कुल्लू: सर्दियों में जंगलों में आग लगने के 21 मामले हुए रिपोर्ट, इतने हेक्टेयर वन संपदा को हुआ नुकसान
नवंबर से फरवरी में जंगलों में आग की 21 घटनाएं हुई. वन विभाग आग की घटनाओं पर काबू पाया जा रहा है.


By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 20, 2026 at 3:42 PM IST
कुल्लू: जिला में सर्दियों में जंगलों में आग की घटनाओं से हर साल बड़े स्तर पर पेड़ पौधे जीव जंतुओं और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे इसका असर वातावरण पर पड़ रहा है. इस सर्दी में नवंबर से फरवरी तक आग लगने के 21 मामले रिपोर्ट हुए हैं, जिसमें करीब 635 हेक्टेयर वन भूमि पर वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है.
वहीं, करीब 28 हेक्टेयर वन भूमि पर पेड़ पौधों और जंगली जीव जंतुओं के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुकसान हुआ है. वन विभाग कुल्लू सर्कल ने 635 हेक्टेयर वन भूमि पर आग से करीब साढ़े चार लाख रुपए की संपत्ति के नुकसान का प्रारंभिक तौर पर आंकलन किया गया है. रैपिड एक्शन फोर्स और स्थानीय लोगों की मदद से वन विभाग ने जंगलों में आगज की घटनाओं को रोकने के प्रयास किए हैं. वहीं, बीते कल रात को बिजली महादेव की पहाड़ी में घासनी में आग पर वन विभाग की टीम और स्थानीय लोगों ने कई घंटे कड़ी मशक्कत से काबू पाया है.
635 हेक्टेयर वन भूमि को नुकसान
वन विभाग कुल्लू सर्कल के कंजरवेटर संदीप शर्मा ने कहा कि 'कुल्लू सर्कल में फायर सीजन सर्दियों में नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी, मार्च माह में घासनियों में घास सूखता है. इस दौरान जंगलों में आग की घटनाएं अधिक होती हैं. वन विभाग कुल्लू सर्कल में इस वर्ष अब तक 635 हेक्टेयर वन भूमि को आग की घटनाओं से नुकसान हुआ है, जिससे 607 हेक्टेयर वन भूमि घासनी है, जबकि 28 हेक्टेयर भूमि जंगल में पेड़ पौधे को नुकसान हुआ है, जिसमें प्रारंभिक रिपोर्ट करीब साढ़े रुपए का नुकसान हुआ है. पूरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद विस्तृत तौर पर नुकसान का आकलन किया जाएगा'.
इस साल कम हुई आग की घटनाएं
संदीप शर्मा ने कहा कि पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष वन भूमि पर आगजनी की घटनाएं कम हुई है और इसके लिए इस वर्ष वन विभाग ने रैपिड एक्शन टीम, डिवीजन लेवल पर कंट्रोल रूम बनाए हैं, जहां पर लोकल लोगों की सहायता से आग को बुझाने में सहयोग लिया जा रहा है. वन विभाग कुल्लू सर्कल में जंगलों में इन सर्दियों में (नवंबर से फरवरी) आगजनी के 21 मामले रिपोर्ट हुए हैं, जिसमें पार्वती वन मंडल में 16 मामले हैं, जबकि बंजार वन मंडल के 4 मामलें हैं. एक मामला वन मंडल लाहौल का है. वन विभाग के फायर इंजन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कोई भी व्यक्ति आग की घटनाओं की जानकारी ऑनलाइन ले सकता है. डिवीजन लेवल पर फायर इंजन ऑनलाइन पोर्टल में जंगलों में आगजनी की घटना और उसमें कितना नुकसान हुआ है. उसकी पूरी जानकारी अपलोड की जाती है.
शाम को आग बुझाने में आती है परेशानी
बातचीत में संदीप शर्मा ने आगे कहा कि पार्वती वन मंडल में ज्यादातर एरिया घना है. यहां सर्दियों में घास सूखती है, इसलिए आग की ज्यादा घटनाएं होती हैं. दूसरी तरफ लोगों में एक भ्रम है कि सर्दियों में घासनियों में आग लगाने पर अगले सीजन में अच्छी घास उगती है. वन विभाग का ज्यादातर एरिया दूर दराज के क्षेत्र में है. दूर दराज के क्षेत्रों में शाम के समय आग को बुझाने में परेशानी आती है, जिसके चलते ज्यादातर वन भूमि को नुकसान होता है. जंगलों में आग की घटनाओं से पर्यावरण जीव जंतुओं को भारी नुकसान हो रहा है. ऐसे में जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को जागरूक होकर जंगलों की आग को रोकने के लिए सहयोग करते हैं.
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