छिन्नमस्तिका जयंती पर माता चिंतपूर्णी दरबार में विशेष हवन यज्ञ, रंग-बिरंगे फूलों से सजा मां का दरबार
छिन्नमस्तिका जन्मोत्सव पर प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी के दरबार में आयोजित विश्वकल्याण हवन यज्ञ में लगा भक्तों का तांता.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : April 30, 2026 at 7:58 AM IST
|Updated : April 30, 2026 at 12:47 PM IST
चिंतपूर्णी: हिमाचल प्रदेश को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता है. आए दिन प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों और मंदिरों में देवी-देवताओं के आराधना के लिए विशेष यज्ञ का आयोजन किया जाता है. इसी कड़ी में ऊना जिले के प्रसिद्ध माता चिंतपूर्णी मंदिर में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी छिन्नमस्तिका जयंती का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों और आकर्षक लाइटों से भव्य रूप से सजाया गया है, जिससे पूरा दरबार दिव्य और मनमोहक दिखाई दे रहा है.
छिन्नमस्तिका जयंती पर माता चिंतपूर्णी मंदिर में हवन यज्ञ
पुजारी रोहन कालिया और रितेश कालिया ने बताया कि, मंदिर पुजारी वर्ग द्वारा विश्व कल्याण की भावना से 24 घंटे का अखंड महायज्ञ (हवन) आयोजन किया गया है. ये विशेष महायज्ञ विधिवत पूजन-अर्चना के साथ शुरू हो गया है. इस महायज्ञ में पुजारी विशेष वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ देवी मां का आह्वान किया जा रहा है. इस पवित्र अनुष्ठान में भारी संख्या में श्रद्धआलु भाग ले रहे हैं और समस्त संसार के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना कर रहे हैं. हवन लगातार मंगलवार से 24 घंटे के लिए आयोजित किया गया है और गुरुवार (30 अप्रैल) को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा.
चिंतपूर्णी मंदिर के पुजारी दीपक कालिया ने बताया कि, महायज्ञ संपन्न होने के बाद मंदिर के पास श्री बाबा माई दास सदन में विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा, जहां हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा. इसके साथ ही दुर्गा स्तुति का आयोजन भी होगा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा. प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं. सुरक्षा, यातायात और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न पड़े.

क्यों खास में माता चिंतपूर्णी का दरबार?
माता चिंतपूर्णी देवी हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ है. पौराणिक मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सती के चरण गिरे थे. यहां देवी 'छिन्नमस्तिका' (बिना सिर वाली देवी) के स्वरूप में पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता के अनुसार, माता यहां भक्तों की चिंताएं दूर करती हैं. माता सती का यह पवित्र स्थान 51 शक्तिपीठों में से एक है.

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