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2 हजार की रिश्वत के चक्कर में काटनी होगी 4 साल की जेल, जबलपुर में कॉन्स्टेबल को ये हरकत पड़ी भारी

शाहपुरा में पदस्थ आरोपी कॉन्स्टेबल की बेल बॉन्ड की खारिज, ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट ने बताया सही, 4 साल की सजा बरकरार

4 Year Imprisonment for 2K Rupees
2 हजार की रिश्वत के चक्कर में काटनी होगी 4 साल की जेल (Getty Images)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 5, 2026 at 9:25 AM IST

3 Min Read
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जबलपुर : शहपुरा थाने में पदस्थ आरक्षक विवेक साहू को दो हजार रु की रिश्वत के लिए 4 साल की सजा काटनी होगी. आरोपी कॉन्स्टेबल ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मिली ट्रायल कोर्ट की सजा को हाईकोर्ट में चैलेंज किया था. लेकिन हाईकोर्ट ने रिश्वत लेने के आरोप में मिली सजा को सही ठहराया. ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को हाईकोर्ट ने उचित ठहराते हुए आरोपी कॉन्स्टेबल का बेल बॉन्ड निरस्त कर दिया, जिसके बाद उसे 4 साल जेल काटनी होगी.

गिरफ्तारी की धमकी देकर ली थी रिश्वत

हाईकोर्ट जस्टिस राजेन्द्र कुमार वाणी ने इस मामले में याचिका की सुनवाई की. आरोपी कॉन्स्टेबल विवेक साहू की ओर से दायर की गई अपील मेें कहा गया था कि वह जबलपुर के शाहपुरा थाने में पुलिस आरक्षक के पद पर पदस्थ था और उसे रिश्वत मामले में ट्रायल कोर्ट ने 4 साल की सजा दी है. ये देवी सिंह चेक बाउंस मामला था, जिसमें गैर जमानती वारंट जारी किए गए थे. आरोप थे कि बाद में कॉन्स्टेबल विवेक साहू ने गैर जमानती वारंट निरस्त होने और देवी सिंह को जमानत का लाभ मिलने के बाद उसे गिरफ्तारी की धमकी देकर रिश्वत मांगी थी.

JABALPUR BRIBE 4 YEARS JAIL
ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट ने बताया सही (Etv Bharat)

2 हजार लेते लोकायुक्त ने पकड़ा था

मामले में सामने आया कि आरक्षक विवेक साहू ने ड्यूटी के दौरान न्यायालय से जारी गैर जमानती वारंट की तामीली न करते हुए उल्टा देवी सिंह को धमकी देकर रिश्वत मांगी थी. अभियोजन ने हाईकोर्ट के बताया कि विवेक साहू ने देवी सिंह से रिश्वत मांगी थी, जिसके बाद पीड़ित ने इसकी शिकायत लोकायुक्त में की थी. लोकायुक्त ने इसके बाद शहपुरा थाने में पदस्थ रहे आरक्षक विवेक साहू को दो हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था. ट्रायल कोर्ट ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए उसे दोषी करार देते हुए चार साल की सजा से दंडित किया था, जिसके बाद आरक्षक ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चैलेंज किया.

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ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार, जेल में काटने होंगे 4 साल

एकलपीठ ने इसी मामले की सुनवाई के बाद गवाहो व साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आरक्षक को दोषी करार देते हुए सजा से दंडित करने में कोई गलती नहीं की है. एकलपीठ ने अपील को खारिज कर हुए बेल बॉन्ड निरस्त कर अपीलकर्ता को वापस जेल भेजने के आदेश जारी किए हैं.