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काग़ज़ों में हुए क़त्ल, पर क़ातिल कोई नहीं: मुज़फ़्फ़रनगर दंगों में 37 आरोपियों की रिहाई ने खड़े किए कई सवाल

2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में 8 लोगों की हत्या के मामले में सबूतों के अभाव में 37 लोगों को कोर्ट ने बरी कर दिया.

Muzaffarnagar Riots
यूपी के मुजफ्फरनगर दंगों में 8 की हत्या मामले में 37 लोग दोष मुक्त. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 26, 2026 at 10:32 AM IST

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Updated : February 26, 2026 at 10:42 AM IST

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मुजफ्फरनगर: यूपी के मुजफ्फरनगर में मंगलवार को साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान 8 लोगों की हत्या के मामले में सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए कोर्ट ने 37 लोगों को बरी कर दिया.

बता दें कि मुजफ्फरनगर में इमरान नाम के एक व्यक्ति ने 110 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और अपनी शिकायत में इमरान ने दावा किया था कि 8 सितंबर, 2013 को कुत्बा गांव में धारदार हथियारों से लैस भीड़ ने मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के घरों पर हमला किया था. साथ ही इसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इस घटना के दौरान कई घरों में आग लगा दी गई थी और संपत्तियों को लूटा गया था.

इसके बाद सितंबर 2013 में मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी. इसको लेकर आरोप था कि सुरेश राणा, पार्टी के पूर्व विधायक संगीत सोम और पूर्व सांसद भरतेंद्र सिंह समेत भाजपा नेताओं ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए थे. इस भाषण के बाद बाद हुए दंगों में कम से कम 60 लोग मारे गए और हजारों मुस्लिम परिवार विस्थापित हो गए थे.

इस कांड में मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार की भी कई घटनाएं सामने आईं थीं.

वहीं हमलावरों ने मस्जिद में तोड़फोड़, घरों में आगजनी, मोटरसाइकिलों में आग, दुकानों में आग, जेनरेटर में आग लगा दी थी. िस मामले में एसआईटी ने विवेचना के बाद 45 लोगों को आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दाखिल की थी. इस मामले में अलग-अलग मुकदमों की एक साथ सुनवाई हुई थी.

बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजय सहरावत ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक में हुई. इसमें साक्ष्य के अभाव में 37 आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया गया. इस केस में अभियोजन की ओर से 30 से अधिक गवाह पेश किए गए.

गौर करें तो आठ सितंबर 2013 को हुए दंगे में गांव कुटबा में 8 लोगों की हत्या हुई. इसमें वहीद, शमशाद, इरशाद, तराबू, कय्यूम, फैयाज, खातून, मोमीन मारे गए.

वहीं कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में कुंवरपाल, योगेंद्र उर्फ जोगेंद्र, मनोज, गुल्लू, सोनू, भालू, नीरज, लव कुमार, शौकी, बुरेश, प्रदीप, कालू, पप्पू, नीटू, पप्पू, नीटू पुत्र ब्रह्मपाल, गुड्डू, नरेन्द्र, जितेन्द्र, भीम, राम सिंह, देस्सा, छोटू, जूली, दीपक, कल्लू उर्फ मदन, सोमपाल, नरेन्द्र, खजान, विकास, टुल्ली उर्फ कल्लू, धीरज, पिंटू उर्फ बिंदू, मनोज, राहुल, बिजेन्द्र को दोषमुक्त कर दिया.

इसमें अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, विशेष पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-प्रथम की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया ने फैसला सुनाया.

बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजय सहरावत ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोट संख्या प्रथम में हुई. साक्ष्य के अभाव में 37 आरोपीयों को दोष मुक्त कर दिया गया. अभियोजन की ओर से 37 से अधिक गवाह पेश किए गए. अधिवक्ता ने बताया कि हत्या के मामले में सरकार चाहे तो, हाईकोर्ट में अपील कर सकती है.

गांव कुटबा के लोग नहीं भूल पाएंगे वह दिन

गौर करें तो शाहपुर थाना क्षेत्र के 8 सितंबर 2013 की सुबह करीब 9:30 बजे हमलावरों ने मुस्लिम समाज के घरों पर हमला बोल दिया था. नारेबाजी व धारदार हथियार और लाठी-डंडों के साथ फायरिंग और आगजनी घटना को अंजाम दिया गया था.

इस दौरान पुलिस लाचार नजर आ रही थी. इस मामले में आरोपियों की 13 साल बाद भी पहचान नहीं हो सकी. हत्या, बलवा और आगजनी के मुकदमे दर्ज हुए थे.

कोर्ट ने कहाकि संपूर्ण साक्ष्य के विश्लेषण साथियों के पक्ष द्रोही होने अभियुक्त गण की पहचान स्थापित न होने के करण अभियोजन पक्ष में व्याप्त विसंगतियों के दृष्टिगत अभियोजन पक्ष अभियुक्त गण के विरुद्ध लगाए गए आरोपी को संदेह से प्रेषित करने में पूर्णतया विफल रहा है.

अदालत ने फैसले में लिखा कि साक्ष्य के अभाव और अभियोजन कथानक में मौजूद मूलभूत कमियां अभियुक्त गण के दोष मुक्त किए जाने का पर्याप्त आधार प्रदान करती है. आरोपियों पर लगाए गए दोष मुक्त किए जाने योग्य हैं.

दोष मुक्त होने में सुनवाई के दौरान एक रूलिंग दाखिल की गई. रूलिंग थी रमेश हरिजन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, धनंजय रेड्डी प्रति स्टेट ऑफ कर्नाटक, लाल राम बनाम उत्तर प्रदेश 2018 गोविंद राजू उर्फ गोविंद बनाम स्टेट की रूलिंग.

साल 2013 के दंगे की 176 पत्रावलियों पर फैसला, बाकी दंगे की सबसे बड़ी घटना में शामिल कुटबा और मोहम्मद राय सिंह गांव के मामलों में फैसला इसी महीने आ चुका है. वहीं वर्तमान में दंगे की 176 फाइल अदालत में विचाराधीन है. इसके अलावा 2013 के दंगे में कव्वाल कांड की वादी सलीम की भी मौत हो चुकी है.

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Last Updated : February 26, 2026 at 10:42 AM IST