Cyber Crime : WhatsApp Group से 500 करोड़ का साइबर फ्रॉड, मुख्य सरगना पुणे से गिरफ्तार
वाट्सएप ग्रुप '105 IND STOCK ADV' के जरिए लोगों को निवेश के बहाने बनाया शिकार.

Published : July 5, 2026 at 6:57 PM IST
जयपुर: राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर देशव्यापी ठगी करने वाले बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस 500 करोड़ रुपए के साइबर घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड को महाराष्ट्र के पुणे शहर से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की. आरोपी लोन देने के बहाने फर्जी कंपनियां बनाकर लोगों के दस्तावेज हड़पता था. फिर उनके नाम पर म्यूल बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम को ठिकाने लगाता था.
16 लाख की ठगी की जांच, हुआ बड़ा खुलासा: एडीजी (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने बताया कि सिंडिकेट के मास्टरमाइंड युवराज सतीश मुदलियार (35) को पुणे से गिरफ्तार किया है. उसे ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया. उसके वॉलेट और बैंक खाते फ्रीज करवाए गए हैं. एडीजी सिंह ने बताया- स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पर परिवादी (सेंधाराम चौधरी) ने 16 लाख रुपए की साइबर धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी.
पीड़ित ने बताया था कि उसे '105 IND STOCKS ADV' नाम के वाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां निवेश और ट्रेडिंग से मोटा मुनाफा कमाने का लालच और झूठा आश्वासन देकर ठगी की गई. पुलिस की तकनीकी टीम ने चैट और डाटा का विश्लेषण किया तो खुलासा हुआ कि इस ग्रुप के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों से करीब 500 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी की गई है.
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ऐसे देते है करोड़ों की ठगी को अंजाम: सिंह ने बताया कि इस शातिर गिरोह की कार्यप्रणाली योजनाबद्ध थी. साइबर अपराधी सोशल मीडिया और वाट्सएप ग्रुप के जरिए आम लोगों को घर बैठे ट्रेडिंग से मोटा मुनाफा कमाने के मैसेज भेजते थे. शुरू में भरोसा जीतने के लिए निवेश के बदले मुनाफे की छोटी रकम पीड़ित के बैंक खाते में ट्रांसफर भी करते थे. जब पीड़ित को पूरा भरोसा हो जाता तो वह लालच में आकर अपनी जमा-पूंजी और मोटी रकम का निवेश कर देता. जैसे ही बड़ा फंड अपराधियों के फर्जी खातों में ट्रांसफर होता. साइबर ठग पीड़ित को वाट्सएप ग्रुप से रिमूव कर देते और ग्रुप को डिलीट कर गायब हो जाते.
बैंक खातों और वाट्सएप ग्रुप का किया विश्लेषण: उन्होंने बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन और एसपी सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर की विशेष टीम का गठन किया गया. टीम ने अपराधियों के इस्तेमाल किए दर्जनों बैंक खातों, वाट्सएप ग्रुप के डेटा और मोबाइल नंबरों का गहन तकनीकी विश्लेषण किया. इसके बाद टीम ने जाल बिछाकर पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड युवराज सतीश मुदलियार (35) निवासी लोहगांव, पुणे सिटी (महाराष्ट्र) को पुणे से गिरफ्तार कर लिया. उसे ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया है.
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हवाला-क्रिप्टो के जरिए खपाता ठगी की रकम: मुख्य आरोपी युवराज सतीश ने पूछताछ में बताया कि वह पुणे में ग्रेस फाइनेंस, पॉजिटिव बैलेंस और गुरु फाइनेंस नाम से फर्जी कंपनियां चलाता था. लोन पास करवाने के नाम पर वह लोगों से उनके दस्तावेज लेता. इन्हीं दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर वह उनके नाम पर म्यूल बैंक खाते खुलवाता और खाताधारकों को इसके बदले 10 हजार रुपए का कमीशन देता. इन खातों में आने वाली ठगी की करोड़ों की रकम को वह एटीएम से निकालता और हवाला नेटवर्क के जरिए अपने बिनांस वॉलेट (Binance Wallet) में क्रिप्टो करेंसी (USDT) खरीदकर विदेशों में बेच देता था. इसके बदले उसे सीधा 5 प्रतिशत कमीशन मिलता था.
वॉलेट और बैंक खाते फ्रीज, साथियों की तलाश: इस कार्रवाई को स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के थानाधिकारी व पुलिस उपाधीक्षक गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने अंजाम दिया. टीम में पुलिस निरीक्षक हरिराम, उप निरीक्षक अजय कुमार, कांस्टेबल भींवाराम, सुभाष चाहर और चालक कांस्टेबल सुबेसिंह की विशेष भूमिका रही. पुलिस अब आरोपी के बिनांस वॉलेट और बैंक खातों को फ्रीज करवा गिरोह से जुड़े अन्य गुर्गों की तलाश में जुटी है. आरोपी से पूछताछ में कई अहम खुलासे होने की संभावना है.
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