2 साल बनाम 5 साल: दो साल के प्रतिवेदन पर विपक्ष की आपत्ति, सदन में हंगामा, कार्यवाही 5वीं बार स्थगित
सदन में इस बात को लेकर काफी बहस हुई कि मुद्दा 2 साल बनाम 5 साल था या नहीं.


Published : February 21, 2026 at 4:43 PM IST
जयपुर: राजस्थान विधानसभा में शनिवार को 2 साल बनाम 5 साल पर चर्चा के बीच सत्ता पक्ष की ओर से 2 साल के कामकाज का प्रतिवेदन सदन में पेश करने और उस पर चर्चा करने को लेकर विपक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई. विपक्ष ने सरकार से 2 साल बनाम 5 साल पर ही चर्चा करने की मांग की. इसे लेकर सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर सदन से भगाने के आरोप लगाए. इस दौरान पक्ष–विपक्ष की तरफ से सदन में शोर–शराबा और हंगामा हुआ. विपक्ष के सदस्यों ने वेल में आकर नारेबाजी की. इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी. इसके बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो सभापति ने सदन की कार्यवाही 5वीं बार आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी.
'यह परिपाटी गलत': इससे पहले 5 साल बनाम 2 साल की चर्चा के लिए स्पीकर ने पुकारा, तो नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि बात 5 साल बनाम 2 साल के कामकाज पर हुई थी. बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में भी यही तय हुआ था, तो फिर 2 साल के कामकाज का प्रतिवेदन क्यों सदन में लाया गया है? यह परिपाटी गलत है. इसलिए सरकार को दोबारा 2 साल बनाम 5 साल का प्रस्ताव लाकर उस पर चर्चा करनी चाहिए. संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने जो कहा हैए वो सही नहीं है. मुख्यमंत्री ने बहस की चुनौती स्वीकार करते हुए तब भी ये प्रतिवेदन सदन की पटल पर रखा था और उसी के अनुरूप विधानसभा सचिवालय ने इसे तैयार किया है और यही सब सदस्यों को भेजा गया है. इसलिए नेता प्रतिपक्ष की आपत्तियों को खारिज किया जाए.
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डोटासरा ने दिया भाषण का हवाला: कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो भाषण दिया था. उसके पेज नंबर 27 पर लिखा है कि राजस्थान की विधानसभा सबसे बड़ी पंचायत है और 8 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करती है. अगर मेरी सरकार के दो कार्यकाल और पूर्ववर्ती सरकार के 5 साल के कार्यकाल के विकास कार्यों पर बहस हो तो यह उचित है. मैं नेता प्रतिपक्ष की चुनौती को स्वीकार करता हूं कि 5 साल बनाम 2 साल के कामकाज पर बहस होनी चाहिए.
'सीएम की बात की वैल्यू नहीं...': डोटासरा ने आरोप लगाया कि जब मुख्यमंत्री ने सदन में अपनी बात कही है, तो फिर उनकी बात को ही वैल्यू क्यों नहीं दी जा रही है. भाजपा सरकार मुख्यमंत्री की बेइज्जती करवा रही है. अगर मुख्यमंत्री की बात को नहीं रखा जा रहा है तो फिर यह साबित होता है कि यह पर्ची के मुख्यमंत्री हैं. मुख्यमंत्री सदन के नेता हैं और अगर मुख्यमंत्री की बात की वैल्यू नहीं है तो फिर आप और हम लोग यहां पर क्यों हैं. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि मैं नेता प्रतिपक्ष की चुनौती स्वीकार करता हूं. सदन को गुमराह करने की बजाय दोबारा से इस पर प्रस्ताव लाए और फिर चर्चा कराएं. जोगाराम पटेल ने कहा कि 2 साल के कामकाज का प्रतिवेदन डाक के जरिए सब सदस्यों घर पहुंच गए, सब ने पढ़ भी लिया है. कांग्रेस सदन से भागना चाहती है. इसलिए इस तरह की भूमिका बना रही है.
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'चर्चा करने को तैयार, लेकिन प्रस्ताव दोबारा लाएं': वहीं कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि 2 वर्ष बनाम 5 वर्ष का संशोधित प्रस्ताव दोबारा लेकर आएं, हम चर्चा करने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि प्रतिवेदन तो हर विभाग का आता है तो क्या फिर हर विभाग का हर साल एक दिन चर्चा के लिए तय किया जाए. उन्होंने कहा कि हमने मुख्यमंत्री को 2 साल बनाम 5 साल की चुनौती दी थी. मुख्यमंत्री ने उस चुनौती को स्वीकार किया था और यह ऑन रिकॉर्ड है. अगर इस पर बहस होगी, तो हम 100 फीसदी इस पर बहस करेंगे, लेकिन जिस तरह से प्रतिवेदन लाकर इससे नए तरीके से मोड जा रहा है वह ठीक नहीं है.
'अधिकारी रोज प्रतिवेदन बनाते हैं': उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी तो रोज प्रतिवेदन बनाते हैं, हमारी सरकार के समय भी बनाते थे और आपकी सरकार के समय भी बना रहे हैं. चर्चा इस बात की होगी कि हमारी सरकार के समय सुशासन कैसा था? आपकी सरकार के समय सुशासन कैसा है? इसी बीच दोनों तरफ से शोरगुल तेज हो गया और हंगामा शुरू हो गया. कांग्रेस सदस्यों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी. नारेबाजी के बीच ही स्पीकर ने कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी.

