195 साल पुराने गरुड़ विमान में सवार होकर राजगढ़ भ्रमण को निकलेंगे भगवान जगन्नाथ, 16 जुलाई को 172वीं रथयात्रा
अलवर के राजगढ़ में राजशाही जमाने में 1855 में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की शुरुआत हुई. राजगढ़ की रथयात्रा जिले में सबसे पुरानी है.

Published : July 8, 2026 at 2:26 PM IST
अलवर: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की धूम केवल ओडिशा के जगन्नाथपुरी में ही नहीं, बल्कि अलवर जिले के राजगढ़ कस्बे में भी लगभग 171 सालों से निर्बाध रूप से जारी है. यहां भगवान जगन्नाथ 195 साल पुराने गरूड़ रथ में सवार होकर नगर भ्रमण को निकलते हैं. इस बार 172 वीं रथयात्रा 16 जुलाई को निकाली जाएगी. राजगढ़ कस्बा अलवर की पूर्व रियासत का केंद्र रहा है. इस कारण वहां पूर्व राजशाही जमाने में 1855 में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की शुरुआत हुई. इसके बाद अलवर और मालाखेड़ा व भिवाड़ी आदि शहरों में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा हर साल होती है.
रथयात्रा के 171 वर्ष पूरे : राजगढ़ के चौपड़ बाजार स्थित जगन्नाथ मंदिर के महंत मदनमोहन शास्त्री ने बताया, राजगढ़ में हर साल निकलने वाली रथयात्रा का आकर्षण भगवान जगन्नाथ का गरुड़रूपी रथ है, जो लगभग 195 वर्ष पुराना है. वर्ष 1855 में इसी रथ पर पहली बार राजगढ़ में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली थी, तब से यह परंपरा लगातार चली आ रही है. अब रथयात्रा के 171 वर्ष पूरे हो चुके हैं.
पुरी के कारीगरों ने तैयार किया गरुड़रूपी रथ: जगन्नाथ मंदिर के महंत मदनमोहन शास्त्री ने बताया कि राजगढ़ में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए गरुड़रूपी रथ का निर्माण मंदिर के प्रथम महंत केशवदास महाराज ने कराया था. रथ तैयार करने जगन्नाथ पुरी से कारीगर बुलाए गए थे. इस गरुड़रूपी रथ को करीब 195 साल पहले तैयार कराया गया था. खास बात है कि तब टेक्नोलॉजी का ज्यादा विस्तार नहीं हुआ और पुरातन पद्धति से ही कारीगर रथ आदि तैयार करते थे, लेकिन राजगढ़ में गरुड़रूपी रथ में उस समय भी तकनीक का उपयोग किया. इसी का नतीजा है कि 195 साल बाद भी यह रथ चलायमान स्थिति में है. हर वर्ष इसी रथ में यात्रा निकाली जाती है. रथयात्रा से करीब 8 दिन पहले रथ को रथखाने से बाहर निकाल रखरखाव कार्य करते हैं.

जिले में सबसे पहले राजगढ़ में शुरू हुई थी जगन्नाथ यात्रा: ओडिशा के पुरी की तर्ज पर अब अलवर जिले में कई जगह भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा हर साल निकाली जाती है. इनमें लाखों लोगों की भागीदारी रहती है. भगवान जगन्नाथ के प्रति आस्था के चलते लोग रथयात्रा में दूल्हा रूपी सजे अपने आराध्य की झलक पाने को घंटों भीड़ में इंतजार करने से भी गुरेज नहीं करते. वैसे जिले में निकाली जाने वाली सभी भगवान जगन्नाथ रथयात्राओं को महत्व है, लेकिन राजगढ़ की जगन्नाथ यात्रा का आसपास भी विशेष महत्व है. इसका कारण है कि जिले में सबसे पुरानी रथयात्रा होना है. इसके बाद अलवर में हर साल जगन्नाथ यात्रा होने लगी.
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जगन्नाथ मंदिर का इतिहास दो शताब्दी पुराना: महंत मदनमोहन ने बताया कि राजगढ़ के चौपड़ बाजार स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर का इतिहास दो शताब्दियों से अधिक पुराना है. मंदिर की स्थापना को लगभग 217 वर्ष हो चुके. तत्कालीन अलवर नरेश महाराजा शिवदान सिंह ने गंगाबाग परिसर मेले व रथयात्रा को समर्पित किया. यहां हर साल मेला लगता है. कस्बे के चौपड़ बाजार स्थित जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकलती है, जो पूरे कस्बे में भ्रमण गंगाबाग स्थित मेला परिसर में पहुंचती है. वर्तमान में मंदिर महंत पूर्णदास, पंडित मदनमोहन शास्त्री और पंडित रोहित शर्मा महंत भगवान जगन्नाथ मंदिर की दसवीं पीढ़ी के रूप में सेवा-पूजा कर रहे हैं.
पुरी की तर्ज पर निभाई जाती हैं परंपराएं: मदनमोहन शास्त्री ने बताया कि राजगढ़ की रथयात्रा पुरी की परंपरा का अनुसरण करती है. रथयात्रा से 15 दिन पहले भगवान जगन्नाथ का 108 कलशों और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है. इसके बाद भगवान 15 दिन विश्राम अवधि में रहते हैं, जहां औषधीय काढ़े से उपचार किया जाता है. आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को भगवान गर्भगृह से बाहर विराजमान होते हैं. उसी दिन नेत्रोत्सव किया जाता है. शाम को माता जानकी की सवारी श्रीजगन्नाथ मंदिर पहुंचती है, जहां गणेश पूजन और मंदिर मार्जन की रस्में संपन्न होती हैं.
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विशेष शृंगार रहेगा आकर्षण का केंद्र: महंत ने बताया, इस बार 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ को दूल्हे के स्वरूप में सजाया जाएगा. उन्हें वृंदावन की विशेष शाही पोशाक पहनाएंगे. शृंगार जयपुर के शाही मोगरे और सऊदी अरब से मंगवाए विशेष इत्र से किया जाएगा. 20 जुलाई को भगवान जगन्नाथ और माता जानकी का भव्य वरमाला महोत्सव होगा. इसके लिए विशेष पुष्प मालाएं दिल्ली और हरियाणा से मंगवाई हैं.
ऐतिहासिक परंपरा का बनेगा साक्षी राजगढ़: मंदिर प्रशासन और मेला समिति के अनुसार, रथयात्रा को पारंपरिक और भव्य स्वरूप देने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और धार्मिक आयोजन की सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है. हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के रथ यात्रा में शामिल होने की संभावना है.


