जनेऊ धारण तक: उपनयन संस्कार केवल जनेऊ धारण करने की रस्म नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन को संस्कारित करने की प्रक्रिया है. यज्ञाचार्य योगेश पारीक ने बताया कि संस्कार की शुरुआत बटुकों के मुंडन से हुई. इसके बाद दशविध स्नान कराया गया. इसमें गाय का दूध, घी, दही, गोमूत्र, गोमय, पवित्र मिट्टी, भस्म, कुश, खस, हल्दी और शहद का उपयोग किया गया. इसके बाद प्रायश्चित हवन और ग्रह शांति यज्ञ कराया गया, ताकि जीवन में अब तक ज्ञात-अज्ञात रूप से हुए दोषों का प्रायश्चित हो और आगे का जीवन सत्कर्मों के मार्ग पर आगे बढ़े. अंत में नहर के गणेश जी मंदिर महंत जय शर्मा और युवाचार्य मानव शर्मा के सानिध्य में बटुकों को जनेऊ धारण कराकर भिक्षाटन की परंपरा भी निभाई गई.

बटुकों ने धारण किया यज्ञोपवीत, सुनिए... (ETV Bharat Jaipur)

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उपनयन देता है अनुशासन और संस्कारों का संदेश : यज्ञाचार्य ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार ब्राह्मण बालक का आठ वर्ष की आयु के बाद उपनयन संस्कार हो जाना चाहिए. किशोरावस्था में प्रवेश करने से पहले यर संस्कार बालक को सही और गलत का बोध कराता है. अग्नि के समक्ष उसे यह शपथ दिलाई जाती है कि वो किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन से दूर रहेगा. अनुचित भोजन और गलत संगति से बचेगा. त्रिकाल संध्या, पूजा-पाठ, माता-पिता-गुरु की सेवा और सदाचारपूर्ण जीवन का पालन करेगा. ये संस्कार आत्मनिर्भरता और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है.

बचपन में संस्कार नहीं हुआ तो युवाओं को भी मिला अवसर : वेद स्वाध्याय पीठ के संरक्षक महेश शर्मा ने बताया, प्राचीन नहर के गणेशजी मंदिर में इस सामूहिक संस्कार में उन युवाओं का भी यज्ञोपवीत कराया गया. इनका किसी कारणवश बचपन में ये संस्कार नहीं हो सका था. वैदिक परंपरा में उपनयन संस्कार के बाद व्यक्ति विधिवत पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने का अधिकारी माना जाता है. उन्होंने इसकी तुलना ड्राइविंग लाइसेंस से करते हुए कहा कि जैसे वाहन चलाने के लिए लाइसेंस आवश्यक होता है. उसी प्रकार वैदिक विधि से पूजा-अर्चना के लिए यज्ञोपवीत संस्कार का विशेष महत्व है.

Sanatan culture comes to life at the Nahar Ganesh Temple
नहर के गणेश जी मंदिर में साकार हुई सनातन संस्कृति (ETV Bharat Jaipur)

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वैदिक मंत्रों से भक्तिमय बना मंदिर परिसर : आयोजन के दौरान मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों से भक्तिमय बना रहा. बड़ी संख्या में अभिभावक, श्रद्धालु और धर्मप्रेमी इस सामूहिक उपनयन संस्कार के साक्षी बने. उन्होंने बटुकों को उज्ज्वल और संस्कारित जीवन के लिए आशीर्वाद दिया.

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