क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर 50 करोड़ की ठगी, गैंग के 2 मास्टरमाइंड गिरफ्तार
आगरा पुलिस ने किया खुलासा, 6 राज्यों के हजारों लोगों को अब तक बना चुके हैं अपना शिकार

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 8:58 PM IST
आगरा: पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने शनिवार दोपहर क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा किया. पुलिस ने ठग मंडली के 2 मास्टरमाइंड गिरफ्तार किए हैं. दोनों से पूछताछ में 6 राज्यों के हजारों लोगों से 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा हुआ है. एडीसीपी क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी के साइबर थाना में 2 मुकदमे दर्ज किए गए थे. जिसकी जांच में गिरोह की परतें खुलती चली गईं.
एडीसीपी क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि आगरा के कई लोगों से साइबर ठगी की शिकायत की थी. जिसमें क्रिप्टो करेंसी के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का जिक्र था. जिसमें आरोपियों ने फर्जी वेबसाइट और देशभर में सेमिनार आयोजित करके क्रिप्टो में निवेश पर मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी की थी. क्रिप्टो करेंसी ठग गिरोह ने ठगी के लिए अपनी ही वेबसाइट पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को निवेश पर मुनाफा दर्शाते थे. जिस पर आगरा के साइबर थाना पुलिस ने 2024 में 2 मुकदमे दर्ज किए गए.
क्रिप्टो करेंसी गिरोह के 2 मास्टरमाइंड गिरफ्तार: एडीसीपी ने बताया कि क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह एक राज्य और जिले में सेमिनार से अच्छी रकम जमा होने के बाद दूसरे शहर में शिफ्ट हो जाते थे. साइबर थाना पुलिस ने छानबीन की. जिसमें कई अहम बातें सामने आईं. साइबर थाना पुलिस ने छानबीन करके क्रिप्टो करेंसी गैंग के 2 मास्टरमाइंड गिरफ्तार किए हैं. जिनके नाम विनय कुमार निवासी सैनानी बिहार, तेलीबाग लखनऊ और विनोद कुमार निवासी बागपत हैं. विनोद के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं. ठगी की रकम से विदेश में किए गए निवेश, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच जारी है.
फरार आरोपियों की तलाश में दबिश: ADCP सिंह ने बताया कि गिरोह के फरार साथियों में नरेंद्र कुमार सिसोदिया, शुभम सिसोदिया, गोपाल और सचिन स्वामी हैं. आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं. आरोपियों से पूछताछ में गिरोह के बारे में तमाम अहम जानकारी मिली हैं. जिनके आधार पर इस मामले में कई और खुलासे होंगे.
यूं गिरोह करता था ठगी का खेल: पुलिस की पूछताछ में क्रिप्टो करेंसी गिरोह के मास्टरमाइंड विनय कुमार और विनोद कुमार ने ये खुलासा किया, पहले किसी राज्य का जिला तय करते. वहां पर सोशल मीडिया से पहले प्रचार और प्रसार करके लोगों को निवेश के नाम पर सेमिनार करते. जिसमें लोगों से मोटे मुनाफे की बात करते. होटल्स में सेमिनार करके वहां पर लगभग 1500 लोगों को रैफरल सिस्टम के माध्यम से जोड़ते. इसके बाद प्रति व्यक्ति को 8500 रुपये में ID बनाने को कहते. इसके बाद निवेश बढ़ाने पर मुनाफा कई गुना होने का लालच दिया जाता था. इसके बाद लोगों को रैफरल कोड के नाम पर ठगी का खेल शुरू होता था. लोगों को मोटी कमाई के नाम पर दुबई और अन्य में निवेश का झांसा भी दिया जाता था.
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