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AIIMS बिलासपुर में भरे जाएंगे प्रोफेसर के 19 पद, स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती

हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है. प्रदेश के प्रसिद्ध AIIMS बिलासपुर में प्रोफेसर के खाली पड़े पदों पर भर्ती होगी.

AIIMS बिलासपुर
AIIMS बिलासपुर (FILE)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : June 3, 2026 at 8:59 PM IST

2 Min Read
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बिलासपुर: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में आने वाले मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने और शोध कार्य में मजबूती लाने के लिए संस्थान ने कार्य शुरू कर दिया है. संस्थान में विभिन्न विभागों के 19 विशेषज्ञ प्रोफेसरों की नियुक्तियां की जा रहीं हैं. इससे न केवल अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज की सुविधा मिलेगी, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान (रिसर्च) की गतिविधियों को भी एक नई दिशा और गति प्राप्त होगी.

एम्स बिलासपुर में केवल हिमाचल प्रदेश के ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड से भी हर दिन भारी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. बाहरी राज्यों के मरीजों की इस बड़ी निर्भरता को देखते हुए अस्पताल के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति को एक अनिवार्य और बेहद अहम कदम माना जा रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों से संस्थान का बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य सेवाएं पहले से कहीं अधिक सशक्त हो जाएंगी.

संस्थान के कुल 19 विभागों में प्रोफेसर स्तर के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है. इसके तहत एनेस्थीसियोलाजी विभाग में सबसे ज्यादा दो पदों पर नियुक्ति की जाएगी. इसके अलावा बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी, कार्डियोलाजी, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी, डर्मेटोलाजी, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी तथा हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में एक-एक पद भरा जाएगा. साथ ही न्यूरोलाजी, न्यूरोसर्जरी, नेत्र रोग, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक सर्जरी, पैथोलाजी, मनोचिकित्सा, पल्मोनरी मेडिसिन, रेडियोथेरेपी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एवं ब्लड बैंक और यूरोलाजी जैसे बेहद संवेदनशील व महत्वपूर्ण विभागों में भी एक-एक प्रोफेसर की तैनाती की जाएगी.

संस्थान प्रबंधन का मानना है कि चिकित्सकों के आने से एम्स बिलासपुर में सुपर स्पेशियलिटी उपचार सेवाओं का तेजी से विस्तार होगा. इसका सीधा फायदा उन मरीजों को मिलेगा, जिन्हें जटिल रोगों के इलाज के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था. इसके अलावा, इन वरिष्ठ डाक्टरों की मौजूदगी से संस्थान में होने वाले शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और मेडिकल के छात्रों को भी बेहतरीन प्रशिक्षण मिल सकेगा. वहीं, अस्पताल के जूनियर और रेजिडेंट डाक्टरों को इन अनुभवी विशेषज्ञों की देखरेख में काम करने का मौका मिलेगा, जिससे संस्थान के शैक्षणिक स्तर और चिकित्सा की गुणवत्ता में भारी सुधार देखने को मिलेगा.

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