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दिल्ली में रोजाना 13 हजार टन कचरा, एलजी तरनजीत सिंह संधू ने दी 'इंदौर मॉडल' अपनाने की सलाह

दिल्ली के कचरा संकट से निपटने के लिए MCD और IIT दिल्ली ने एक साझा मंथन कार्यशाला का आयोजन किया.

एलजी तरनजीत सिंह संधू
एलजी तरनजीत सिंह संधू (दिल्ली एलजी एक्स हैंडल)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : September 1, 2026 at 8:42 PM IST

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Updated : September 1, 2026 at 10:32 PM IST

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों और रोजाना निकलने वाले हजारों टन कचरे से मुक्ति दिलाने के लिए अब देश के सबसे बेहतरीन मॉडल की मदद ली जाएगी. इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में MCD और IIT दिल्ली द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यशाला में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने साफ किया कि जरूरतों के मुताबिक 'इंदौर मॉडल' का अध्ययन कर उसे राजधानी में लागू करना समय की मांग है, ताकि दिल्ली के कचरा संकट का स्थाई समाधान खोजा जा सके.

उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली में प्रतिदिन करीब 13 हजार मीट्रिक टन नगर निगम कचरा पैदा होता है. ऐसे में केवल कचरा उठाने और लैंडफिल तक पहुंचाने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है. दिल्ली को अब ‘वेस्ट-टू-लैंडफिल’ की सोच से आगे बढ़कर वेस्ट-टू-वेल्थ’ मॉडल अपनाना होगा, जिसमें कचरे को संसाधन में बदलने पर जोर दिया जाए. उन्होंने कहा कि कचरा प्रबंधन केवल सफाई से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और दिल्लीवासियों के जीवन की गुणवत्ता से है. इसके लिए घर से ही गीले, सूखे, सैनिटरी और घरेलू खतरनाक कचरे का अलग-अलग संग्रह बेहद जरूरी है.

उपराज्यपाल ने कचरा प्रबंधन में तकनीक, डिजिटल मॉनिटरिंग और बेहतर डेटा प्रबंधन के इस्तेमाल पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश-दुनिया में जहां भी कचरा प्रबंधन के सफल मॉडल लागू हुए हैं, दिल्ली को उनसे सीख लेकर अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उन्हें अपनाना चाहिए. उन्होंने इंदौर को इसका प्रमुख उदाहरण बताया है.

वहीं, कार्यशाला में मेयर प्रवेश वाही ने कहा कि राजधानी को स्वच्छ बनाना केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने लैंडफिल साइटों को साफ करने, स्वच्छता ढांचे को मजबूत करने और नई मशीनरी के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए चुनिंदा वार्डों को मॉडल वार्ड के रूप में विकसित करने पर जोर दिया. इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि स्वच्छता के लिए नागरिकों का विश्वास हासिल करना और उनकी शिकायतों का समय पर समाधान करना जरूरी है. उन्होंने जीरो वेस्ट वार्ड, जीरो वेस्ट कॉलोनी और जीरो वेस्ट रोड जैसी पहल पर जोर दिया.

जबकि, MCD आयुक्त संजीव खिरवार ने कहा कि स्रोत पर कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और संसाधनों की रिकवरी निगम की प्राथमिकता है. गीले कचरे से कंपोस्ट और बायोगैस तथा सूखे कचरे से रिसाइक्लिंग योग्य सामग्री निकालकर लैंडफिल पर दबाव कम करने की दिशा में काम किया जा रहा है.

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Last Updated : September 1, 2026 at 10:32 PM IST