ETV Bharat / state

भरतपुर के बंध बारेठा में 27 प्रजातियों की तितलियां मिलीं, होस्ट पौधों पर अंडे-कैटरपिलर के प्रमाण...

बटरफ्लाई पार्क में पर्यटकों के लिए स्थानीय स्तर पर गाइड तैयार किए जाएंगे, जिससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा.

Butterfly In Bandh Baretha
बंध बारेठा में पार्क में मंडराती ति​तलियां (ETV Bharat Bharatpur)
author img

By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : September 1, 2026 at 3:16 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

भरतपुर: बंध बारेठा अब तितलियों के संरक्षण और प्रकृति पर्यटन के नए ठिकाने के रूप में पहचान बनाने की राह पर है. वन विभाग के प्रारंभिक सर्वेक्षण में प्रस्तावित क्षेत्र और आसपास 27 प्रजातियों की तितलियां दर्ज हुई हैं. खास बात यह है कि यहां सिर्फ मंडराने और भोजन के प्रमाण ही नहीं, बल्कि होस्ट पौधों पर अंडे और कैटरपिलर भी मिले हैं. यानी यह इलाका अस्थायी बसेरा नहीं, बल्कि प्रजनन और जीवन-चक्र पूरा करने के लिए भी अनुकूल है. इन नतीजों के बाद बटरफ्लाई पार्क विकसित करने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं, जिसे संरक्षण, अनुसंधान, पर्यावरण शिक्षा और ईको-टूरिज्म के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है.

डीएफओ चेतन कुमार बी वी ने बताया कि प्रस्तावित बटरफ्लाई पार्क के लिए 31 अगस्त 2026 को प्रारंभिक मैदानी सर्वेक्षण किया गया. उद्देश्य विविधता, होस्ट पौधों और प्रजनन गतिविधियों का आकलन करना था. सर्वे में तितलियों की सामान्य मौजूदगी के साथ जीवन-चक्र की गतिविधियों को देखा गया, जिनमें अंडे देना, विश्राम और लार्वा अवस्था शामिल हैं. अलग-अलग अवस्थाओं के प्रमाण मिलना सबसे महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है. यदि प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित कर वैज्ञानिक तरीके से आवास विकसित किया जाता है तो विविधता को बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सकता है.

Butterfly In Bandh Baretha
पत्ते पर जमा तितली का अंडा (ETV Bharat Bharatpur)

सर्वे में कई होस्ट पौधों की पहचान हुई है, जिनमें कैसिया ऑक्सीडेंटलिस, कैसिया तोरा, कैसिया सियामिया, जिजिफस आदि शामिल हैं. इनकी मौजूदगी प्रस्तावित स्वरूप के लिए महत्वपूर्ण है. इन्हें संरक्षित करने के साथ देशज प्रजातियों का संवर्धन किया जाएगा, ताकि अंडे देने, कैटरपिलर के विकास और जीवन-चक्र के लिए लगातार अनुकूल वातावरण मिलता रहे.

पढ़ें: सरिस्का में तितलियों की प्रजातियां बढ़कर हुई 48, सर्वेक्षण में दिखीं 'हिमालयन गोल्डन बर्डविंग'

तितलियों का पूरा प्राकृतिक आवास: प्रस्तावित पार्क को केवल फूलों से सजा उद्यान नहीं, बल्कि तितलियों की जरूरत के अनुसार प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित किया जाएगा. इसके लिए देशज पौधों से अलग-अलग क्षेत्र बनाए जाएंगे: होस्ट-प्लांट क्षेत्र, नेक्टर गार्डन, नमी और पडलिंग क्षेत्र, झाड़ी एवं वुडलैंड आवास तथा खुले धूप सेंकने वाले क्षेत्र. नेक्टर गार्डन भोजन के लिए, होस्ट-प्लांट क्षेत्र प्रजनन और कैटरपिलर विकास के लिए और पडलिंग क्षेत्र प्राकृतिक गतिविधियों के लिए उपयोगी होगा.

प्राकृतिक घर में देख सकेंगे: पार्क में प्राकृतिक स्वरूप वाले पैदल मार्ग और अवलोकन क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव है, ताकि पर्यटक तितलियों को प्राकृतिक आवास में देख सकें. जानकारी संबंधी साइनेज से अलग-अलग प्रजातियों, जीवन-चक्र, होस्ट पौधों और पारिस्थितिकी में भूमिका की जानकारी दी जाएगी. साथ ही शिक्षा क्षेत्र विकसित होगा, जिससे स्कूली विद्यार्थियों, प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को संरक्षण की प्रत्यक्ष जानकारी मिलेगी. पार्क की खास विशेषता जीवन-चक्र को समझने का अवसर होगी. आमतौर पर लोग वयस्क रूप देखते हैं, लेकिन यहां अंडे, कैटरपिलर, प्यूपा और वयस्क अवस्था की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को समझाने पर जोर रहेगा. चूंकि प्रारंभिक सर्वे में ही अंडे और कैटरपिलर के प्रमाण मिल चुके हैं, वैज्ञानिक आवास प्रबंधन से इन प्रक्रियाओं को सुरक्षित रखा जा सकेगा.

यह भी पढ़ें: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान बना 'बटरफ्लाई हब', प्रदूषण मुक्त हवा और जैव विविधता की मिसाल

अलग-अलग मौसम में होगा सर्वे, तब सामने आएगी पूरी तस्वीर: डीएफओ ने बताया कि 31 अगस्त का सर्वेक्षण प्रारंभिक था. कई प्रजातियों की मौजूदगी और गतिविधियां मौसम के अनुसार बदलती हैं, इसलिए विभिन्न ऋतुओं में विस्तृत सर्वेक्षण कराने की योजना है. इनमें प्रजातियों, विविधता, होस्ट एवं नेक्टर पौधों और प्रजनन गतिविधियों का दस्तावेजीकरण होगा. लंबे समय की मॉनिटरिंग से समझा जा सकेगा कि कौन-सी प्रजाति किस मौसम में मौजूद रहती है और किस आवास की जरूरत है. इसी वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर आगे बटरफ्लाई पार्क की डिजाइन और आवास प्रबंधन की रणनीति तय की जाएगी.

बढ़ेगा ईको-टूरिज्म: बंध बारेठा पहले से ही प्राकृतिक और वन्यजीव पर्यटन की संभावनाओं वाला क्षेत्र है. पार्क विकसित होने पर पर्यटकों के लिए नया आकर्षण जुड़ेगा. इसे बंध बारेठा और भरतपुर में विकसित हो रहे ईको-टूरिज्म से जोड़ने की योजना है. तितलियों की विविधता देखने आने वाले पर्यटक प्रकृति भ्रमण, बर्ड वॉचिंग और अन्य गतिविधियों के साथ इसे भी यात्रा का हिस्सा बना सकेंगे, जिससे पर्यटन को नया आयाम मिलेगा.

यह भी पढ़ें: पर्यटकों को सौगात : उदयपुर में शुरू हुआ Butterfly Park, जेब्रा स्किपर दिलाएगी विशेष पहचान

बटरफ्लाई गाइड होंगे तैयार: परियोजना में स्थानीय समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी गई है. स्थानीय लोगों को तितली पहचान, मॉनिटरिंग, प्रकृति भ्रमण और पर्यटकों के लिए व्याख्या का प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है. इससे रोजगार के अवसर विकसित होंगे. प्रशिक्षण के बाद स्थानीय युवाओं को नेचर इंटरप्रेटर और बटरफ्लाई गाइड के रूप में तैयार किया जा सकेगा. इससे पर्यटकों को प्रशिक्षित गाइड मिलेंगे और समुदाय को संरक्षण से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा. यदि योजना धरातल पर उतरती है तो बंध बारेठा में ऐसा प्राकृतिक केंद्र विकसित होगा, जहां तितली केवल देखने की चीज नहीं होगी, बल्कि उसके पूरे जीवन-चक्र, आवास और प्रकृति में भूमिका को समझने का अवसर मिलेगा.