हिमाचल के इस जिले में 3 प्राइवेट स्कूलों पर लटके ताले, वजह कर देगी हैरान
हिमाचल में सरकारी स्कूलों के बाद अब निजी स्कूलों पर भी ताले लगने लगे हैं, प्रारंभिक शिक्षा ने बंद किए 3 निजी स्कूल.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : May 15, 2026 at 2:28 PM IST
हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ समय से स्कूलों पर ताले लग रहे हैं. खासकर ये ताले सरकारी स्कूलों पर लटकते हैं, लेकिन अब ये सिलसिला निजी स्कूलों तक भी पहुंच गया है. ताजा मामला शिक्षा का हब कहे जाने वाले हमीरपुर जिले का है. हमीरपुर जिले में स्कूलों के बंद होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. यहां सरकारी स्कूलों के बाद अब निजी स्कूलों पर भी ताला लग गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई है.
इन तीन निजी स्कूलों पर लटका ताला
हमीरपुर जिले में पहले सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या के कारण स्कूलों पर ताले लगने लगे थे और अब इसका असर निजी शिक्षण संस्थानों पर भी दिखने लगा है. ताजा मामले में हमीरपुर जिले के 3 निजी स्कूलों को बंद करना पड़ा है, जिसका सबसे बड़ा कारण छात्रों की कमी रहा है. प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक हमीरपुर कमल किशोर भारती ने बताया कि नादौन, बमसन और हमीरपुर क्षेत्र में स्थित एक-एक निजी स्कूल को इस शैक्षणिक सत्र से बंद कर दिया गया है. इन स्कूलों के प्रबंधकों ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर स्कूल चलाने में असमर्थता जताई है. उनका कहना है कि बीते कुछ सालों से छात्रों की संख्या लगातार घटती जा रही थी, जिसके कारण स्कूल संचालन आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया था.
"नादौन, बमसन और हमीरपुर क्षेत्र के तीन निजी स्कूलों को इस सत्र से बंद कर दिया गया है, क्योंकि प्रबंधन ने खुद ही स्कूल चलाने में असमर्थता जताई थी. शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि जो स्कूल बंद हुए हैं, वहां के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें नजदीकी स्कूलों में समायोजित किया जा रहा है." - कमल किशोर भारती, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग हमीरपुर
इन स्कूलों को किया गया बंद
प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक हमीरपुर कमल किशोर भारती ने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने भी नादौन उपमंडल के गांव ग्वालपत्थर स्थित एएसएसडी पब्लिक स्कूल की मान्यता इस शैक्षणिक सत्र की समाप्ति, यानी 31 मार्च को ही रद्द कर दी थी. इस स्कूल में पढ़ रहे विद्यार्थियों को नजदीकी स्कूलों में मर्ज कर दिया गया है, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो. इसके अलावा ग्रीन पब्लिक मिडिल स्कूल बराड़ा और जिला मुख्यालय के साथ लगते एक निजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल को भी कम छात्र संख्या के चलते इस बंद करना पड़ा है.
छात्रों की घटती संख्या बनी चुनौती
वहीं, हमीरपुर जिले में लगातार घटती छात्र संख्या ने सरकारी और निजी दोनों ही स्कूलों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. एक ओर जहां सरकारी स्कूलों में नामांकन घट रहा है, वहीं निजी स्कूलों में भी विद्यार्थियों की कमी से प्रबंधन पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है. इससे स्कूलों को बंद करने जैसी नौबत आ रही है, जो शिक्षा के क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है. गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में नामांकन घटने का मुख्य कारण छात्रों का निजी स्कूलों में जाना माना जाता है, लेकिन अब निजी स्कूल भी छात्रों की कमी के चलते बंद हो रहे हैं, जो कि चिंता का विषय है.
"जिले में निजी शिक्षण संस्थानों पर नजर रखी जा रही है. अगर कोई भी संस्था आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किए बिना स्कूल संचालित करती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा लगातार घटती छात्र संख्या शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकेत है, जिस पर समय रहते ध्यान देना जरूरी है." - कमल किशोर भारती, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग हमीरपुर

