दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई होगी और आसान, झारखंड में 400 रिसोर्स शिक्षकों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
झारखंड में दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई को सरल बनाने के लिए 400 रिसोर्स शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी. चंदन भट्टाचार्य की रिपोर्ट.

Published : September 1, 2026 at 3:53 PM IST
रांची: झारखंड में विशेष जरूरत वाले बच्चों को स्कूल से जोड़ने और उनकी पढ़ाई को बेहतर बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है. बौद्धिक और विकासात्मक दिव्यांगता वाले बच्चों को उनकी क्षमता और जरूरत के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए राज्य के करीब 400 रिसोर्स शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण के बाद ये शिक्षक स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए अधिक प्रभावी शिक्षण व्यवस्था तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
इस पहल को ‘दिशा’ पाठ्यक्रम के तहत संचालित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य केवल दिव्यांग बच्चों को सामान्य कक्षा में शामिल करना नहीं, बल्कि उनकी सीखने की क्षमता को समझते हुए पढ़ाई का तरीका विकसित करना है. इसके लिए शिक्षकों को बच्चों की व्यक्तिगत जरूरत, सीखने की गति और व्यवहार के अनुरूप शिक्षण तकनीकों की जानकारी दी जा रही है.
शिक्षकों को दी जाएगी ट्रेनिंग
शिक्षा विभाग की योजना के तहत प्रशिक्षण को अलग-अलग चरणों में पूरा किया जा रहा है. यह आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित चरणों में आयोजित होगा. प्रत्येक चरण में रिसोर्स शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे स्कूल लौटने के बाद सीखी गई तकनीकों को सीधे बच्चों की पढ़ाई में लागू कर सकें. प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक तरीके से भी प्रशिक्षित किया जा रहा है.
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन के अनुसार, प्रशिक्षण के माध्यम से रिसोर्स शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. इससे शिक्षक दिव्यांग बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे और कक्षा में उनके लिए अनुकूल माहौल तैयार कर पाएंगे. समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने में रिसोर्स शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे बच्चों और स्कूलों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम भी करते हैं.
प्रशिक्षण में ये संस्थान करेंगे सहयोग
इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी), सीआरसी, जेईपीसी और यूनिसेफ झारखंड के संयुक्त सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है. ‘दिशा’ मॉडल को देश के कई राज्यों में लागू किया जा चुका है. वहां मिले अनुभवों के आधार पर झारखंड में भी इसे लागू करने की तैयारी की गई है.
शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद रिसोर्स शिक्षकों को बच्चों की वास्तविक जरूरत के अनुसार शिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी. स्कूल में नामांकित दिव्यांग बच्चों की संख्या के आधार पर विशेष शिक्षण सामग्री और वर्कशीट मुहैया कराने की योजना है. इसका मकसद यह है कि प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक बच्चों के साथ नियमित कक्षा गतिविधियों में इन सामग्रियों का इस्तेमाल कर सकें.
दरअसल, विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए एक जैसी शिक्षण पद्धति हमेशा प्रभावी नहीं होती. कई बच्चों को किसी विषय को समझने के लिए अतिरिक्त समय, अलग तरह की गतिविधियों या विशेष शिक्षण सामग्री की जरूरत होती है. ऐसे में प्रशिक्षित रिसोर्स शिक्षक बच्चों की क्षमता के अनुसार पढ़ाई की रणनीति तैयार करने में मदद करेंगे.
शिक्षा विभाग की सराहनीय पहल
शिक्षा विभाग की इस पहल से राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे विशेष जरूरत वाले बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है. प्रशिक्षण के जरिए शिक्षकों को अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक तरीके से काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि दिव्यांग बच्चे भी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सकें और शिक्षा व्यवस्था में उनकी भागीदारी और मजबूत हो.
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