प्रशासन की संवेदनशील पहल: दुर्लभ बीमारी डीएमडी से ग्रस्त गर्वित बने एक दिन के 'कलेक्टर'
कुचामन कलेक्टर अवधेश मीणा ने 15 वर्षीय बच्चे को सौंपी कुर्सी. गर्वित ने सुनी जनता की फरियाद.

Published : June 3, 2026 at 5:15 PM IST
कुचामन सिटी: यह कहानी है दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से जूझ रहे बच्चे के सपने और उसके परिवार के संघर्ष की, इस पर प्रशासन की संवेदनशील पहल ने हर किसी को भावुक कर दिया. जिला कलेक्ट्रेट में कलेक्टर की कुर्सी पर बैठा 15 वर्षीय गर्वित रेवाड़ 11वीं का छात्र है. प्रशासन की पहल ने बुधवार को गर्वित के उस सपने को पूरा कर दिया, जो कभी उसने और परिवार ने देखा था. जिले का रोडू निवासी गर्वित में काबिलियत भी है और यह कुर्सी उसका ख्वाब भी है. असल में गर्वित ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) से पीड़ित है. शुरू से मेघावी छात्र गर्वित की तमन्ना आईएएस बनकर जिले की कमान संभालने की थी, लेकिन दुर्लभ बीमारी बाधा बन गई. परिवार ने उसके सपने को जिला कलेक्टर अवधेश मीणा से साझा किया तो नई कहानी बन गई. कलेक्टर मीणा ने गर्वित को एक दिन का कलेक्टर बनाकर अपनी कुर्सी सौंप दी. यह लम्हा रेवाड़ परिवार के लिए यादगार बन गया.
जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने बताया कि गर्वित और उसके माता-पिता कुछ दिन पहले मिलने आए थे. दुर्लभ जेनेटिक बीमारी डीएमडी होने के बावजूद गर्वित ने दसवीं में 84 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जो बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने बताया कि इंसान को किसी भी स्थिति में कुछ भी हो जाए, लेकिन गिव अप नहीं करना चाहिए. गिव अप नहीं किया तो कामयाबी जरूर मिलेगी. गर्वित से मिलने के बाद तय किया कि उसे एक दिन का आईएएस बनाएंगे ताकि जिले में लोग एवं बच्चे विपरीत हालात में भी खुद को मोटिवेट रख सकें. आपको लक्ष्य पूरा करने की कोशिश करते रहनी चाहिए. कभी हार नहीं माननी चाहिए.
कार्मिकों की बैठक ली, जनसुनवाई की: आरएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे गर्वित के पिता हरलाल रेवाड़ ने बताया कि गर्वित शुरू से पढ़ाई में मेधावी रहा. घर में पढ़ाई का माहौल है. इसने गर्वित के मन में आईएएस बनकर कलेक्टर बनने का सपना जगाया. हालांकि नियति को कुछ और मंजूर था. गर्वित की बीमारी ने परिवार को हिला दिया. हमने कलेक्टर अवधेश मीणा से बेटे की बीमारी और सपने के बारे में बताया. गर्वित की कहानी सुनकर कलेक्टर ने उसे एक दिन का सांकेतिक कलेक्टर बनाया. बुधवार को गर्वित कलेक्टर की गाड़ी से कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां स्वागत किया गया. गर्वित को कलेक्टर की कुर्सी पर बैठाकर पदभार ग्रहण कराया गया. इसके बाद गर्वित ने कार्मिकों की बैठक ली. जन सुनवाई की. फरियादियों की समस्याएं सुन संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए.

परिवार की छलकी आंखें: गर्वित को कलेक्टर की कुर्सी पर बैठा देख माता-पिता की आंखें छलक गई. माता सुनीता रेवाड़ ने कहा, बीमारी की जानकारी मिलने के बाद जीवन कठिन जरूर हुआ, लेकिन कभी उम्मीद नहीं छोड़ी. उनका लक्ष्य हमेशा गर्वित के सपनों को पूरा करना रहा. आज गर्वित का सपना पूरा हुआ तो परिवार के लिए यह पल किसी उपलब्धि से कम नहीं था. माता-पिता ने कलेक्टर मीणा का आभार जताया. वे बोले, कलेक्टर साहब की संवेदनशील पहल ने हमारे बेटे के चेहरे पर ऐसी मुस्कान ला दी, जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे.

