सागर के युवा की अनूठी आस्था, 370 किमी दंडवत यात्रा करते पहुंचेगा बाबा महाकाल के दरबार
सागर के शनिचरी इलाके के राम उपाध्याय ने नए साल के पहले दिन भगवान महाकाल के प्रति अपनी आस्था जताने को शुरू की दंडवत यात्रा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 2, 2026 at 4:17 PM IST
सागर: ईश्वर के प्रति अपनी भक्ति और आस्था जताने के लिए लोग तरह-तरह के जतन करते हैं. सागर के एक युवा भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा दर्शाने के लिए 370 किलोमीटर दंडवत यात्रा पर निकला है.
शहर के शनिचरी इलाके के रहने वाले 21 साल के राम उपाध्याय ने नए साल के पहले दिन भगवान महाकाल के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए दंडवत यात्रा की शुरुआत की. सर्दी के मौसम में शुरू की गई यात्रा करीब 3 महीने में पूरी होगी. राम उपाध्याय ने सराफा बाजार इलाके में स्थित धनेश्वर मंदिर से दंडवत यात्रा शुरू की. भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति देखकर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और इलाका हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा.
भगवान शिव के भक्त का अनूठा संकल्प, धनेश्वर महादेव मंदिर से शुरू की यात्रा
राम उपाध्याय(21) ने सागर से उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए दंडवत यात्रा शुरू की. सर्दी के मौसम में 370 किलोमीटर लंबी कठिन यात्रा का संकल्प करीब तीन माह में पूरा हो पाएगा. राम ने अपनी दंडवत यात्रा सर्राफा बाजार के प्राचीन धनेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना कर शुरू की.

अपने इस कठिन संकल्प के बारे में राम उपाध्याय ने बताया कि उनकी भगवान शिव के प्रति बचपन से ही गहरी आस्था है. लंबे समय से उनके मन में भावना थी कि भगवान भोलेनाथ के चरणों में स्वयं को समर्पित करते हुए भगवान महाकाल के तीर्थ उज्जैन तक दंडवत यात्रा करूं. उन्होंने परिजनों की सहमति से नए साल की शुरुआत दंडवत यात्रा के संकल्प के साथ शुरू की.
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उन्होंने अपनी दंडवत यात्रा को लेकर कहा "इस यात्रा का उद्देश्य कोई व्यक्तिगत नहीं है बल्कि विश्व शांति और विश्व कल्याण है. यात्रा समाप्त होने पर मैं भगवान महाकाल के चरणों में विश्व कल्याण और शांति की कामना के साथ यात्रा समाप्त करूंगा."
3 महीने में दंडवत यात्रा संपन्न होने की उम्मीद
भगवान शिव के भक्त राम उपाध्याय दंडवत यात्रा करते हुए आगे बढ़ेंगे. ये यात्रा करीब 370 किमी की होगी, जो ईश्वर पर उनकी अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक है. यात्रा से पहले राम ने अपने आप को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया. राम उपाध्याय कहते हैं "मेरा संकल्प किसी तपस्या की तरह है. लगातार 3 महीने तक दंडवत करते हुए भगवान महाकाल की शरण में पहुंचने के लिए मुझे कठिन तप करना होगा. मुझे भरोसा है कि भगवान भोलेनाथ अपने भक्त को संयम और शक्ति प्रदान करेंगे."
पिता ने कहा, मुझे बहुत गर्व हो रहा है कि मेरा बेटा भगवान बाबा महाकाल दंडवत यात्रा कर रहा
अपने बेटे की दंडवत यात्रा के शुभारंभ में पहुंची श्रीमती संगीता ने कहा कि बेटे के इस संकल्प पर उन्हें गर्व है. युवाओं से उम्मीद है कि वह भी भगवान में इसी तरह की आस्था और विश्वास रखें. राम उपाध्याय के पिता दिनेश उपाध्याय का कहना है "मुझे बहुत गर्व हो रहा है कि मेरा बेटा भगवान महाकाल के चरणों में आस्था व्यक्त करने दंडवत यात्रा कर रहा है." विपरीत मौसम और कठिन संकल्प को लेकर उनका कहना है कि उन्होंने सब कुछ बाबा महाकाल पर छोड़ दिया है, उनके आशीर्वाद से बेटे को कोई दिक्कत नहीं आएगी.

